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₹182 करोड़ का 'जिहादी ड्रग' जब्त: अमित शाह ने ऑपरेशन रेजपिल की दी डेडलाइन, कहा- अब नशे के सौदागरों की खैर नहीं

Sat, 16 May 2026 02:40 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Sat, 16 May 2026 02:40 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एनसीबी को कैप्टागन ड्रग की बड़ा खेप पकड़ने पर सरहाना की है। उन्होंने बताया कि सरकार ड्रग-फ्री इंडिया के संकल्प के साथ काम कर रही है। 


 

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NCB Major Consignment Captagon Drug Seized First Time in the Country Valued at Approximately ₹182 Crore
एनसीबी ने की कैप्टागन ड्रग की बड़ी खेप जब्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने पहली बार कैप्टागन नामक ड्रग की बड़ी खेप जब्त की है, जिसकी कीमत करीब 182 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई में लगभग 227.7 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट/पाउडर जब्त किया गया। सिंडिकेट से जुड़े अवैध रूप से भारत में रह रहे एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। 

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गृह मंत्री ने एक्स पर दी सूचना

गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ड्रग-फ्री इंडिया के संकल्प के साथ लगातार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत एजेंसियों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया।

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अमित शाह ने कहा कि मध्य पूर्व भेजी जा रही इस ड्रग खेप को जब्त करना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, नशे के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का बड़ा उदाहरण है।

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उन्होंने कहा कि भारत सरकार देश में आने वाले या भारत की जमीन का ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल कर बाहर भेजे जाने वाले हर तरह के नशीले पदार्थों पर सख्त कार्रवाई जारी रखेगी।

गृह मंत्री ने इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए एनसीबी अधिकारियों और जवानों की सतर्कता और बहादुरी की सराहना भी की।

ऑपरेशन 'रेजपिल' के तहत कर्यवाई

ऑपरेशन 'रेजपिल' को एनसीबी द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाया गया एक बड़ा अभियान माना जा रहा है, जिसका मकसद अवैध ड्रग्स नेटवर्क को तोड़ना है।

जिहादी ड्रग क्यों कहा जाता है

'कैप्टागन' असल में फेनेथिलिन नामक एम्फेटामिन आधारित ड्रग का रूप है। मिडिल ईस्ट के युद्धग्रस्त इलाकों और आतंकी संगठनों के लड़ाकों के बीच इसके इस्तेमाल की वजह से इसे 'जिहादी ड्रग' कहा जाता है।

इस ड्रग के सेवन से क्या होता है

जानकारी के मुताबिक, इस ड्रग का सेवन करने के बाद इंसान को दर्द, डर या थकान का एहसास कम हो जाता है। यही वजह है कि इसे लड़ाई और हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की ड्रग्स न केवल युवाओं को बर्बाद करती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अपराध और आतंक नेटवर्क को भी बढ़ावा देती हैं।

एनसीबी ने  नई दिल्ली के नेब सराय क्षेत्र में मारा छापा

एक विदेशी ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसी से प्राप्त सूचना के आधार पर कि भारत का उपयोग कैप्टागन तस्करी के ट्रांजिट पॉइंट के रूप में किया जा रहा है, एनसीबी ने नई दिल्ली के नेब सराय क्षेत्र में एक मकान की पहचान की। 11 मई 2026 को मकान की तलाशी के दौरान एक चपाती कटिंग मशीन में छिपाकर रखी गई लगभग 31.5 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट बरामद की गई, जिसे जेद्दा, सऊदी अरब भेजा जाना था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि सीरियाई नागरिक 15 नवंबर 2024 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था, लेकिन उसका वीजा 12 जनवरी 2025 को समाप्त हो गया। वह अवैध रूप से यहां रह रहा था। 



गुजरात के मुंद्रा से भी ड्रग बरामद

आरोपी से पूछताछ के बाद 14 मई 2026 को गुजरात के मुंद्रा स्थित कंटेनर फैसिलिटेशन स्टेशन में एक कंटेनर से लगभग 196.2 किलोग्राम कैप्टागन पाउडर बरामद किया गया। इस कंटेनर को भेड़ की ऊन से भरा हुआ बताकर सीरिया से आयात किया गया था। कंटेनर की गहन तलाशी के दौरान तीन बैगों में छिपाकर रखे गए 196.2 किलोग्राम कैप्टागन पाउडर बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जब्त खेप को खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्व देशों में भेजा जाना था, जहां कैप्टागन का दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। 

 

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