विपक्ष को छोड़कर नेताओं के जाने से राज्यसभा में मजबूत होगा एनडीए
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विपक्ष से एक एक कर नेताओं के अलविदा कहने से संसद के शीत सत्र में राज्यसभा के भीतर एनडीए के लिए गरमाहट बढ़ रही है। मोदी सरकार के लिए उच्च सदन में ये अब तक सबसे शानदार दौर हो सकता है। बहुमत से बहुत कम दूरी पर एनडीए अपने क्षेत्रीय सहयोगी दलों के साथ राज्यसभा में मजबूत स्थिति में पहुंच गई है।
कर्नाटक से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य केसी राममूर्ति के पार्टी छोड़ने के साथ ही उच्च सदन में कांग्रेस के 45 सदस्य रह गए। इसी के साथ विधानसभा में अच्छा संख्या बल होने के कारण उपचुनाव होने पर भाजपा के लिये यह सीट हासिल करना आसान होगा। जिसके बाद 245 सदस्यों वाले उच्च सदन में उसकी संख्या 85 हो जाएगी। ऐसी चर्चा है कि राममूर्ति भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
राज्यसभा में इस समय 5 सीटें खाली हैं और सत्तारूढ़ एनडीए के अभी 106 सदस्य सदन में मौजूद हैं। एआईएडीएमके जो एनडीए का घटक दल नहीं होने के बावजूद ज्यादातर मौकों पर सरकार के समर्थन में रहा है के 11 सदस्य हैं, 07 बीजद, 06 टीआरएस और 02 वाईएसआर कांग्रेस व तीन क्षेत्रीय दलों ने भी मोदी सरकार को प्रमुख मुद्दों पर समर्थन दिया है। भाजपा दिग्गजों का दावा है कि आने वाले हफ्ते में और सदस्य पार्टियां छोड़ेंगे और उन राज्यों में भाजपा की स्थिति मजबूत होने से पार्टी को इसका फायदा होगा।
दूसरे कार्यकाल में कम होंगी मुश्किलें
मोदी सरकार को राज्यसभा में घेरने वाले विपक्ष जहां दूसरे कार्यकाल में हताश दिखेगा वहीं मोदी सरकार के लिए मुश्किलें कम होना तय हे। कई क्षेत्रीय दल भी अनुच्छेद 370 के फैसले के बाद से भगवा रंग की ओर झुके हैं। वहीं लगातार पार्टी छोड़ रहे नेताओं के कारण कांग्रेस का संख्याबल कम हो रहा है।