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INS विक्रमादित्य पर तैनात होंगे 57 फाइटर जेट, पलक झपकते ही दुश्मन को कर देंगे तबाह!

Sat, 29 Jul 2017 10:08 AM IST
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला Updated Sat, 29 Jul 2017 10:08 AM IST
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Navy carries out trials of new aircraft for INS Vikramaditya
INS विक्रमादित्य - फोटो : The Forthright
INS विक्रमादित्य पर 57 फाइटर प्लेन तैनात होंगे, जो एक कमांड मिलने भर की देर में समंदर से ही दुश्मन की ओर बढ़ चलेंगे और देखते ही देखते दुश्मन को तबाह कर डालेंगे। अभी INS विक्रमादित्य पर 26 मिग 29K और 10 कामोव KA-31 हेलीकॉप्टर तैनात हैं, पर अगले 3 सालों में इंडियन नेवी चाहती है कि उसपर नए फाइटर प्लेन्स की तैनाती हो, ताकि INS विक्रमादित्य अकेले ही दुश्मन पर कहर ढा सके। इसके लिए इंडियन नेवी ने राफेल, साब-सी-ग्रिफेन और F-18 जैसे फाइटर जेट बनाने वाली कंपनियों को बुलाया है और कहा है कि वो अपनी उपयोगिता साबित करें और बताएं कि उनके प्लेन्स की तैनाती INS विक्रमादित्य पर क्यों हो?
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नेवी ने बाकायदा ट्रायल देने के लिए इन फाइटर जेट्स को बुलाया है, इसके लिए INS विक्रमादित्य के होमबेस कर्नाटक के करवार मेंं ट्रायल होंगे। दरअसल, INS विक्रमादित्य कीव क्लास का सोवियत रूसी जमाने का विमानवाहक पोत है। और भारत ने रूस से इसे खरीद लिया है। ये 45,000 टन वजनी है और अकेले ही किसी भी युद्ध का पासा पलटने में सक्षम है। इंडियन नेवी ने इन प्लेन्स की खरीदी के लिए 75,000 करोड़ रुपए रखे हैं, साथ ही कुछ शर्तें भी रखी हैं। इंडियन नेवी चाहती है कि ये प्लेन्स भारत में ही बने और अधिक से अधिक तकनीकी ट्रांसफर पर बात हो। इसके लिए जरूरी कल-पुर्जों की सप्लाई के साथ ही सिर्फ 3 सालों में ही इनकी तैनाती भी हो।
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INS विक्रमादित्य पर रूसी मिग 29K विमानों की तैनाती है, पर लगातार इंजन में आती रही तकनीकी खामियों की वजह से नेवी परेशान है। इसीलिए वो डबल सीटर लाइट कॉम्बैट फाइटर प्लेन खरीदने के लिए पश्चिमी देशों की कंपनियों को ट्रायल के लिए बुला रही है, ताकि INS विक्रमादित्य पर उन प्लेन्स की तैनाती के लिए बाद में कोई दिक्कत नहीं हो। 
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INS विक्रमादित्य पर राफेल, एफ-18, साब की तैनाती में ये है सबसे बड़ी दिक्कत

Navy carries out trials of new aircraft for INS Vikramaditya
विक्रमादित्य
INS विक्रमादित्य पर राफेल, एफ-18, साब की तैनाती में सबसे बड़ी दिक्कत रूसी और पश्चिमी फाइटर प्लेन्स की टेक-ऑफ और लैंडिंग में अंतर की है। INS विक्रमादित्य रूस में बना है और इसपर तैनात मिग विमान स्की-जंपिंग के जरिए आसमान में जाते हैं। वहीं पश्चिमी देशों के फाइटर प्लेन स्टीम पॉवर से लैस गुलेल जैसी तकनीकी के जरिए आसमान में जाते हैं। INS विक्रमादित्य में दोनों ही खूबियां हों, इसके लिए इसमें बदलाव लाए जा रहे हैं।
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