NIA Raids: केरल में एनआईए ने की छापेमारी, पीएफआई सदस्यों के 56 ठिकानों पर मारा छापा
एनआईए के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई संगठन को नए नाम से पुनर्जीवित करने के प्रयासों को देखते हुए की जा रही है। बता दें, केरल मूल के इस कट्टरपंथी संगठन ने देशभर में अपनी जड़ें जमा ली थीं। इसके गैर कानूनी कार्यों को देखते हुए केंद्र ने इस पर सितंबर में पाबंदी लगा दी थी।
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बृहस्पतिवार को केरल में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के 56 ठिकानों पर छापा मारा। पीएफआई व उसके सदस्यों की गैरकानूनी एवं हिंसक गतिविधियों से जुड़े मामले में यह कार्रवाई की गई।
एनआईए के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई संगठन को नए नाम से पुनर्जीवित करने के प्रयासों को देखते हुए की जा रही है। बता दें, केरल मूल के इस कट्टरपंथी संगठन ने देशभर में अपनी जड़ें जमा ली थीं। इसके गैर कानूनी कार्यों को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस पर सितंबर में पाबंदी लगा दी थी।
एनआईए प्रवक्ता ने बताया कि केरल के 12 जिलों में राज्य कार्यकारी समिति के सात सदस्यों व इतने ही जोनल प्रमुखों के आवासों पर छापा मारा गया। इनके अलावा 15 फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर-ट्रेनर और जानलेवा हमला करने के लिए चाकू, खंजर, तलवार व अन्य हथियार के इस्तेमाल में माहिर सात कैडरों के आवासों को भी खंगाला गया।
इन लोगों के अलावा 20 अन्य संदिग्धों के घर पर भी तलाशी ली गई। एनआईए प्रवक्ता के मुताबिक, एर्नाकुलम में सबसे अधिक 13, कन्नूर में नौ, मल्लापुरम में सात, वायनाड में छह, कोझिकोड में चार और त्रिवेंद्ररम, कोल्लम, पठानमथिट्टा और अलप्पुझा में तीन-तीन व त्रिसुर-कोट्टायम में दो-दो और पलक्कड़ में एक जगह छापा मारा गया। इस दौरान धारदार हथियार, आपत्तिजनक सामग्री और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।
एर्नाकुलम में पीएफआई के नेताओं से जुड़े आठ ठिकानों पर छापे मारे गए हैं। वहीं, तिरुवनंतपुरम में छह परिसरों पर जांच जारी है। यह कार्रवाई गुरुवार सुबह चार बजे एक साथ शुरू की गई। उल्लेखनीय है कि पीएफआई का गठन 2006 को केरल में ही हुआ था। इसके बाद इसने 2009 में एक राजनीतिक संगठन 'सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया' भी बनाया था।
केंद्र द्वारा संगठन पर पाबंदी लगाने के खिलाफ केरल में हड़ताल भी की गई थी। इस दौरान राज्य में व्यापक हिंसा हुई थी। इस हिंसा के खिलाफ केरल हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था और केरल की वाम मोर्चा सरकार को निर्देश दिया था कि हड़ताल के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई आरोपियों और अधिकारियों से करें।