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NIA: लंदन में भारतीय उच्चायोग पर हमले के सिलसिले में एनआईए को मिली बड़ी सफलता, मुख्य आरोपी को किया गिरफ्तार
Thu, 25 Apr 2024 08:54 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 25 Apr 2024 08:54 PM IST
सार
मामले में एनआईए की अब तक की जांच से पता चला है कि पिछले साल 19 और 22 मार्च को लंदन में हुईं घटनाएं भारतीय मिशनों और उसके अधिकारियों पर हमला करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थीं।
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एनआईए
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है। एजेंसी ने पिछले साल मार्च में लंदन में भारतीय उच्चायोग पर हमले से संबंधित एक मामले में गुरुवार को मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि ब्रिटेन के हाउंस्लो निवासी इंद्रपाल सिंह गाबा को गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, पिछले साल 22 मार्च लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
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मामले में एनआईए की अब तक की जांच से पता चला है कि पिछले साल 19 और 22 मार्च को लंदन में हुईं घटनाएं भारतीय मिशनों और उसके अधिकारियों पर हमला करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थीं। खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों ने लंदन में भारतीय मिशन में तोड़फोड़ करने की कोशिश की थी। उन्होंने 19 मार्च को उच्चायोग के परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए तिरंगे का अपमान किया था।
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इसमें कहा गया कि मार्च 2023 में लंदन में हुए हमले 18 मार्च 2023 को खालिस्तानी समर्थक अलगाववादी अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस की गई कार्रवाई का बदला थे।
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अमृतपाल सिंह को एक महीने से अधिक समय तक चले तलाशी अभियान के बाद पिछले साल 23 अप्रैल को मोगा के रोडे गांव से गिरफ्तार किया गया था। 'वारिस पंजाब दे' अमृतपाल अपने अपने नौ सहयोगियों के साथ असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। एनआईए ने पिछले साल जून में पांच वीडियो जारी किए थे और हिंसक प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान करने में आम जनता की मदद मांगी थी।
इससे पहले एनआईए की एक टीम ने मामले की जानकारी के लिए लंदन का दौरा किया था और स्कॉटलैंड यार्ड के अधिकारियों से बातचीत की थी। एजेंसी ने पिछले साल अप्रैल में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच अफने हाथ में ली थी, जिसने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। मामले में आगे की जांच जारी है।