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Kolkata : बंगाल में बदल रही बयार, अभिषेक बनर्जी की तस्वीरों वाले पोस्टर लगे, लिखा- 'छह महीने में नई TMC'
Wed, 17 Aug 2022 02:47 AM IST
योगेश साहू
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: योगेश साहू
Updated Wed, 17 Aug 2022 02:47 AM IST
सार
Kolkata : राज्य में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ये पोस्टर टीएमसी के साथ आंतरिक-पार्टी संघर्ष का नतीजा थे। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से टीएमसी के भीतर एक आंतरिक संघर्ष जारी है।
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अभिषेक बनर्जी की तस्वीरों वाले पोस्टर लगे
- फोटो : ANI
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विस्तार
Kolkata : पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस प्रदेश की राजनीति में बदलाव के लिए नई पीढ़ी को आगे लाने को कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में कोलकाता की सड़कों पर जगह-जगह इन दिनों कुछ खास पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बजाए टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी की तस्वीरों को प्रमुखता दी गई है। इन पोस्टर में 'नई और सुधारित तृणमूल कांग्रेस छह महीने में अस्तित्व में आने' का दावा किया गया है।
ज्यादातर पोस्टर दक्षिण कोलकाता के हाजरा और कालीघाट इलाकों में लगाए गए थे, दोनों ही क्षेत्र भवानीपुर में टीएमसी सुप्रीमो के आवास के पास हैं। हालांकि, किसी भी पोस्टर में ममता बनर्जी की तस्वीरें नहीं हैं, साल 1998 में पार्टी की स्थापना के बाद से टीएमसी के पोस्टरों में शायद ही ऐसा कभी हुआ हो।
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हालांकि खास बात यह भी है कि पार्टी के अधिकांश नेता इस राजनीति की बदलती बयार के घटनाक्रम पर चुप्पी साध रहे हैं। लेकिन अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले टीएमसी के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि पोस्टरों में कुछ भी गलत नहीं है।
घोष ने कहा कि समय-समय पर अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि हमें खुद को सीखने और सुधारने की जरूरत है। हमें जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने की जरूरत है। इसलिए हो सकता है कि कुछ अति उत्साही पार्टी कार्यकर्ताओं ने अतीत में जारी उनके उद्धरणों के साथ पोस्टर लगाए हों।
इधर, टीएमसी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेताओं पार्थ चटर्जी और अनुब्रत मंडल की गिरफ्तारी के बाद पार्टी के भीतर दूरगामी परिणाम क्या होंगे, इसे लेकर हलचल तेज है। क्योंकि इससे संगठन पर पुरानी पीढ़ी की पकड़ कमजोर और युवा ब्रिगेड की पकड़ और मजबूत होगी।
उधर, राज्य में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ये पोस्टर टीएमसी के साथ आंतरिक-पार्टी संघर्ष का नतीजा थे। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से टीएमसी के भीतर एक आंतरिक संघर्ष जारी है। लेकिन चाहे वह अच्छे के लिए हो या बुरे के लिए, इस सच्चाई को स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है कि ममता बनर्जी अभी भी हैं और इसके पीछे टीएमसी की प्रेरक शक्ति बनी रहेंगी।
किसी कार्यकर्ता ने लगा दिया हो पोस्टर
टीएमसी के उपाध्यक्ष जॉय प्रकाश मजूमदार ने कहा कि ममता बनर्जी ने टीएमसी को जन्म दिया, वह सर्वोच्च नेता हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है। अभिषेक बनर्जी ने बार-बार दोहराया है कि ममता बनर्जी ही हमारी एकमात्र नेता हैं। हो सकता है कि किसी अति-उत्साहित कार्यकर्ता द्वारा पोस्टर लगाया गया हो।
लोग टीएमसी की लूट के खिलाफ हैं
पश्चिम बंगाल भाजपा के नेता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि कुछ पोस्टर बयां कर रहे हैं कि टीएमसी में एक नया चेहरा आ रहा है। क्या इसका मतलब यह है कि लोगों को अब ममता बनर्जी पर भरोसा नहीं है और टीएमसी को एक नए चेहरे की जरूरत है? लोग टीएमसी की लूट के खिलाफ हैं, पार्टी में दिन गिन रहे हैं।
जनता सब जानती है
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कोलकाता में मायर बाड़ी- मां बिपत्तारिणी चंडी बाड़ी मंदिर का दौरा किया और पूजा-अर्चना की। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में कई जगहों पर पैसों के पहाड़ दिखने वाली तस्वीरों से कुछ लोग परेशान हैं। और इस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए पोस्टर लगाए गए हैं। लेकिन बंगाल की जनता सच्चाई से वाकिफ है।
ममता के ट्विटर से भी नेहरू की तस्वीर गायब, कांग्रेस भड़की
स्वतंत्रता दिवस से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी ट्विटर प्रोफाइल को बदल दिया था। अब उस पर विवाद शुरू हो गया है। इसमें मुख्यमंत्री ने जो तस्वीर लगा रखी है, उसमें कई वीरों, समाजसेवियों और शहीदों की तस्वीर है, लेकिन उनमें पंडित जवाहर लाल नेहरू नहीं हैं। इस पर भड़की कांग्रेस ने ममता से पूछा है, आखिर क्यों देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की इसमें अनदेखी की गई है। कांग्रेस भाजपा पर नेहरू की अनदेखी का आरोप लगाती आई है, लेकिन अब ममता भी उसमें शामिल हो गई हैं।
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ज्यादातर पोस्टर दक्षिण कोलकाता के हाजरा और कालीघाट इलाकों में लगाए गए थे, दोनों ही क्षेत्र भवानीपुर में टीएमसी सुप्रीमो के आवास के पास हैं। हालांकि, किसी भी पोस्टर में ममता बनर्जी की तस्वीरें नहीं हैं, साल 1998 में पार्टी की स्थापना के बाद से टीएमसी के पोस्टरों में शायद ही ऐसा कभी हुआ हो।
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हालांकि खास बात यह भी है कि पार्टी के अधिकांश नेता इस राजनीति की बदलती बयार के घटनाक्रम पर चुप्पी साध रहे हैं। लेकिन अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले टीएमसी के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि पोस्टरों में कुछ भी गलत नहीं है।
घोष ने कहा कि समय-समय पर अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि हमें खुद को सीखने और सुधारने की जरूरत है। हमें जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने की जरूरत है। इसलिए हो सकता है कि कुछ अति उत्साही पार्टी कार्यकर्ताओं ने अतीत में जारी उनके उद्धरणों के साथ पोस्टर लगाए हों।
इधर, टीएमसी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेताओं पार्थ चटर्जी और अनुब्रत मंडल की गिरफ्तारी के बाद पार्टी के भीतर दूरगामी परिणाम क्या होंगे, इसे लेकर हलचल तेज है। क्योंकि इससे संगठन पर पुरानी पीढ़ी की पकड़ कमजोर और युवा ब्रिगेड की पकड़ और मजबूत होगी।
उधर, राज्य में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ये पोस्टर टीएमसी के साथ आंतरिक-पार्टी संघर्ष का नतीजा थे। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से टीएमसी के भीतर एक आंतरिक संघर्ष जारी है। लेकिन चाहे वह अच्छे के लिए हो या बुरे के लिए, इस सच्चाई को स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है कि ममता बनर्जी अभी भी हैं और इसके पीछे टीएमसी की प्रेरक शक्ति बनी रहेंगी।
किसी कार्यकर्ता ने लगा दिया हो पोस्टर
टीएमसी के उपाध्यक्ष जॉय प्रकाश मजूमदार ने कहा कि ममता बनर्जी ने टीएमसी को जन्म दिया, वह सर्वोच्च नेता हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है। अभिषेक बनर्जी ने बार-बार दोहराया है कि ममता बनर्जी ही हमारी एकमात्र नेता हैं। हो सकता है कि किसी अति-उत्साहित कार्यकर्ता द्वारा पोस्टर लगाया गया हो।
लोग टीएमसी की लूट के खिलाफ हैं
पश्चिम बंगाल भाजपा के नेता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि कुछ पोस्टर बयां कर रहे हैं कि टीएमसी में एक नया चेहरा आ रहा है। क्या इसका मतलब यह है कि लोगों को अब ममता बनर्जी पर भरोसा नहीं है और टीएमसी को एक नए चेहरे की जरूरत है? लोग टीएमसी की लूट के खिलाफ हैं, पार्टी में दिन गिन रहे हैं।
जनता सब जानती है
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कोलकाता में मायर बाड़ी- मां बिपत्तारिणी चंडी बाड़ी मंदिर का दौरा किया और पूजा-अर्चना की। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में कई जगहों पर पैसों के पहाड़ दिखने वाली तस्वीरों से कुछ लोग परेशान हैं। और इस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए पोस्टर लगाए गए हैं। लेकिन बंगाल की जनता सच्चाई से वाकिफ है।
ममता के ट्विटर से भी नेहरू की तस्वीर गायब, कांग्रेस भड़की
स्वतंत्रता दिवस से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी ट्विटर प्रोफाइल को बदल दिया था। अब उस पर विवाद शुरू हो गया है। इसमें मुख्यमंत्री ने जो तस्वीर लगा रखी है, उसमें कई वीरों, समाजसेवियों और शहीदों की तस्वीर है, लेकिन उनमें पंडित जवाहर लाल नेहरू नहीं हैं। इस पर भड़की कांग्रेस ने ममता से पूछा है, आखिर क्यों देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की इसमें अनदेखी की गई है। कांग्रेस भाजपा पर नेहरू की अनदेखी का आरोप लगाती आई है, लेकिन अब ममता भी उसमें शामिल हो गई हैं।