{"_id":"5a67ce3b4f1c1ba0268b61a5","slug":"netaji-subhas-chandra-bose-death-may-be-suspected-of-dna-investigation","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटी बोली- डीएनए जांच से दूर हो सकता है पिता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का संदेह","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
बेटी बोली- डीएनए जांच से दूर हो सकता है पिता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का संदेह
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Wed, 24 Jan 2018 05:37 AM IST
विज्ञापन
नेताजी सुभाष चंद्र बोस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेताजी की बेटी अनिता बोस-फाफ ने कहा कि अवशेषों के डीएनए जांच से उनके पिता की मौत का संदेह दूर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि नेताजी के अंतिम संस्कार के बाद बची हड्डियों से यदि डीएनए लिया जा सके तो ऐसा संभव है। अनिता बोस ने यह अनुमान आशीष राय की नई किताब ‘लेड टू रेस्ट: द कंट्रोवर्सी ओवर सुभाष चंद्र बोस डेथ’ में व्यक्त किया है।
माना जाता है कि नेताजी के अवशेष टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में 1945 से संरक्षित रखे हुए हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जिनका 121वां जन्मदिवस राष्ट्र ने मंगलवार को मनाया, का देहांत 18 अगस्त 1945 को ताईवान में हवाई दुर्घटना में हो गया था। इस किताब की प्रस्तावना में अनिता बोस-फाफ ने लिखा है, ‘अधिकतर लोग जो अगस्त 1945 में ताइहोकू में नेताजी की मौत पर संदेह जताते रहे हैं, उनके प्रूफ के लिए एक संभव विकल्प है कि नेताजी के अवशेषों की डीएनए जांच हो।
ये डीएनए अंतिम संस्कार के बाद बची नेताजी के हड्डियों से लिए जा सकते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि इस तरह के प्रयास के लिए भारत और जापान की सरकारों को सहमत होना होगा।’
विज्ञापन
विज्ञापन
माना जाता है कि नेताजी के अवशेष टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में 1945 से संरक्षित रखे हुए हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जिनका 121वां जन्मदिवस राष्ट्र ने मंगलवार को मनाया, का देहांत 18 अगस्त 1945 को ताईवान में हवाई दुर्घटना में हो गया था। इस किताब की प्रस्तावना में अनिता बोस-फाफ ने लिखा है, ‘अधिकतर लोग जो अगस्त 1945 में ताइहोकू में नेताजी की मौत पर संदेह जताते रहे हैं, उनके प्रूफ के लिए एक संभव विकल्प है कि नेताजी के अवशेषों की डीएनए जांच हो।
विज्ञापन
ये डीएनए अंतिम संस्कार के बाद बची नेताजी के हड्डियों से लिए जा सकते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि इस तरह के प्रयास के लिए भारत और जापान की सरकारों को सहमत होना होगा।’
विज्ञापन