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देश के उच्च न्यायालयों में आधे या एक दशक से लंबित करीब 44 फीसद मुकदमे 

Sun, 11 Nov 2018 03:05 AM IST
पीयूष पांडेय
पीयूष पांडेय Updated Sun, 11 Nov 2018 03:05 AM IST
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Nearly 44 percent of cases pending in half or a decade pending in the High Courts of the country
law
आधे या एक दशक से भी ज्यादा समय से लंबित मुकदमों को निपटाने के मामले में देश के उच्च न्यायालय निचली अदालतों से भी पीछे हैं। देशभर के 24 उच्च न्यायालयों में 10 साल से ज्यादा पुराने 21.61% मामले हैं जबकि पांच साल से ज्यादा समय से 22.31% मुकदमे लटके हुए हैं। निचली अदालतों में यह आंकड़ा बहुत कम है, जहां 10 साल से पुराने महज 8.30% हैं और 5 साल से ज्यादा समय के 16.12% मामले लंबित हैं। पिछले माह उच्च न्यायालयों ने दस साल से ज्यादा पुराने दशमलव 15% मामले निपटाए हैं।  
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पुराने मुकदमे निपटाने में निचली अदालतों से काफी पीछे उच्च न्यायालय  
देशभर में सुप्रीम कोर्ट को छोड़ दिया जाए तो 10 नवंबर तक 3.32 करोड़ मामले निचली अदालतों और उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। इसमें 2.85 करोड़ भी ज्यादा मुकदमे निचली अदालतों में हैं जबकि उच्च न्यायालयों में 47.64 लाख से अधिक निपटारे की बांट जोह रहे हैं। सर्वाधिक मामले उत्तर प्रदेश में लंबित हैं जिनमें निचली अदालतों में 68,51,292 हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट में 7,20,440 मुकदमे लटके हैं। हालांकि हाईकोर्ट में लंबित मामलों की फेरहिस्त में राजस्थान हाईकोर्ट ने इलाहाबाद को भी पछाड़ रखा हैं जहां 7,28,030 मुकदमे हैं। गत अक्टूबर तक देश के 24 उच्च न्यायालयों में 1221 स्वीकृत पदों में 330 पद खाली हैं। कुल 891 न्यायाधीश अपनी सेवाएं उच्च न्यायालयों में दे रहे हैं।  

 
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देश के उच्च न्यायालयों में आधे या एक दशक से लंबित करीब 44 फीसद मुकदमे  
राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के आंकड़ों पर गौर करें तो पुराने मामलों को लटकाने की दौड़ में उच्च न्यायालय निचली अदालतों से काफी आगे हैं। जबकि मुकदमों की संख्या में निचली अदालतों पर भारी बोझ हैं। उच्च न्यायालयों में दीवानी के 23.32 लाख से अधिक, आपराधिक 12.92 लाख से ज्यादा और लंबित रिट याचिकाओं की सूची 11.39 लाख से ज्यादा लंबी है। इसमें 2 साल से कम समय के महज 29.79% और 2 साल से अधिक पर पांच साल से कम पुराने 26.29% मुकदमे लंबित हैं।
   
 
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दस साल से पुराने मामलों का आंकड़ा 21.61% है और पांच साल से ज्यादा पुराने 22.31% हैं। ऐसे में आधे दशक से ज्यादा समय से लंबित मुकदमे 44% के करीब हैं। न्याय मिलने में देरी में, न्याय नहीं मिलने के बराबर है और यह भारी आंकड़ा इस सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई टिप्पणी को चरितार्थ करता है। केंद्र सरकार दस साल से भी ज्यादा समय से अदालतों के साथ मिलकर मुकदमों के निपटारे में तेजी लाने की दिशा में काम कर रही है। इसके बावजूद मुकदमों का पहाड़ और न्यायाधीशों के खाली पदों को भरने में तेजी नहीं आ रही है। विधि विशेषज्ञ मानते हैं कि मुकदमों के निपटारे और पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर ही काम बनेगा।

 

हालांकि निचली अदालतों का प्रदर्शन पुराने मुकदमों के निपटारे में बेहतर हैं, जहां कुल मामलों में 46.89% दो साल से कम समय के हैं और दो साल से अधिक पर पांच साल से कम समय के 28.69% मुकदमे लंबित हैं। पांच साल अधिक पुराने 16.12% मामले हैं जबकि दस साल से ज्यादा समय से 8.30% मामले हैं।  गौरतलब है कि गत अक्टूबर मध्य तक निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के स्वीकृत 22,036 पदों में 5,133 पद खाली थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी जिसके बाद से राज्यों में न्यायिक अधिकारियों की भर्ती की प्रक्रिया जारी है।  
 
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