फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Need to circumvent misuse of social media says supreme court

सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर नकेल कसना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

Fri, 06 Oct 2017 09:20 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Fri, 06 Oct 2017 09:20 AM IST
विज्ञापन
Need to circumvent misuse of social media says supreme court
supreme court
सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों और न्यायिक प्रक्रियाओं समेत लगभग सभी मुद्दों पर उल-जुलूल टिप्पणियों, ट्रोल और आक्रामक प्रतिक्रियाओं को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया के मुद्दों पर चिंता जताते हुए कहा कि इस पर नकेल के लिए नियम बनाना जरूरी हो गया है।
विज्ञापन

 
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर तथा डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने एक वरिष्ठ वकील और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष के उस बयान को भी खारिज करते हुए खेद जताया जिसमें कहा गया है कि ज्यादातर जज सरकार समर्थक होते हैं। 
विज्ञापन


पीठ ने कहा, ‘उन्हें सुप्रीम कोर्ट में बैठकर देखना चाहिए कि हम सरकार की कैसे खिंचाई करते हैं।’ पीठ की इस चिंता और विचार से दो वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन और हरीश साल्वे भी सहमत थे। ये दोनों वकील हाईवे गैंगरेप मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान के विवादित बयान से संबंधित मामले में शीर्ष अदालत का सहयोग कर रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


 

साल्वे ने कहा, ‘मैंने अपना ट्विटर अकाउंड हटाया'

Need to circumvent misuse of social media says supreme court
harish salve - फोटो : FILE PHOTO
साल्वे ने कहा, ‘मैंने अपना ट्विटर अकाउंड हटा लिया है। यह बहुत दूषित हो चुका था। यह फैसला मैंने क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज से जुड़े एक मामले के बाद ट्विटर पर आए भद्दे कमेंट्स के बाद किया है।’ 

नरीमन ने कहा, ‘सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपको लगभग हर मुद्दे से जुड़ी भद्दी टिप्पणियां मिल जाएंगी। लिहाजा मैंने भी अब इसे देखना छोड़ दिया है।’

इसके बाद पीठ ने कहा कि रोहिंग्या मामले पर सुनवाई के दौरान एक ऐसी टिप्पणी देखने को मिली, मानो इस पर आदेश पारित हो चुका है और इस मुद्दे पर बहस जरूर हो गया है। 

साल्वे ने कहा कि जजों और जिरह करने वाले वकीलों के बीच विचारों के आदान-प्रदान में बाधा डालने वाली किसी भी चीज को खत्म करना जरूरी हो गया है। 

पीठ ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का दुरुपयोग हो रहा है और लोग अदालती कार्रवाई तक जैसे मामलों में भी गलत जानकारी प्रसारित कर रहे हैं। पहले तो सरकार द्वारा ही निजता के अधिकार का उल्लंघन होता था लेकिन अब यह निजी पक्षों द्वारा भी होने लगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed