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उपलब्धि: नए एआई सिस्टम से ल्यूकेमिया की सटीक पहचान, डॉक्टरों को पीछे छोड़ा; इलाज में मिलेगी मदद

Thu, 15 Jan 2026 05:14 AM IST
देवेश त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, लंदन/नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, लंदन/नई दिल्ली। Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 15 Jan 2026 05:14 AM IST
सार

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर पराशकेव नाचेव के अनुसार हेल्थकेयर एआई की असली ताकत इंसानी विशेषज्ञता की नकल करना नहीं, बल्कि उससे आगे जाकर यह समझना है कि वह क्या नहीं जानता और यही मेटाकॉग्निटिव समझ क्लिनिकल निर्णय-निर्माण में निर्णायक है।

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New AI system accurately diagnoses leukemia Cytodiffusion microscopy of blood identifies abnormal cells
एआई से हो रही ल्यूकेमिया की पहचान - फोटो : AI Generated

विस्तार

ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के नेतृत्व में विकसित एक नया जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम रक्त कोशिकाओं के सूक्ष्म आकार-प्रकार का विश्लेषण कर ल्यूकेमिया जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान में डॉक्टरों से भी अधिक सटीक और भरोसेमंद साबित हुआ है। साइटोडिफ्यूजन नामक यह सिस्टम न केवल ऋलेता है, बल्कि यह भी समझ पाता है कि वह कब अनिश्चित है जिसे शोधकर्ता क्लिनिकल निर्णय-निर्माण के लिए बेहद अहम मानते हैं। अध्ययन नेचर मशीन इंटेलिजेंस जर्नल में प्रकाशित हुआ।
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रक्त रोगों के निदान में कोशिकाओं के आकार, संरचना और सूक्ष्म बदलावों की पहचान केंद्रीय भूमिका निभाती है। ल्यूकेमिया जैसे रोगों में यह अंतर बहुत मामूली हो सकता है, जिसे समझने में वर्षों का अनुभव लगता है और फिर भी विशेषज्ञों के बीच मतभेद रह जाते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार साइटोडिफ्यूजन इस चुनौती को काफी हद तक हल करता है, क्योंकि यह केवल तय श्रेणियों में कोशिकाओं को बांटने के बजाय उनके पूरे दृश्य-स्पेक्ट्रम को समझता है। 
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ल्यूकेमिया को कैसे चिन्हित करता है एआई?
अधिकतर मौजूदा मेडिकल एआई सिस्टम पैटर्न पहचान तक सीमित रहते हैं। इसके विपरीत, साइटोडिफ्यूजन जेनरेटिव एआई पर आधारित है ठीक उसी तकनीक पर, जिस पर डीएएलएल-ई जैसे इमेज जेनरेटर काम करते हैं। यह माइक्रोस्कोप के नीचे दिखने वाली रक्त कोशिकाओं के बेहद सूक्ष्म अंतर का अध्ययन करता है और सामान्य से हटकर दिखने वाली दुर्लभ कोशिकाओं को भरोसेमंद तरीके से चिह्नित करता है। यहां डीएएलएल-ई का आशय ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से है जो कल्पनाशील कला और उन्नत तकनीक को जोड़कर नई तस्वीरें बना सके। यहां इसका प्रयोग मेडिकल इमेज विश्लेषण के लिए किया गया है।

वैश्विक शोध के लिए डाटा जारी
शोधकर्ताओं ने 5 लाख से अधिक ब्लड स्मीयर इमेज का दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक संग्रह भी जारी किया है। उनका कहना है कि इससे वैश्विक स्तर पर शोधकर्ताओं को नए एआई मॉडल विकसित करने, मेडिकल डेटा तक समान पहुंच बनाने और अंततः मरीजों की देखभाल बेहतर करने में मदद मिलेगी।  शोधकर्ता स्पष्ट करते हैं कि साइटोडिफ्यूजन का उद्देश्य डॉक्टरों को बदलना नहीं है। यह तकनीक क्लिनिशियंस को संदिग्ध मामलों की तेज पहचान में मदद करेगी और समय बचाएगी।

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