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नेताजी सुभाष चंद्र बोस: नरसिम्हा सरकार वापस लाना चाहती थी अस्थियां, दंगों की चेतावनी से टाला था विचार

Fri, 22 Oct 2021 06:50 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 22 Oct 2021 06:50 PM IST
सार

आजाद हिंद सरकार की स्थापना की 78वीं वर्षगांठ मनाने के लिए गुरुवार को एक वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया गया था। इसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी संबंधी प्रो. सुगत बोस ने नेताजी की अस्थियों को राष्ट्रीय मुद्दा बताया और कहा कि यह पारिवारिक विषय नहीं है।

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Netaji grandnephew says Narsimha Rao government wanted to bring back ashes of Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चंद्र बोस - फोटो : फाइल

विस्तार

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के एक करीबी संबंधी ने शुक्रवार को कहा कि पीवी नरसिम्हा राव की सरकार 1990 के दशक में नेताजी के अस्थि अवशेषों को जापान से भारत वापस लाना चाहती थी। वह इस काम के कगार पर पहुंच गई थी लेकिन एक खुफिया रिपोर्ट के चलते उसने अपने कदम पीछे खींच लिए गए थे। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि इस मामले से जुड़े विवाद के चलते कोलकाता में दंगे हो सकते हैं।

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विदेश मंत्रालय के सहयोग के साथ हिंद-जापान सैमुराई सेंटर की ओर से आयोजित की गई इस सेमिनार में पूर्व सांसद और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में गार्डिनर चेयर ऑफ ओसिएनिक हिस्ट्री अफेयर्स के प्रोफेसर सुगत बोस ने कहा कि नेताजी की मृत्यु पर निर्रथक विवाद अब समाप्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताजी बोस स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के एकमात्र ऐसे नेता थे जिनकी मृत्यु रणभूमि में हुई थी। 
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वहीं, लेखक और नेताजी पर शोध करने वाले आशीष रे ने सितंबर 1945 से टोक्यो के बौद्ध मठ रेनकोजी टेंपल में रखे बोस के अस्थि अवशेषों को वापस लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नेताजी की अस्थियों पर कानूनी हक उनकी बेटी प्रो, अनीता पफाफ का बोना चाहिए। भारत सरकार को उन्हें इसे प्राप्त करने की अनुमति देनी चाहिए। अनीता पफाफ अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं और फिलहाल जर्मनी में रहती हैं।

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