{"_id":"64fbafca91ddb9eaca02a174","slug":"new-age-friendship-increasing-similarity-of-strategic-business-interests-2023-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Relations: सामरिक-व्यापारिक हितों की समानता बढ़ा रही नए जमाने की दोस्ती, जानिए किन प्रमुख क्षेत्रों में फायदा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Relations: सामरिक-व्यापारिक हितों की समानता बढ़ा रही नए जमाने की दोस्ती, जानिए किन प्रमुख क्षेत्रों में फायदा
Sat, 09 Sep 2023 05:05 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sat, 09 Sep 2023 05:05 AM IST
सार
अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत क्वािड्रलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग्स के जरिए नया अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सहयोग तेजी से बढ़ा रहा है। यह औपचारिक रूप से रणनीतिक सहयोग कहा जा रहा है, हालांकि माना जाता है कि इसका लक्ष्य दक्षिण चीन सागर में चीन को घेरना है।
विज्ञापन
शिखर सम्मेलन
- फोटो : Agency (File Photo)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून में अमेरिका के दौरे पर गए तो रक्षा और अंतरिक्ष से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमी कंडक्टर उत्पादन पर अहम समझौते करके लौटे। अब तीन महीने के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भारत में हैं, शुक्रवार शाम पीएम मोदी से द्विपक्षीय बातचीत भी की। परिणाम जल्द सामने आएंगे। दोनों देशों की निकटता को नए समय की दोस्ती कहा जा रहा है। यह दोस्ती कई क्षेत्रों में बढ़ रही है, इनसे न केवल दोनों के हित जुड़े हैं, बल्कि अपने मित्र देशों को भी इस सहयोग से काफी उम्मीदें हैं। पढ़िए उन अहम क्षेत्रों का विश्लेषण जो इस निकटता को बढ़ा रहे हैं -
अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सहयोग
अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत क्वािड्रलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग्स के जरिए नया अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सहयोग तेजी से बढ़ा रहा है। यह औपचारिक रूप से रणनीतिक सहयोग कहा जा रहा है, हालांकि माना जाता है कि इसका लक्ष्य दक्षिण चीन सागर में चीन को घेरना है। उसकी बढ़ती आर्थिक व सैन्य ताकत को सीमित रखने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र को किसी भी देश के पूर्ण प्रभाव से मुक्त रखने के बयान हाल में दिए गए हैं। भारत और अमेरिका इस संगठन के दो सबसे अहम हिस्से हैं। इस समय दुनिया में केवल भारत ही चीन के साथ सीधे तौर पर सैन्य संघर्ष में शामिल देश के रूप में पहचाना जा रहा है, तो अमेरिका ताइवान को लेकर चीन के खिलाफ लगातार कड़े बयान दे रहा है, निकटस्थ समुद्र में सैन्य अभ्यास कर रहा है।
ड्रोन का रखरखाव, जेट इंजन निर्माण
रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी अमेरिका है। हाल में हमने अमेरिका से 310 करोड़ डॉलर में 31 एमक्यू-9बी प्रिडेटर ड्रोन खरीद का समझौता भी किया है। इसके तहत यह ड्रोन असेंबल करने के लिए भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) हब भी बनेगा। यह डील अमेरिका को वित्तीय फायदा देगी, भारत भी एक उन्नत तकनीकी रक्षा उत्पाद का अनुभव हासिल करेगा। यही ड्रोन उपयोग कर रहे ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन आदि अमेरिका के अलावा भारत से एमआरओ सेवाएं भी ले पाएंगे। इसी तरह अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक और हमारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भी मिलकर जीई 414 फाइटर जेट इंजन भारत में बनाने जा रहे हैं।
विज्ञापन
नागरिक संपर्क : सबसे समृद्ध समुदाय दे रहा प्रगाढ़ता
भारतीय मूल के लोगों को अमेरिका का सबसे शिक्षित और समृद्ध समुदाय कहा जाता है। वह आबादी का करीब 1 प्रतिशत हैं, लेकिन देश के कुल टैक्स का 6 प्रतिशत अकेले चुकाते हैं। भारत से बड़ी संख्या में आईटी, चिकित्सा व अन्य क्षेत्रों के पेशेवर अमेरिका जा कर काम कर रहे हैं। नागरिकों का यह संपर्क और समुदाय दोनों देशों की मित्रता को प्रगाढ़ता दे रहा है।
राजनीतिक विचारों की समानता
भारत को पृथ्वी का सबसे बड़ा तो अमेरिका को सबसे पुराना लोकतंत्र कहकर दोनों के संबंध बढ़ाने की बात काफी समय से हो रही है। हालांकि इस समय पश्चिमी देश अमेरिका के जरिए भी भारत से निकटता बढ़ा रहे हैं। इसकी दो बड़ी वजह हैं, पहली, रूस-यूक्रेन युद्ध। इसमें भारत द्वारा रूस की खुली आलोचना न करने के बावजूद अमेरिका कुछ नहीं कह सका है। ऐसा करके वह एक लोकतांत्रिक देश को अपने से दूर नहीं होने देना चाहता। दूसरी वजह, कम्युनिस्ट चीन है, जिसके पड़ोस में सबसे बड़े लोकतंत्र के होने का फायदा अमेरिका और पश्चिमी देश भली भांति समझते हैं।
ऊंचाई पर आर्थिक व कारोबारी संबंध
2022-23 में कुछ वक्त के लिए चीन को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बना, हालांकि फिर चीन ने बढ़त बनाई। लेकिन संकेत मिल गया है कि जल्द ही भारत-अमेरिका आपसी सहयोग बढ़ाकर अपने कारोबार संबंधों को नई ऊंचाई देंगे। भारत के लिए यह सहयोग फायदेमंद होगा, हम अमेरिका से आयात के मुकाबले उसे निर्यात ज्यादा करते आए हैं।
अंतरिक्ष सहयोग.. जो पूरी दुनिया को फायदा देगा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा चंद्रमा पर अपने यान की सफल सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में हमारी साख बढ़ी है। पीएम मोदी द्वारा जून के अमेरिकी दौरे में आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद दोनों देशों के पास इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की तमाम वजहें हैं। निसार प्रोजेक्ट इसका एक उदाहरण है।
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सहयोग
अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत क्वािड्रलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग्स के जरिए नया अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सहयोग तेजी से बढ़ा रहा है। यह औपचारिक रूप से रणनीतिक सहयोग कहा जा रहा है, हालांकि माना जाता है कि इसका लक्ष्य दक्षिण चीन सागर में चीन को घेरना है। उसकी बढ़ती आर्थिक व सैन्य ताकत को सीमित रखने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र को किसी भी देश के पूर्ण प्रभाव से मुक्त रखने के बयान हाल में दिए गए हैं। भारत और अमेरिका इस संगठन के दो सबसे अहम हिस्से हैं। इस समय दुनिया में केवल भारत ही चीन के साथ सीधे तौर पर सैन्य संघर्ष में शामिल देश के रूप में पहचाना जा रहा है, तो अमेरिका ताइवान को लेकर चीन के खिलाफ लगातार कड़े बयान दे रहा है, निकटस्थ समुद्र में सैन्य अभ्यास कर रहा है।
विज्ञापन
ड्रोन का रखरखाव, जेट इंजन निर्माण
रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी अमेरिका है। हाल में हमने अमेरिका से 310 करोड़ डॉलर में 31 एमक्यू-9बी प्रिडेटर ड्रोन खरीद का समझौता भी किया है। इसके तहत यह ड्रोन असेंबल करने के लिए भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) हब भी बनेगा। यह डील अमेरिका को वित्तीय फायदा देगी, भारत भी एक उन्नत तकनीकी रक्षा उत्पाद का अनुभव हासिल करेगा। यही ड्रोन उपयोग कर रहे ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन आदि अमेरिका के अलावा भारत से एमआरओ सेवाएं भी ले पाएंगे। इसी तरह अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक और हमारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भी मिलकर जीई 414 फाइटर जेट इंजन भारत में बनाने जा रहे हैं।
विज्ञापन
नागरिक संपर्क : सबसे समृद्ध समुदाय दे रहा प्रगाढ़ता
भारतीय मूल के लोगों को अमेरिका का सबसे शिक्षित और समृद्ध समुदाय कहा जाता है। वह आबादी का करीब 1 प्रतिशत हैं, लेकिन देश के कुल टैक्स का 6 प्रतिशत अकेले चुकाते हैं। भारत से बड़ी संख्या में आईटी, चिकित्सा व अन्य क्षेत्रों के पेशेवर अमेरिका जा कर काम कर रहे हैं। नागरिकों का यह संपर्क और समुदाय दोनों देशों की मित्रता को प्रगाढ़ता दे रहा है।
राजनीतिक विचारों की समानता
भारत को पृथ्वी का सबसे बड़ा तो अमेरिका को सबसे पुराना लोकतंत्र कहकर दोनों के संबंध बढ़ाने की बात काफी समय से हो रही है। हालांकि इस समय पश्चिमी देश अमेरिका के जरिए भी भारत से निकटता बढ़ा रहे हैं। इसकी दो बड़ी वजह हैं, पहली, रूस-यूक्रेन युद्ध। इसमें भारत द्वारा रूस की खुली आलोचना न करने के बावजूद अमेरिका कुछ नहीं कह सका है। ऐसा करके वह एक लोकतांत्रिक देश को अपने से दूर नहीं होने देना चाहता। दूसरी वजह, कम्युनिस्ट चीन है, जिसके पड़ोस में सबसे बड़े लोकतंत्र के होने का फायदा अमेरिका और पश्चिमी देश भली भांति समझते हैं।
ऊंचाई पर आर्थिक व कारोबारी संबंध
2022-23 में कुछ वक्त के लिए चीन को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बना, हालांकि फिर चीन ने बढ़त बनाई। लेकिन संकेत मिल गया है कि जल्द ही भारत-अमेरिका आपसी सहयोग बढ़ाकर अपने कारोबार संबंधों को नई ऊंचाई देंगे। भारत के लिए यह सहयोग फायदेमंद होगा, हम अमेरिका से आयात के मुकाबले उसे निर्यात ज्यादा करते आए हैं।
अंतरिक्ष सहयोग.. जो पूरी दुनिया को फायदा देगा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा चंद्रमा पर अपने यान की सफल सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में हमारी साख बढ़ी है। पीएम मोदी द्वारा जून के अमेरिकी दौरे में आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद दोनों देशों के पास इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की तमाम वजहें हैं। निसार प्रोजेक्ट इसका एक उदाहरण है।