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सुरक्षा का नया खाका: बंगाल-असम में घुसपैठिये और कट्टरपंथी रडार पर, 450KM सीमा की होगी बाड़बंदी; सख्त होगा पहरा

Tue, 12 May 2026 07:35 AM IST
Pavan एन अर्जुन / जितेंद्र भारद्वाज
एन अर्जुन / जितेंद्र भारद्वाज Published by: Pavan Updated Tue, 12 May 2026 07:35 AM IST
सार

गृह मंत्रालय, एनआईए, बीएसएफ, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों व राज्य पुलिस के बीच रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग व साझा ऑपरेशन की नई व्यवस्था बन रही है। इससे सीमा पार नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज गिरोह और हवाला चैनलों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

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New security blueprint: Infiltrators-radicals on radar in West Bengal-Assam, 450km border to be fenced
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

पूर्वी भारत में बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच केंद्र सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े राज्यों के लिए नई सुरक्षा रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा सरकार बनने के बाद गृह मंत्रालय जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बांग्लादेशी घुसपैठ, कट्टरपंथी नेटवर्क और सीमापार आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ संयुक्त ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, भारत करीब 4,096.7 किमी लंबी सीमा बांग्लादेश से साझा करता है जिसके जरिए अवैध घुसपैठ, फर्जी पहचान पत्र नेटवर्क और कट्टरपंथी गतिविधियां वर्षों से कड़ी चुनौती रही हैं। अब इस पर सख्ती से लगाम कसेगी। बंगाल में नई सरकार ने कैबिनेट की पहली बैठक में ही बीएसएफ को बाड़बंदी के लिए जमीन देने की घोषणा की है।
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जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया 45 दिनों में पूरी हो जाएगी। इसके तहत बंगाल से लगती बांग्लादेश की सीमा पर 450 किमी लंबे क्षेत्र की बाड़बंदी की जाएगी, जो अभी तक खुला पड़ा है। यही नहीं, लगभग हर 30 किमी पर एक बटालियन हेडक्वार्टर बनेगा, जहां 1,000 जवान तैनात रहेंगे। 450 किमी लंबी सीमा पर 300-400 एकड़ में बीएसएफ के 15 बटालियन हेडक्वार्टर बनेंगे। इसके अलावा सेक्टर हेडक्वार्टर भी तैयार होंगे। पिछले कुछ वर्षों में असम, त्रिपुरा और बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनके तार अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों और बांग्लादेश स्थित मॉड्यूल से जुड़े पाए गए। अधिकारियों का मानना है कि अब दोनों राज्यों में समान राजनीतिक नेतृत्व होने से केंद्र-राज्यों के बीच समन्वय पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज होगा। 
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ममता सरकार को भेजे गए थे 10 रिमाइंडर
बंगाल में बांग्लादेश से लगती 450 किलोमीटर लंबी सीमा पर बॉर्डर आउट पोस्ट भी तैयार होंगी। बॉर्डर पर पिलर और फेंसिंग के अलावा फ्लड लाइटें लगाई जाएंगी। गृह मंत्री शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि बांग्लादेश से लगते बॉर्डर पर फेंसिंग लगाने के लिए ममता बनर्जी सरकार को 10 रिमाइंडर भेजे गए थे। इसके बावजूद सरकार ने जमीन नहीं दी। यही वजह रही है कि बॉर्डर पर बाड़बंदी का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा। पिछले 11 वर्ष में बांग्लादेश सीमा पर 21 हजार घुसपैठिये पकड़े गए हैं। गृह मंत्रालय और बीएसएफ की तरफ से बंगाल सरकार को कई बार जमीन अलॉट करने की फाइल भेजी गई थी।

बांग्लादेश से लगी है 4,096.7 किमी सीमा
  • बंगाल       2,216.7 किमी
  • त्रिपुरा    856 किमी
  • मेघालय   443 किमी
  • मिजोरम  318 किमी
  • असम     263 किमी

इन जिलों पर खास नजर
सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिले हैं, जबकि असम में धुबरी, करीमगंज, दक्षिण सालमारा और बरपेटा को संवेदनशील माना जा रहा है। इन इलाकों में संयुक्त इंटेलिजेंस ग्रिड, ड्रोन निगरानी और विशेष टास्क फोर्स की योजना पर काम चल रहा है।


स्मार्ट फेंसिंग से लेकर फ्लोटिंग पैट्रोलिंग तक
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नए सुरक्षा ब्लूप्रिंट में स्मार्ट फेंसिंग, नदी क्षेत्रों में फ्लोटिंग पैट्रोलिंग, हवाला नेटवर्क पर कार्रवाई, फर्जी दस्तावेज गिरोहों के खिलाफ संयुक्त अभियान और कट्टरपंथी डिजिटल मॉड्यूल की निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। एजेंसियों का मानना है कि आने वाले महीनों में कई पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा सकती हैं।

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15-20 हजार जवानों की नई भर्ती संभव
450 किमी लंबे जमीनी बॉर्डर को सुरक्षित करने में लगभग 15 बटालियन लगती हैं। नदी, नाले, पहाड़ और जंगल होने की स्थिति में जवानों की तय संख्या में कमी या वृद्धि हो सकती है। शुरुआत में एडहॉक के जरिए ही जवानों की तैनाती होती है। बाद में चरणबद्ध तरीके से नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है। अगर डेढ़ दर्जन बटालियन सृजित होती हैं, तो बीएसएफ के विभिन्न रैंकों में पदोन्नति भी तेज हो जाएगी। एक पूर्व अधिकारी बताते हैं कि कई बार सरकार को लिखा गया है कि बल को 39 रिजर्व बटालियन प्रदान की जाएं। इसका फायदा यह रहता है कि जब कभी चुनाव जैसे कार्य के लिए जवानों की मांग आती है, तो रिजर्व बटालियन से भेज सकते हैं। इसके लिए बॉर्डर की रक्षा में तैनात जवानों को नहीं बुलाना पड़ता। अभी ऐसे कार्यों के लिए बॉर्डर ड्यूटी से ही जवानों को निकालना पड़ता है।

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