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एचआईवी-एड्स पीड़ित के साथ भेदभाव पर सजा और जुर्माने का प्रावधान 

Thu, 06 Oct 2016 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 06 Oct 2016 01:52 AM IST
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New Bill Prohibits Discrimination Against HIV And AIDS Patients
एचआईवी-एड्स
एचआईवी-एड्स पीड़ित मरीजों के साथ भेदभाव करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। एचआईवी-एड्स पीड़ितों का मुफ्त इलाज करना अनिवार्य होगा। अस्पतालों, कार्यस्थल, शैक्षणिक संस्थानों में मरीजों की सुविधा और उनकी शिकायतों को सुनने के लिए शिकायत अधिकारी भी नियुक्त होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में एचआईवी-एड्स संशोधन बिल-2014 को मंजूरी मिल गई। अब इस बिल को संसद में पेश किया जाएगा। संसद की मुहर लगने के बाद यह बिल कानून की शक्ल लेगा।  
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केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी.नड्डा ने एचआईवी-एड्स संसोधन बिल-2014 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचआईवी-एड्स मरीजों के साथ भेदभाव करने पर तीन माह से दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा एक लाख रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान है। राज्यों में कानून का उल्लंघन ने हो इसके लिए हर राज्य में एक-एक लोकपाल नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा उन सभी संस्थानों में जहां 100 या इससे अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, वहां ऐसे मरीजों की शिकायत सुनने के लिए एक शिकायत अधिकारी नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। 
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स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि एचआईवी-एड्स मरीजों के साथ नौकरी, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र, किराये पर मकान देने, निजी और सरकारी कार्यालय, स्वास्थ्य के क्षेत्र के इंश्योरेंस में यदि किसी तरह का भेदभाव किया गया तो उनके खिलाफ सजा और जुर्माने का प्रावधान है। एचआईवी-एड्स मरीजों को संपत्ति का अधिकार होगा और 18 वर्ष से कम उम्र के मरीजों को अपने घर में रहने का समान अधिकार होगा। नौकरी पाने और शैक्षणिक संस्थानों में मरीज को अपनी बीमारी के बारे में बताना अनिवार्य नहीं होगा और यदि मरीज जानकारी देता भी है तो उसके नाम को सार्वजनिक करने पर सजा और जुर्माना के प्रावधान किया गया है। मरीजों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में घटी है बावजूद देश में वर्तमान समय में करीब 21 लाख लोग एचआईवी एड्स से पीड़ित हैं। 
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