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National Herald Case: राष्ट्रपति चुनाव से लेकर 2024 के आम चुनावों तक की बिछ रही बिसात, भाजपा को कितना मिलेगा फायदा?

Mon, 13 Jun 2022 07:28 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 13 Jun 2022 07:28 PM IST
सार

भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता के मुताबिक विपक्षी दलों की राजनीति अलग-अलग आदर्शों को लेकर चलती है। उन्हें एक सूत्र में बांधने वाला कोई एक सूत्र नहीं है। केवल भाजपा का विरोध इस तरह का सूत्र नहीं हो सकता। यही कारण है कि क़ई बार प्रयास करने के बाद भी अभी तक विपक्षी दलों की एकता को मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है...

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National Herald Case: ED questioning to congress leader rahul gandhi will be benefited for BJP in Upcoming President and general election 2024
प्रियंका गांधी के साथ ईडी के दफ्तर पहुंचे राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस का सत्याग्रह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है, जब राष्ट्रपति चुनाव सामने है। इस चुनाव के लिए एनडीए खेमा आधे वोटों के बेहद करीब है, लेकिन इसके बाद भी उसकी जीत तभी हो सकती है जब उसे नॉन-एनडीए खेमे के कुछ सांसदों-विधायकों का साथ मिले। विपक्षी खेमा अभी भी अपने एक सर्वमान्य नेता की तलाश में है। नॉन-कांग्रेस खेमे से किसी एक सर्वमान्य चेहरे के पीछे पूरे विपक्ष को लामबंद करने की रणनीति पर काम चल रहा है। इतिहास देखते हुए भाजपा को विपक्ष की इस रणनीति में ही अपनी जीत का रास्ता दिखाई दे रही है। उसे उम्मीद है कि आपसी मतभेदों के चलते इस मुद्दे पर भी विपक्ष एकमत नहीं हो पायेगा और उसकी राह आसान हो जाएगी। यह रास्ता 2024 लोकसभा चुनाव में भी उसकी जीत की राह खोल सकता है।

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राष्ट्रपति चुनाव में फुस्स हो सकती है विपक्षी रणनीति!

इसके पूर्व में भी कर्नाटक विधानसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी समूचे विपक्ष को एक साथ लाने की कोशिशें की गई थीं, लेकिन उन अवसरों पर भी विपक्ष भाजपा के खिलाफ एकजुट होने में नाकाम रहा था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसी हफ्ते दिल्ली में राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक उम्मीदवार पर आम राय बनाने के लिए विपक्षी दलों की एक बैठक बुलाई है। अभी से इस बैठक में कांग्रेस के शामिल न होने की आशंका जताई जाने लगी है। यदि ऐसा होता है तो राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी रणनीति की हवा निकल सकती है। कांग्रेस के पास राज्यसभा में अभी भी भाजपा के बाद सबसे ज्यादा सांसद हैं जो किसी उम्मीदवार की जीत-हार में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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विपक्षी खेमे में यह बिखराव राज्यसभा चुनाव के दौरान भी दिखाई पड़ा था, जिससे भाजपा महाराष्ट्र और हरियाणा में अपने अतिरिक्त उम्मीदवारों को जिताने में सफल रही। भाजपा को अनुमान है कि विपक्षी दलों के कुछ सांसदों का साथ उसे राष्ट्रपति चुनाव में भी मिल सकता है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विपक्षी दलों को साधने के लिए अधिकृत हो चुके हैं। इनके द्वारा एक-दो दलों को साथ लाते ही विपक्षी एकता की सोच पर चोट लग सकती है।
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भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता के मुताबिक विपक्षी दलों की राजनीति अलग-अलग आदर्शों को लेकर चलती है। उन्हें एक सूत्र में बांधने वाला कोई एक सूत्र नहीं है। केवल भाजपा का विरोध इस तरह का सूत्र नहीं हो सकता। यही कारण है कि क़ई बार प्रयास करने के बाद भी अभी तक विपक्षी दलों की एकता को मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है। उन्होंने कहा कि 2024 लोकसभा चुनावों में भी इस तरह की कोई एकता की संभावना नहीं है।

यहां भाजपा को कड़ी टक्कर

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह ने अमर उजाला से कहा कि विपक्षी दल एक विचारधारा के आदर्श पर एक साथ भले न हों, लेकिन राष्ट्र और संविधान बचाने के मुद्दे पर वे एक साथ हैं। केवल यह मुद्दा ही विपक्षी दलों को एक धरातल पर लाने के लिए काफी है। विपक्षी दल इसी डोर को मजबूत करने में जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं एनडीए के खेमे में भी अलग-अलग विचारों को लेकर चलने वाले राजनीतिक दल एक साथ हैं। ऐसे में केवल विपक्षी दलों की एकता के समय विचारधारा की बात खड़ी करना सही नहीं है।

सपा नेता के मुताबिक विपक्ष मजबूत उम्मीदवार के साथ भाजपा को राष्ट्रपति चुनाव में कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, केरल और तमिलनाडु जैसे कई राज्य हैं, जहां भाजपा को कड़ी टक्कर दी जा सकती है। पिछले दो लोकसभा चुनाव में इनमें से कुछ राज्यों में भाजपा ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में इन राज्यों के समीकरण बदल चुके हैं। महंगाई, असुरक्षा के साथ-साथ बढ़ती सांप्रदायिकता के कारण जनता भाजपा से मुक्ति चाहती है और इस नए समीकरण में विपक्ष भाजपा को कड़ी टक्कर देगा।

नेशनल हेराल्ड विवाद किसके पक्ष में?

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार क़ई मामलों में घिर गई है। महंगाई से लेकर सांप्रदायिकता के मुद्दे पर वह देश-विदेश में बदनाम हुई है। सरकार की गलत सोच के कारण देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार पर हमला कर वह इस समय लोगों का ध्यान दूसरी ओर खींचना चाहती है। जनता इस सच्चाई को समझ रही है और यही कारण है कि जनता कांग्रेस के साथ है। वह अगले चुनाव में भाजपा को सबक सिखाने के लिए तैयार है।



वहीं, भाजपा के एक नेता ने कहा कि केंद्र पर ईडी के दुरुपयोग का आरोप लगाना निराधार है। कांग्रेस स्वयं लंबे समय तक केंद्र में रही है। उसे मालूम है कि ईडी बिना किसी ठोस आधार के इस तरह की कार्रवाई शुरू नहीं करती। उन्होंने कहा कि इस विवाद का भाजपा से कुछ लेना देना नहीं है। यदि राहुल गांधी और सोनिया गांधी इस मामले में साफ हैं तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने अपनी बात रखनी चाहिए।

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