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साक्षात्कार : एनडीडीबी बनाएगा सोलर पंप से सिंचाई करने वाले किसानों का कोओपरेटिव

Mon, 21 Jan 2019 06:31 AM IST
संदीप भट्ट शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Mon, 21 Jan 2019 06:31 AM IST
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NDDB will create Cooperative of farmers who water their fields by solar pump
एनडीडीबी के चेयरमैन दिलीप रथ

पिछले कई महीनों के बीच दुनिया भर में दुग्ध उत्पादों की कीमतों में आई नरमी की वजह से भारतीय बाजार में भी दूध की कीमतों पर असर पड़ा था। इससे दुग्ध किसानों की आमदनी में फर्क आना स्वाभाविक है। हालांकि अब एक बार फिर से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दुग्ध उत्पादों की कीमत बढ़ने लगी है लेकिन अभी भी किसानों को गाय का दूध 22 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर बेचना पड़ रहा है। ऐसे माहौल में, देश में दुग्ध किसानों केयूनियन का शीर्ष संगठन नेशनल डेरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) अब दुग्ध किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सौर ऊर्जा का विकल्प लेकर सामने आया है। 

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इससे न सिर्फ किसानों के चिंलिंग प्लांट चलेंगे बल्कि उनके सोलर पंप भी चलेंगे। यही नहीं, सोलर पंप एरीगेटर्स कोओपरेटिव इंटरप्राइजेज (स्पाइस) भी बनाने की योजना है ताकि किसानों की बिजली राज्यों के विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को सीधे बेची जा सके। इस योजना को कैसे परवान चढ़ाया जाएगा, इस मसले पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने एनडीडीबी के अध्यक्ष दिलिप रथ से विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के संपादित अंश:
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प्रश्न- सरकार हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के क्रम में डेरी क्षेत्र को भी इससे जोड़ना चाहती है। इस दिशा में कैसे काम होगा?

उत्तर- हम सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जोड़ना चाहते हैं, वह भी सहकारी संस्था की तरह। हमने देश के कुछ इलाकों का अध्ययन किया है, जहां पानी की कमी चल रही है। हमने पाया कि वहां सब्सिडी वाली सस्ती बिजली की वजह से किसानों ने भूजल का जम कर दोहन किया और आज वहां पानी की कमी हो गई है। ऐसे इलाकों में गुजरात और महाराष्ट्र के ही जिले शामिल नहीं हैं बल्कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के भी इलाके हैं। 
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इसलिए ऐसे इलाकों को ध्यान में रख कर ही एनडीडीबी ने स्पाइस योजना की रूपरेखा खींची। इस योजना को पायलट रूप में गुजरात के दो गांवों- धुंडी और मुजकुवा में आजमाया गया। इसके सकारात्मक परिणाम दिखने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औपचारिक रूप से 30 सितंबर 2018 को इस योजना की शुरूआत की। इसमें हमने आईडल्ब्यूएमआई-टाटा वाटर पालिसी प्रोग्राम (आईटीपी) का भी सहयोग लिया है। 

उन गांवों में हमने डीजल सेट से या बिजली के मोटर से पंप चलाने वालों को सोलर पंप से जोड़ा। उन किसानों के बीच पैदा हुए सौर ऊर्जा को आपस में जोड़ कर उसे ग्रिड से जोड़ा। उन गांवों के परिणाम उत्साहवर्धक रहे और इस सयम उन दोनों गांवों में न सिर्फ किसानों का पंपिंग सेट चलाने का खर्च घट गया है बल्कि डिस्कॉम को बिजली बेच कर अलग से पैसा कमा रहे हैं।

प्रश्न- गुजरात की स्पाइस योजना को कहीं और आजमा रहे हैं?

उत्तर- जी हां, हमें महाराष्ट्र के कोल्हापुर एवं जलगांव मुजकुवा मॉडल पर ही काम होगा। यही नहीं, पंजाब और हरियाणा सरकार भी इस योजना में रूचि ले रही है। हमने महाराष्ट्र में जब डिस्कॉम से सौर ऊर्जा खरीदने के बारे में बात की तो कहा गया कि वह सिंगल प्वाइंट से बिजली लेगी, मतलब हर अलग-अलग किसान को ग्रिड एक्सेस नहीं मिलेगा बल्कि उन किसानों को कोओपरेटिव बना कर एक जगह ही ग्रिड एक्सेस दिया जाएगा। हमने पंजाब में भी इसी तरीके से काम करना तय किया है। हरियाणा में भी ऐसा करना चाहते हैं।

प्रश्न- डेरी किसानों को किस तरह से सौर ऊर्जा से जोड़ा जा सकता है?

उत्तर- हमने डेरी किसानों को भी सौर ऊर्जा से जोड़ने की योजना बनाई है। आप देखें तो गाय को नहलाने से लेकर चारे के पटवन, दूध निकालने, उसके चिलिंग प्लांट चलाने आदि में बिजली की भारी खपत होती है। बहुत जगत तो चिलिंग प्लांट चलाने के लिए डीजल जेनेरेटर का उपयोग हो रहा है। वह तो और भी महंगा पड़ता है। हमने दुग्ध किसानों के कोओपरेटिव यूनियन को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं, कि वह सौर ऊर्जा के प्लांट लगाने पर सहमत हों। इस बारे में हमने केंद्रीय अक्षय ऊर्जा मंत्रालय से बात की है। इससे किसानों की लागत घटाने और उसकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रश्न- देश के औसत किसानों के पास नकदी के नाम पर ज्यादा कुछ नहीं होता है। ऐसे में वे सौर ऊर्जा प्लांट लगाने केलिए पैसे कहां से जुटाएंगे?

उत्तर- सही कहा आपने। हम भी इसके लिए कुछ योजना बनाई है। इस बारे में मेरी अक्षय ऊर्जा मंत्रालय से बात हुई है। यदि किसान सौर ऊर्जा प्लांट लगाते हैं, तो उन्हें कुसुम कार्यक्रम के तहत परियोजना लागत के 30 फीसदी हिस्से की सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भी वित्त पोषण की बात चल रही है। जो राशि बैंक या वित्तीय संस्थानों से मिलेगी, उसकी चुकौती अवधि भी तीन से चार साल की अवधि का पेबैक पीरियड होगा।

प्रश्न- दुग्ध किसानों की स्थिति इस समय खराब है। दिल्ली के करीब मेरठ में तो इस समय गाय के दूध का भाव 22.58 रुपये मिल रहा है। इस स्थिति से कैसे निजात मिलेगी?


उत्तर-
दूध के किसानों की स्थिति वाकई में अभी नाजुक है, लेकिन यदि आप पहले से तुलना करेंगे तो इस समय स्थिति में सुधार हुआ है। लेकिन एक तथ्य को आप समझिए, हमें किसानों से मिले दूध का जो भाव बाजार में मिलता है, उसमें से 75 फीसदी हिस्सा किसानों को लौटा देते हैं। किसानों को दूध की ज्यादा कीमत मिले, उसका एक ही उपाय है कि दूध के ज्यादा से ज्यादा वैल्यू एडेड प्रोडक्ट बनाए जाएं और इसका ज्यादातर हिस्सा विदेशी बाजारों में बेचा जाए। 

दूध से ज्यादा पैसा मिले, इसके लिए स्किम मिल्क पाउडर (एसएमपी) ज्यादा से ज्यादा बने और उसका ज्यादा दाम मिले, तभी संभव होगा। पिछले साल एसएमपी का भाव घट कर 135 रुपये प्रति किलो तक गिर गया था। तब तो किसानों को और कम दाम मिल रहा था। अब स्थिति सुधरी है और इसका भाव 200 रुपये प्रति किलो हो गया है।

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