IAF Chief: नए वायुसेना प्रमुख को है 5,000 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस, क्यों कहा जा रहा 'सुपर जीनियस' चीफ?
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विस्तार
एयर मार्शल अमन प्रीत सिंह ने गुरुवार को 28वें वायुसेना प्रमुख का पदभार संभाल लिया। फाइटर पायलट रहे एयर मार्शल एपी सिंह को अपने उड़ान करियर के दौरान, स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरकराफ्ट तेजस फाइटर जेट की टेस्ट-फ्लाइंग का भी काम सौंपा गया था। पिछले महीने हुई एयरफोर्स की मल्टी नेशनल एयर एक्सरसाइज तरंगशक्ति में भी उन्होंने तेजस फाइटर जेट उड़ा कर दर्शकों का मन मोह लिया था। यह संयोग ही है कि वह सिख समुदाय से आने वाले चौथे अधिकारी हैं, जो इंडियन एयर फोर्स में टॉप पॉजिशन पर पहुंचे हैं।अनुभवी टेस्ट पायलट एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह ने सोमवार 30 सितंबर को भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख का पदभार संभाल लिया। उन्होंने एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी का स्थान लिया, जो तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद 30 सितंबर को रिटायर हो गए। 27 अक्तूबर 1964 को जन्मे एयर मार्शल एपी सिंह ने दिसंबर 1984 में भारतीय वायु सेना में बतौर फाइटर पायलट कमिशन लिया था। लगभग 40 सालों की अपनी लंबी और विशिष्ट सेवा के दौरान, उन्होंने कमांड, स्टाफ, इंस्ट्रक्शनल और विदेशी नियुक्तियों जैसी कई भूमिकाओं में अपने कर्तव्य का निर्वहन किया।
तरंग शक्ति अभ्यास के पहले चरण में सुलुर में तत्कालीन वाइस चीफ ऑफ एयर मार्शल एपी सिंह ने तेजस को उड़ाया था और जर्मन एयर फोर्स के यूरोफाइटर टाइफून को इंगेज किया था। यूरोफाइटर टाइफून को जर्मन एयर फोर्स चीफ लेफ्टिनेंट जनरल इंगो गेरहार्ट्ज उड़ा रहे थे। तेजस की क्षमताओं को देख कर जर्मन वायु सेना के पायलट भी हैरान रह गए थे। जर्मन लेफ्टिनेंट जनरल गेरहार्ट्ज ने कहा, मैंने उड़ान भरी, और यह बहुत अच्छा था। इस दौरान भारतीय वायुसेना का विमान तेजस आया और हमें इंगेज किया। उन्होंने यह भी कहा था कि मैं इस अभ्यास में और ज्यादा उड़ान भरने के लिए उत्सुक हूं। जर्मन वायुसेना पहली बार भारत में वायुसेना के अभ्यास में शामिल हुई थी। वहीं जोधपुर में तरंग शक्ति के दूसरे चरण में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के उप प्रमुखों ने तेजस में उड़ान भरकर इतिहास रचा था। इस अभ्यास में तत्कालीन वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ (VCAS) एयर मार्शल एपी सिंह ने सिंगल सीटर फाइटर जेट में उड़ान भरी थी।
नेशनल डिफेंस अकादमी, डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र और एयर अफसर रहे एयर मार्शल एपी सिंह के पास रोटरी विंग विमानों पर 5,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। अपने करियर के दौरान, उन्होंने एक ऑपरेशनल फाइटर स्क्वाड्रन और एक फ्रंटलाइन एयर बेस की कमान संभाली है। एक टेस्ट पायलट के तौर पर उन्होंने मास्को में मिग-29 अपग्रेड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम का नेतृत्व भी किया। वह नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में प्रोजेक्ट डायरेक्टर (फ्लाइट टेस्ट) भी रहे और उन्हें लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, तेजस की टेस्ट फ्लाइट की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके अलावा उन्होंने अहमदाबाद स्थित साउथ-वेस्टर्न एयर कमांड में एयर डिफेंस कमांडर और मेघालय के शिलांग स्थित ईस्टर्न एयर कमांड में सीनियर स्टाफ अफसर के तौर पर भी नियुक्त रहे। वहीं, वायु सेना मुख्यालय में जाने से पहले वे प्रयागराज स्थित सेंट्रल एयर कमांड में एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी थे।
संयोग से वे सिख समुदाय से आने वाले चौथे अधिकारी हैं, जो भारतीय वायु सेना में चीफ ऑफ एयर स्टाफ पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह फाइव स्टार रैंक हासिल करने वाले पहले और एकमात्र अधिकारी थे, जिन्होंने 1964 से 1969 तक वायु सेना प्रमुख का पद संभाला था। उन्होंने 1965 में हुई भारत-पाकिस्तान जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके बाद एयर चीफ मार्शल दिलबाग सिंह ने 1981 से 1984 तक एयर फोर्स चीफ का पद संभाला और अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े का आधुनिकीकरण किया। उनके बाद 2017 से 2019 तक प्रमुख रहे एयर चीफ मार्शल बीरेंद्र सिंह धनोआ ने 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान अहम भूमिका निभाई थी।
फाइटर जेट्स के स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही भारतीय वायुसेना
वायुसेना सूत्रों ने बताया कि नए एयर चीफ मार्शल की पहली प्राथमिकता भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूत करना होगी। भारतीय वायुसेना पहले ही फाइटर जेट्स के स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 31 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, और अगले डेढ़ दशक में इसके अधिकांश स्क्वाड्रन फेज आउट हो जाएंगे। जबकि भारत को 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है। मिग-21 बाइसन और मिग-29 के स्क्वाड्रन 2025 और 2035 तक चरणबद्ध तरीके से रिटायर हो जाएंगे। 2019 में पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट स्ट्राइक करने वाले फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों मिराज 2000 भी 2035 तक रिटायर कर दिए जाएंगे। वहीं, तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में हो रही देरी की समस्या से भी उन्हें जूझना होगा। जिसे लेकर पूर्व वायुसेना प्रमुख वीआर चौधरी भी चिंता जता चुके हैं।
तेजस फाइटर जेट की डिलीवरी में देरी को लेकर पूर्व वायुसेना प्रमुख वीआर चौधरी ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड से कहा था कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत एलसीए की मैन्युफैक्चरिंग के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन लाइनें बनाई जाएं। ताकि तेजस की डिलीवरी में हो रही देरी से निपटा जा सके। वहीं तेजस के इंजन सप्लाई करने वाली अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस एचएएल को नवंबर से F404 इंजन की डिलीवरी करना शुरू करेगी, जिसके बाद तेजस के प्रोडक्शन में तेजी आने की उम्मीद है।
जीई एयरोस्पेस से F-404 इंजन की डिलीवरी इस महीने के आखिर से शुरू होने की उम्मीद है, जीई ने 99 इंजनों का ऑर्डर पूरा होने तक हर महीने दो इंजन देने की बात कही है। राजनाथ सिंह की अमेरिका यात्रा के दौरान इंजन की डिलीवरी में देरी का मुद्दा उठाया था। जिसके बाद जीई ने जल्द सप्लाई देने का भरोसा जताया था। एचएएल ने अगस्त 2021 में इन इंजनों के लिए जीई के साथ 716 मिलियन अमरीकी डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। भारतीय वायुसेना ने शुरू में 83 तेजस एमके-1ए फाइटर जेट का ऑर्डर दिया था, जिसकी कीमत 48,000 करोड़ रुपये थी। लेकिन सरकार उसके बाद 97 अतिरिक्त तेजस का ऑर्डर भी दिया था। लेकिन इंजन की डिलीवरी में लगभग 10 महीने की देरी हो रही है।
भारतीय वायुसेना तकरीबन 120 एलसीए एमके-2 फाइटर जेट का ऑर्डर देने की योजना बना रही है, जिनका निर्माण भी एचएएल करेगा। हालांकि एचएएल का दावा है कि वे अब एक साल में 24 तेजस बना सकते हैं, लेकिन वायुसेना को कहीं न कहीं उनके इस दावे पर भरोसा नहीं है। इससे पहले एचएएल को पहले तेजस एमके-1ए की डिलीवरी 31 मार्च, 2024 तक करनी थी। लेकिन अब पहला विमान अब दिसंबर तक ही मिलने की संभावना है। वहीं, इंजन की डिलीवरी में करीब 10 महीने की देरी के साथ ही, तेजस में लगे कई सिस्टम्स के सर्टिफिकेशन में भी देरी हो रही है।
एमआरएफए के सौदे पर फैसला लेंगे नए चीफ
नए सेना प्रमुख को मल्टीरोल कॉम्बैट फाइटर जेट (एमआरएफए) के सौदे पर फैसला लेंगे, जो सालों से लंबित है जिसके तहत 114 नए लड़ाकू विमान खरीदे जाने हैं। चीन और पाकिस्तान दोनों ही 4.5 और 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को अपने बेड़े में शामिल कर रहे हैं। लेकिन भारतीय वायुसेना अभी काफी पीछे है। हालांकि केवल तेजस ही नहीं, भारतीय वायुसेना पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) को भी शामिल करना चाहती है। लेकिन एएमसीए का प्रोडक्शन 2035 तक ही शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, AMCA का प्रोटोटाइप ही 2028-29 तक ही आएगा। वहीं AMCA प्रोजेक्ट के प्रोटोटाइप को मंजूरी के बाद 2034-35 तक ही यह भारतीय वायुसेना में शामिल हो पाएगा। पहले एमआरएफए को तेजस कार्यक्रम के साथ मिलकर चलाया जाना था। लेकिन एमआरएफए कार्यक्रम को अभी भी सरकार से हरी झंडी मिलने का इंतजार है, उसके बाद ही वायुसेना इस फाइल को रक्षा मंत्रालय के पास भेजेगी।
बल की लड़ाकू क्षमताओं को और बढ़ाएंगे : वायुसेना प्रमुख
इस मौके पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने वायुसैनिकों से एकजुटता बढ़ाने का आग्रह किया और कहा कि उनका ध्यान बल की लड़ाकू क्षमताओं को और बढ़ावा देने पर होगा। सोमवार को वायुसेना प्रमुख का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद सिंह ने कहा, यह महत्वपूर्ण है कि भारतीय वायुसेना संचालनात्मक रूप से सक्षम, हमेशा सतर्क और विश्वसनीय निवारक बनी रहे। कुशल लड़ाकू पायलट एयर चीफ मार्शल सिंह के पास 5,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है और उन्होंने एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी के बदले देश की वायुसेना की कमान संभाली।
चौधरी तीन साल तक बल का नेतृत्व करने के बाद सोमवार को सेवानिवृत्त हुए।
सिंह हाल तक भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने वायुसेना कमांडरों से नेतृत्व को बढ़ावा देने का आग्रह किया और सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर भारतीय वायुसेना के निर्माण की दिशा में ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने अन्य सेनाओं के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया। दरअसल तीनो सेनाओं को मिलाकर थियेटर कमान बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है और सिंह का अपने कमांडरों को सेना के अन्य अंगों के साथ मिलकर काम करने पर जोर देशा उसी दिशा में एक पहल है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को सर्वकालिक उच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए वायुसैनिकों के समर्पण में पूर्ण विश्वास और विश्वास व्यक्त किया।