फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Nehru made the provision to give citizenship to commonwealth countries, Atal Bihari vajpayee removed

कॉमनवेल्थ देशों के लोगों को नागरिकता देने के नेहरू के प्रावधान को वाजपेयी सरकार ने किया था निरस्त

Sat, 21 Dec 2019 07:25 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 21 Dec 2019 07:25 PM IST
विज्ञापन
Nehru made the provision to give citizenship to commonwealth countries, Atal Bihari vajpayee removed
Jawahar lal Nehru and Atal Bihari vajpayee - फोटो : AmarUjala

विज्ञापन

भारत की नागरिकता लेने देने का मसला केवल मौजूदा राजनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय से ये चल रहा है। इस वक्त तो केवल तीन देशों के लोगों की नागरिकता को लेकर बवाल मचा है, तब कॉमनवेल्थ के तहत आने वाले अनेक राष्ट्रों के लोगों को भारत की नागरिकता देने के लिए चुपके से कानून में प्रावधान कर दिया गया। खास बात है कि यह चुपके से हो रही यह तैयारी एक दो साल में पूरी नहीं हुई, बल्कि 1950 में ये प्रयास शुरू हो गए थे।


नागरिकता कानून 1955 के सेक्शन 16 में यह प्रावधान किया गया कि कॉमनवेल्थ देशों के लोगों को भारत की नागरिकता दी जा सकती है। इसके लिए तर्क दिया गया कि वे हमें वह अधिकार दे रहे हैं, तो हम भी उन्हें दे रहे हैं। 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने नागरिकता (संशोधन) कानून के जरिए इस प्रावधान को निरस्त किया था।

विज्ञापन

नेहरू ने नागरिकता के मसले पर कई बैठकें बुलाई

बनारस की सुभाष संस्था के महासचिव तमल सान्याल, जिन्होंने नागरिकता के मुदे की तह तक जाने के लिए कई जगहों पर आरटीआई लगाई है, का कहना है कि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने नागरिकता के मसले पर कई बैठकें बुलाई थीं। चूंकि कॉमनवेल्थ के तहत आने वाले अनेक देशों के लोगों को नागरिकता देने का मामला था, इसलिए पांच साल के बाद यह मुद्दा निपटाया जा सका।

विज्ञापन
विज्ञापन


04 अगस्त 1951 को कैबिनेट की विदेशी मामलों की कमेटी की बैठक हुई। इसमें पीएम जवाहर लाल नेहरू के अलावा सी राजगोपालाचारी, एन गोपालास्वामी अयंगर और मौलाना अबुल कलाम आजाद सहित कई लोग उपस्थित रहे। इस बैठक के बाद कॉमनवेल्थ देशों के लोगों को नागरिकता देने के मसौदे पर औपचारिक तौर से काम शुरू हो गया।

जारी हुआ एक खास नोट

सान्याल के मुताबिक, 20 अगस्त 1951 को तत्कालीन विदेश सचिव बीके चक्रवर्ती के दफ्तर से एक नोट जारी हुआ। इसमें लिखा था कि कॉमनवेल्थ के देशों के नागरिकों को भारतीय नागरिकता का फायदा कैसे मिले, इस पर काम शुरू किया जा रहा है। इसका तरीका क्या होगा, यह भी देखना है। क्या इसके लिए संसद में अलग से बिल लाना होगा या दूसरे तरीके से कोई प्रावधान किया जा सकता है। उस वक्त सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों की ओर से यह कहा गया है कि इससे संसद में सरकार की बदनामी होगी।

एक्ट में ही छोटा सा प्रावधान किया जाए

इसलिए तय किया गया कि अलग से बिल न लाकर एक्ट में ही कोई छोटा सा प्रावधान कर दिया जाए। वो ऐसा हो कि किसी का ध्यान उस तरफ न जाए। इस बात को ध्यान में रखकर एक प्रपोजल तैयार किया गया। प्रपोजल में लिखा था कि नागरिकता कानून 1955 के सेक्शन 16 के तहत कॉमनवेल्थ के लोगों को नागरिकता दी जा सकती है। तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने इस बाबत चुपके से सांसदों को उक्त प्रपोजल की प्रति वितरित करा दी। इसमें बताया गया कि नागरिकता कानून 1955 में यह प्रावधान कर दिया गया है।



हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी पूर्व पीएम नेहरू का बहुत सम्मान करते थे, लेकिन तत्कालीन परिस्थितियों के मद्देनजर उनकी सरकार ने नागरिकता (संशोधन) कानून 2003 के जरिए कॉमनवेल्थ देशों के लोगों को भारत की नागरिकता देने का उक्त प्रपोजल निरस्त कर दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed