स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस ने आईएनएस विक्रमादित्य पर की सफल लैंडिंग, बढ़ेगी नौसेना की ताकत
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भारतीय नौसेना के लिए आज बड़ा दिन है। स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस ने विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य पर अपनी पहली सफल लैंडिंग की। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के अधिकारियों के मुताबिक उम्मीद की जा रही है कि यह लड़ाकू विमान जल्द ही यहां से उड़ान भी भरेगा।
The Naval Light Combat Aircraft made its first successful landing on the aircraft carrier INS Vikramaditya. The Defence Research and Development Organisation (DRDO)-developed fighter aircraft is expected to attempt its maiden take off from the carrier soon. https://t.co/6n4ntkQXul pic.twitter.com/M1YMfMd6pk
— ANI (@ANI) January 11, 2020विज्ञापन
तेजस की सफल अरेस्टेड लैंडिंग के साथ नौसेना ने इतिहास रच दिया है। भारतीय नौसेना ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह पहली बार है जब कोई स्वदेशी लड़ाकू विमान किसी विमानवाहक पोत पर उतरा है।शनिवार सुबह 10 बजकर दो मिनट पर इसकी लैंडिंग हुई। अधिकारियों ने बताया कि कमांडर जयदीप मावलंकर ने यह लैंडिंग कराई। इस सफल लैंडिंग के बाद रूस, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के बाद भारत विमान वाहक पोत पर अरेस्टेड लैंडिंग कराने वाला छठा देश बन गया है।
डीआरडीओ द्वारा बनाया गया तेजस एयरक्राफ्ट अरेस्टर वायर की मदद से आईएनएस विक्रमादित्य पर उतरा। एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी नौसेना के साथ मिलकर इस लड़ाकू विमान को विकसित कर रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेजस की लैंडिंग के बाद डीआरडीओ और नौसेना को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, 'डीआरडीओ द्वारा विकसित तेजस की आईएनएस विक्रमादित्य पर पहली लैंडिंग के बारे में जानकर बेहद खुशी हुई। यह सफल लैंडिंग भारतीय लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम के इतिहास में एक शानदार पल है। इस सफलता के लिए डीआरडीओ और नौसेना को बधाई।'
Extremely happy to learn of the maiden landing of DRDO developed LCA Navy on INS Vikramaditya.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) January 11, 2020
This successful landing is a great event in the history of Indian Fighter aircraft development programme.
Congratulations to Team @DRDO_India & @indiannavy for this achievement.
कैसे होती है अरेस्टेड लैंडिंग
अरेस्टेड लैंडिंग के लिए विमानों के पीछे के हिस्से में स्टील वायर से जोड़कर एक हुक लगाया जाता है। लैंडिंग के दौरान पायलट को यह हुक विमानवाहक पोत में लगे स्टील के मजबूत केबल में फंसाना होता है। जैसे ही प्लेन रफ्तार कम करते हुए डेक पर उतरता है, हुक तारों में पकड़कर उसे थोड़ी दूरी पर रोक लेता है। इसलिए इसे अरेस्टेड लैंडिंग कहा जाता है।
क्या है अरेस्टेड लैंडिंग
नौसेना में शामिल होने के लिए विमानों को हल्का होने के साथ ही उसे अरेस्टेड लैंडिंग में भी सक्षम होना चाहिए। विमानवाहक पोत एक निश्चित भार ही उठा सकता है, इसलिए विमानों का हल्का होना जरूरी है। युद्धपोत पर बने रनवे की लंबाई निश्चित होती है। ऐसे में विमानों को लैंडिंग के दौरान रफ्तार कम करते हुए रनवे पर जल्दी रुकना पड़ता है। इसलिए अरेस्टेड लैंडिंग जरूरी होती है।
बता दें कि भारत ने अपना विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य अरब सागर में तैनात किया है। भारत ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब चीन और पाकिस्तान उस क्षेत्र में नौ दिवसीय नौसैनिक अभ्यास कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस कदम के जरिए भारत ने अपने दोनों पड़ोसियों को स्पष्ट संकेत दिया है। सैन्य सूत्रों ने बताया कि जब पोत को सामरिक मिशन पर तैनात किया गया, नौसेना मुख्यालय के शीर्ष अधिकारी विमानवाहक पोत पर सवार थे।