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इसलिए पड़ी नए ट्रैफिक कानून की जरूरत, विरोध में 11 राज्य लामबंद

Sun, 15 Sep 2019 09:36 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Sun, 15 Sep 2019 09:36 AM IST
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New Motor Vehicles Act News Update, Know why strict Traffic law is important
नए ट्रैफिक नियम पर रार - फोटो : अमर उजाला
देश में एक सितंबर से लागू किए गए नए ट्रैफिक नियम से वाहन चालकों के बीच खौफ देखने को मिल रहा है। पहले जिस ट्रैफिक सिग्नल को लोग यूं ही तोड़कर चले जाते थे वहां आज कल सिग्नल लाल होते ही लोग रूके दिखाई देने लगे हैं। जिन लोगों के पास गाड़ी के पूरे पेपर्स नहीं है वो अब मेट्रो या बस से सफर कर रहे हैं, क्योंकि अब चालान 100 रुपये का नहीं बल्कि हजारों रुपये का है। कुछ मामलों में जितने की गाड़ी नहीं है उससे ज्यादा का तो चालान कट चुका है। 

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देश में एक सितंबर से लागू किए गए नए ट्रैफिक नियम से वाहन चालकों के बीच खौफ देखने को मिल रहा है। पहले जिस ट्रैफिक सिग्नल को लोग यूं ही तोड़कर चले जाते थे वहां आज कल सिग्नल लाल होते ही लोग रूके दिखाई देने लगे हैं। जिन लोगों के पास गाड़ी के पूरे पेपर्स नहीं है वो अब मेट्रो या बस से सफर कर रहे हैं, क्योंकि अब चालान 100 रुपये का नहीं बल्कि हजारों रुपये का है। कुछ मामलों में जितने की गाड़ी नहीं है उससे ज्यादा का तो चालान कट चुका है। 

केंद्र के मोटर वाहन अधिनियम संशोधन कानून 2019 के 63 प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने के बाद भारी-भरकम जुर्माने की खबरें भी सामने आ रही हैं। दिल्ली में हाल ही में अब तक सबसे बड़ा चालान काटा गया है। एक ट्रक मालिक को ओवरलोडिंग के लिए दो लाख 500 रुपये का भारी-भरकम चालान भरना पड़ा।

पांच राज्यों ने इस कानून का विरोध करते हुए अपने यहां लागू करने से इनकार कर दिया है। इसमें कांग्रेस शासित मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब के साथ ही पश्चिम बंगाल और तेलंगाना शामिल हैं। इन्होंने नए ट्रैफिक कानून को जनविरोधी बताया है।

इन दिनों वाहनों का बीमा करवाने व पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट बनवाने वालों की भारी भीड़ देखी जा रही है। वाहनों के बीमा के लिए जानकारी मांगने वालों की संख्या 10-15 फीसदी तक बढ़ गई है वहीं पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सेंटर्स पर आने वाले वाहनों की संख्या चार गुना तक बढ़ गई है। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि हमें इतने कड़े ट्रैफिक नियमों की जरूरत क्यों पड़ी। क्या लोग जुर्माने के बिना कड़े कानून का पालन नहीं कर सकते।

क्यों जरूरी है कड़ा कानून

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2004 से 2016 के बीच सड़क दुर्घटना में मौतों की संख्या में 64 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। 2004 में जहां सड़क हादसों में देश भर में 91463 लोगों ने जान गंवाई, वही 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.50 लाख हो गया। 2017 में सबसे अधिक सड़क हादसे तमिलनाड़ु में हुए, लेकिन मृतकों की संख्या सर्वाधिक उत्तर प्रदेश में रही।

इसमें तेज गति से वाहन चलाना (ओवरस्पीड) और गलत साइड से वाहन चलाने के कारण 76.7 फीसदी दुर्घटनाएं हुईं हैं। जबकि, सिग्नल तोड़ने, नशे में गाड़ी चलाने और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने के कारण कुल 6.2 फीसदी दुर्घटनाएं हुई हैं।

नए ट्रैफिक कानून के खिलाफ 11 राज्य

नए ट्रैफिक कानून पर केंद्र और राज्यों के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है। भाजपा शासित गुजरात और उत्तराखंड ने जुर्माने की राशि को घटा दिया है वहीं राजस्थान सरकार ने भी  33 प्रावधानों में से 17 में बदलाव कर जुर्माने में 50 फीसदी तक की कटौती कर दी है।

जुर्माने की राशि को कम करने को लेकर दो और भाजपा शासित राज्य कर्नाटक और महाराष्ट्र विचार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने गुजरात की तर्ज पर कर्नाटक में भी जुर्माने की राशि को कम करने का आदेश दिया है। वहीं महाराष्ट्र में भी परिवहन मंत्री  दिवाकर राओते ने  नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इस पर दोबारा विचार करने और जरूरी संशोधन करके जुर्माने की राशि को कम करने का अनुरोध किया है।

कांग्रेस शासित राज्य मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और पंजाब ने नए कानून को अपने यहां पूर्ण रूप से लागू करने से इनकार कर दिया था। बाद में राजस्थान ने इस संशोधित कानून के 33 प्रावधानों में से 17 में बदलाव कर जुर्माने की राशि को कम कर दिया था। वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि 13 अक्टूबर के बाद इस कानून में संशोधन को लेकर विचार किया जाएगा।

दुनिया में क्या हैं ट्रैफिक नियम?

ताइवान
ताइवान में नशा करके गाड़ी चलाने पर दो साल की सजा और लगभग 4 लाख 82 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। यदि नशे की हालत में गाड़ी से दुर्घटना हो जाती है तो सात साल की सजा का प्रावधान है। वहीं यदि दुर्घटना में किसी की मौत हो जाती है तो 10 साल की सजा दी जा सकती है। 

ओमान
ओमान में यदि आप गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करते, वीडियो देखते या मैसेज करते हुए पकड़े जाते हैं आपको 10 दिन जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा आपको 56 हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है।

फिनलैंड
फिनलैंड में तेज रफ्तार गाड़ी चलाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। वहां जुर्माने की राशि गाड़ी की रफ्तार और शख्स की सालाना कमाई को देखकर वसूली जाती है। इस देश में एक अरबपति से तेज रफ्तार गाड़ी चलाने पर करीब 4 करोड़ 37 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया था।

हॉलैंड 
हॉलैंड में तेज रफ्तार गाड़ी चलाने पर हमेशा के लिए गाड़ी को जब्त कर लिया जाता है।

ब्रिटेन
ब्रिटेन में यदि आप गाड़ी चलाते समय किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाते हैं तो पुलिस आपके ऊपर 17 हजार रुपये का जुर्माना लगा सकती है। यह जुर्माना भी पहली बार पकड़े जाने पर देना पड़ेगा। दूसरी और तीसरी गलती करने पर इससे सख्त जुर्माना देना पड़ेगा।

लगभग 30 देशों में गाड़ी चलाते समय मोबाइल के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी और जुर्माने का प्रावधान है। बरमूडा में 36 हजार रुपये, त्रिनिदाद और टोबैगो में 16 हजार रुपये, कतर में 10 हजार रुपये और फिलीपींस में 7,200 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।

ये ट्रैफिक नियम तोड़े तो काटने पड़ेंगे अदालत के चक्कर

ट्रैफिक पुलिस के अनुसार नए चालानों में कुछ ऐसे हैं जो कंपाउंडेबल (क्षमायोग्य) हैं और उल्लंघन करने पर मौके पर ही जुर्माना चुकाया जा सकता है। वहीं कुछ ऐसे ट्रैफिक भी हैं, जिनका उल्लंघन करने पर कोर्ट जाना पड़ेगा, यानी वे नॉन कंपाउंडेबल (अक्षम्य) नियम हैं।

नए मोटर व्हीकल एक्ट में ये हैं कंपाउंडेबल अपराध?

मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 200 कहती है कि कुछ अपराधों में मौके पर ही जुर्माना भरने का प्रावधान है। इसका मतलब यह है कि ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए कोर्ट जाने की जरूरत नहीं पड़ती। नियम तोड़ने पर सरकार की तरफ से नियुक्त अधिकारियों को जुर्माना राशि भर सकते हैं। एक्ट कहता है कि 24 श्रेणियों के तहत किए गए अपराधों को किसी भी स्टेज पर कंपाउंड किया जा सकता है। इनके लिए, संबंधित राज्य सरकारें जुर्माना और अन्य दंड की सीमा को सूचित कर सकती हैं।  

क्या हैं नॉन-कंपाउंडेबल अपराध?

इन 24 श्रेणियों के अलावा मोट व्हीकल एक्ट के तहत बाकी अपराध गैर-अक्षम्य हैं यानी नॉन-कंपाउंडेबल हैं। जिसका अर्थ है कि ऐसे सभी मामलों में नियम तोड़ने वालों को चालान का भुगतान करने के लिए अदालत में पेश होना होगा। ऐसे मामलो में राज्य सरकार केंद्र की तरफ से अधिसूचित न्यूनतम राशि से कम जुर्माना नहीं लगा सकती हैं। रेडलाइट जंप, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, शराब पीकर ड्राइविंग, नाबालिग का ड्राइविंग करते पकड़े जाना या ऐसे अपराध जिनमें कड़े जुर्माने के साथ जेल जाने का प्रावधान है।

वाहन के कागजात ढोने से बचाएंगे ये स्मार्ट तरीके

पुलिस आपका चालान तब तक नहीं काट सकती जब तक आप सभी यातायात नियमों का पालन कर रहे हैं। इसके लिए आपके फोन में सरकार की तैयार की गई मोबाइल एप्लीकेशन एम परिवहन एप और डिजी लॉकर होनी चाहिए। इस मोबाइल एप में जरूरत के सभी दस्तावेजों को अपलोड कर आप पुलिस कार्रवाई से बच सकते हैं। डिजी लॉकर मोबाइल एप पर ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी), इंश्योरेंस कवर नोट आदि दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं। जबकि एम मोबाइल एप पर अभी केवल डीएल और आरसी ही अपलोड करने की सुविधा है।

डिजी लॉकर एप

  • सबसे पहले एंड्रॉयड फोन के प्ले स्टोर से डिजी लॉकर डाउनलोड करें। 
  • इसके बाद साइन अप विद मोबाइल क्लिक कर अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर यूजर के तौर पर साइन अप करना होगा। 
  • इसके बाद आपको सिंक योर आधार पर क्लिक करना होगा, जहां पर आधार नंबर भर सकते हैं। 
  • इसके बाद गेट डॉक्यूमेंट फ्रॉम इश्योर्स पर क्लिक करें। 
  • जो भी डॉक्यूमेंट यानी दस्तावेज आधार से लिंक होगा उसी डिपार्टमेंट पर क्लिक करने के बाद वह स्वत: अपलोड हो जाएगा। 
  • इसके बाद इन दस्तावेजों को शेयर भी कर सकते हैं। 

एम परिवहन एप 

इस सरकारी मोबाइल एप्लीकेशन पर परिवहन विभाग द्वारा जारी दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं। इनमें प्रमुख तौर पर फिलहाल डीएल और आरसी की सुविधा है। 
  • सबसे पहले एम परिवहन एप को एंड्रायड या एप्पल के प्ले स्टोर से डाउनलोड करें। 
  • इसके बाद मोबाइल नंबर के साथ साइन अप करें जो ओटीपी के साथ हो जाएगा। 
  • इसके बाद मुख्य पृष्ठ पर ऊपर की तरफ डीएल और आरसी का ऑप्शन दिखेगा। 
  • यदि डीएल पर क्लिक करेंगे तो उसका नंबर दर्ज करने पर प्राथमिक विवरण प्रदर्शित हो जाएगा। 
  • इसके बाद यदि यह वर्चुअल चाहिए तो अपनी जन्मतिथि के साथ इसे सत्यापित कर सकते हैं। 
  • इसी तरह आरसी भी अपलोड हो जाएगी। इसका सत्यापन आपको इंजन और चेसिस नंबर से करना होगा।
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