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गंगा में परिवहन को लेकर एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय से मांगी रिपोर्ट
Sat, 19 Dec 2020 03:49 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 19 Dec 2020 03:49 AM IST
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एनजीटी
- फोटो : Twitter
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एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय से गंगा नदी में जल परिवहन परियोजनाओं को लेकर रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी ने मंत्रालय से यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि गंगा नदी में वाराणसी से हल्दिया तक अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) कराने की आवश्यकता है या नहीं।
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष जस्टिस एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को गौर किया कि पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से गठित विशेषज्ञों की समिति ने करीब एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अपनी रिपोर्ट दाखिल नहीं की है।
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एनजीटी पीठ भरत झुनझुनवाला और अन्य की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें ईआईए अधिसूचना की अनुसूची के बिंदु 7(ई) का हवाला दिया गया है। इस बिंदु के मुताबिक, बंदरगाह, पत्तन, बैक वाटर और तलकर्षण के लिए मंजूरी की आवश्यकता होगी। हालांकि इस बिंदु में आगे यह कहा गया है कि मरम्मत के लिए तलकर्षण को इस दायरे से बाहर रखा गया है।
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याचिकाकर्ता ने मंत्रालय के एक हलफनामे का हवाला दिया, जिसमें एक विशेषज्ञ समिति ने कहा है कि राष्ट्रीय जलमार्ग -1 के वाराणसी-हल्दिया खंड में नौवहन सहायता के संवर्धन के लिए जल मार्ग विकास परियोजना के कार्यान्वयन का प्रस्ताव ईआईए अधिसूचना 2006 के तहत आता है। बाद में पर्यावरण मंत्रालय, सड़क परिवहन व जल स्रोत मंत्रालय के बीच एक बैठक में इसे ईआईए के दायरे से बाहर कर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना है ये
वाराणसी से हल्दिया तक के अंतर्देशीय जलमार्ग को जलमार्ग विकास प्रोजेक्ट (जेएमवीपी) के तहत नेशनल वाटरवे-1 (एनडब्ल्यू-1) के तौर पर विश्व बैंक के तकनीकी व आर्थिक सहयोग से विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का प्रबंधन भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के जिम्मे है।
केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के मुताबिक, करीब 5,369.18 करोड़ रुपये (80 करोड़ डॉलर) की अनुमानित लागत वाली यह जलमार्ग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसे विश्व बैंक और भारत सरकार 50-50 के साझा सहयोग से विकसित कर रहे हैं। करीब 80 करोड़ डॉलर की लागत में से 37.5 करोड़ डॉलर आईबीआरडी (इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट) कर्ज से मिलेगा।