National War Memorial Day: तीसरी वर्षगांठ पर जानिए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के बारे में, सेना प्रमुखों ने वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
नेशनल वॉर मेमोरियल की तीसरी वर्षगांठ पर सेना प्नेरमुखों ने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। नेशनल वॉर मेमोरियल डे अमेरिकी गृह युद्ध में मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया था।
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नेशनल वॉर मेमोरियल की तीसरी वर्षगांठ पर भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। नेशनल वॉर मेमोरियल डे अमेरिकी गृह युद्ध में मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद किसी भी युद्ध में शहीद हुए सैनिक के सम्मान में इस दिन को खास तौर पर मनाया जाता है।
कैसे हुई शुरुआत
बता दें कि 30 मई, 1868 को पहली बार गणतंत्र की ग्रैंड आर्मी के जनक जॉन ए लोगान द्वारा स्मृति दिवस घोषित किया गया था, जो पूर्व केंद्रीय नाविकों और सैनिकों का एक संगठन था। 1968 में कांग्रेस द्वारा यूनिफॉर्म मंडे हॉलिडे एक्ट पारित किया गया था ताकि मई में अंतिम सोमवार के रूप में स्मारक दिवस की स्थापना की जा सके। इसके बाद 1973 में न्यूयॉर्क, मई में अंतिम सोमवार वैधानिक अवकाश के रूप में मेमोरियल डे नामित करने वाला पहला राज्य बना। 1800 के दशक के अंत तक विभिन्न राज्यों ने स्मृति दिवस को कानूनी अवकाश घोषित कर दिया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद, उन लोगों को सम्मानित करने की परंपरा बन गई जो अमेरिका युद्ध में मारे गए और पूरे संयुक्त राज्य में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में स्थापित हुए। भारत भी स्मृति दिवास मनाता है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2019 को इंडिया गेट पर युद्ध स्मारक का उद्घाटन कर देश को समर्पित किया।
क्या है खासियत
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक या नेशनल वॉर मेमोरियल इंडिया गेट के दूसरी तरफ 400 मीटर दूरी पर स्थित है। इस स्मारक को इंडिया गेट के पास मौजूद छतरी (चंदवा) के आसपास बनाया गया है। स्मारक में 25,942 सैनिकों के नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखे गए हैं। इस युद्ध स्मारक में 1947-48 के युद्ध से गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष तक शहीद हुए सैनिकों के नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। स्मारक में उन सैनिकों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने आतंकवादी विरोधी अभियान में जान गंवाई है। इससे पहले सशस्त्र सेना के शहीद हुए सैनिकों के सम्मान के लिए कोई भी स्मारक नहीं था।
अमर जवान ज्योति का युद्ध स्मारक की लौ में हुआ विलय
इंडिया गेट पर बीते 50 साल से जलाई जा रही अमर जवान ज्योति जनवरी से वहां नहीं जल रही है। अमर जवान ज्योति की स्थापना उन सैनिकों की याद में की गई थी, जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए थे। इस युद्ध में भारत ने विजय प्राप्त की थी। अब अमर जवान ज्योति का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में जल रही लौ में विलय कर दिया गया है। अब सभी शहीद हुए जवानों को एक ही जगह पर श्रद्धांजलि दी जा रही है।
Defence Secretary Ajay Kumar lays wreath at National War Memorial in Delhi.
- Prasar Bharati News Services (@pbns_india) 25 Feb 2022