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मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्यों को भेजा नोटिस, आशा कर्मियों की खराब स्थिति पर पूछे सवाल
Tue, 25 May 2021 08:57 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Tue, 25 May 2021 08:57 AM IST
सार
महामारी के दौरान आशा कर्मियों की बुरी स्थिति को लेकर मिली शिकायत के आधार पर मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेजा है। आयोग ने स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव को भी नोटिस जारी किया है।
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फाइल फोटो।
- फोटो : Social media
विस्तार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गांव में आशा कर्मचारियों की बुरी स्थिति को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेजा है। देश में ग्रामीण इलाकों में आशा कर्मचारियों की खराब कामकाजी स्थिति के आरोपों पर आयोग ने केंद्र और राज्य को नोटिस जारी किया है।
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आयोग ने कहा कि अगर ये आरोप सही निकलते हैं तो यह काफी चिंताजनक मुद्दा है, क्योंकि व्यापक ग्रामीण जनसंख्या का पूरा स्वास्थ्य प्रबंध सिस्टम इन्हीं आशा कर्मचारियों पर निर्भर होता है। एक बयान जारी कर मानवाधिकार आयोग ने कहा कि आयोग ने आशा कर्मचारियों के समर्थन में दाखिल की एक शिकायत पर संज्ञान लिया है।
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इस शिकायत में जानकरी दी गई है कि आशा कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल रहा है और वहीं देशभर में ग्रामीण इलाकों में फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की तरह काम करने वाली आशा कर्मचारियों को सुरक्षा के लिहाज से वो सुविधाएं नहीं दी गईं, जो देनी चाहिए थीं।
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इसी के साथ मानवाधिकार आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और राज्यों के मुख्य सचिवों को भी नोटिस जारी किया है। इसके अलावा बयान में आयोग ने सभी सचिवों से इस मुद्दे को लेकर अगले छह हफ्तों में रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
बयान में कहा गया है कि इस रिपोर्ट में आशा कर्मचारियों से संबंधित सभी सवालों के जवाब होने चाहिए। मसलन, हर राज्य में कितना आशा कर्मचारी काम कर रही हैं, आशा कर्मचारियों को मिलने वाला वेतन और महामारी की वजह से भुगतान किए गए अन्य बकाया, स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा जैसे विषय रिपोर्ट में शामिल होने चाहिए।
इसके अलावा बयान में कहा गया कि इस रिपोर्ट में इन स्वास्थ्य कर्मियों और उनके परिवार को दी जाने वाली सुविधाओं, ड्यूटी के दौरान महामारी की चपेट में आकर मौत हो जाने पर कितना मुआवजा, लंबी अवधि का स्वास्थ्य बीमा जैसे मुद्दे शामिल होने चाहिए।