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ताकत: समुद्री गश्ती विमान के रखरखाव में भारत आत्मनिर्भर; वायुसेना में शामिल होंगे छह 'नेत्र-I आइज इन द स्काई'
Thu, 21 Sep 2023 11:48 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 21 Sep 2023 11:48 PM IST
सार
नौसेना ने कहा कि देश में एमआरओ के माध्यम से डिपो स्तर के निरीक्षण की सफलता पी8आई बेड़े के लिए स्वदेशी क्षमताओं की तैयारी का परीक्षण करने में एक प्रमुख मील का पत्थर है। इससे इंजीनियरिंग और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विमानन प्लेटफार्मों के रखरखाव के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का दायरा बढ़ जाता है।
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भारतीय वायुसेना-भारतीय नौसेना
- फोटो : Social Media
विस्तार
भारतीय नौसेना ने लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान के रखरखाव के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नौसेना ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आठ P8I विमानों का डिपो स्तरीय निरीक्षण मेसर्स एयर वर्क्स द्वारा किया गया है। ये कर्नाटक के होसुर में स्थित एक स्वदेशी रखरखाव मरम्मत ओवरहाल (एमआरओ) है। वहीं, भारतीय वायुसेना ने छह और स्वदेशी 'नेत्र-I आइज इन द स्काई' निगरानी विमान खरीदने की योजना बनाई है।
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नौसेना ने यह भी कहा कि देश में एमआरओ के माध्यम से डिपो स्तर के निरीक्षण की सफलता पी8आई बेड़े के लिए स्वदेशी क्षमताओं की तैयारी का परीक्षण करने में एक प्रमुख मील का पत्थर है। इससे इंजीनियरिंग और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विमानन प्लेटफार्मों के रखरखाव के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का दायरा बढ़ जाता है।
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भारतीय वायुसेना में शामिल होंगे छह 'नेत्र-I आइज इन द स्काई'
भारतीय वायुसेना ने छह और स्वदेशी 'नेत्र-I आइज इन द स्काई' निगरानी विमान खरीदने की योजना बनाई है। वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि इस्राइली AWACS और नेत्रा निगरानी विमान DRDO द्वारा विकसित किए जाने के बाद से ही वायु सेना में हैं। अब इनमें से छह और विमान बनाने की योजना है। इसके लिए जमीनी काम शुरू हो चुका है। बता दें कि इन विमानों को 'आई इन द स्काई' के नाम से भी जाना जाता है।
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बता दें कि भारतीय वायु सेना चीन और पाकिस्तान सीमा पर उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इन विमानों को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर रही है। भारतीय वायुसेना अपने पड़ोसी मुल्कों और दुश्मनों की निगरानी के लिए तीन इस्राइली AWACSऔर दो नेत्र निगरानी विमानों पर निर्भर है।