फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Nashik man travels 90 km on bus with newborn daughter s body in carry bag hospital did not provide ambulance

इंसानियत शर्मसार: अस्पताल ने नहीं दी एंबुलेंस, बेटी के शव को थैले में रखा; बस से 90 किमी दूर लेकर गया पिता

Mon, 16 Jun 2025 10:16 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 16 Jun 2025 10:16 PM IST
सार

सखाराम ने नासिक सिविल अस्पताल प्रबंधन पर एंबुलेंस देने से इनकार करने का आरोप लगाया। सखाराम का कहना है, वह और उनकी 26 वर्षीय पत्नी अविता दो बच्चों के साथ ठाणे जिले के बदलापुर में ईंट भट्टे पर काम करते थे। समय पर इलाज न मिलने से उनकी नवजात बेटी की मौत हो गई। 

विज्ञापन
Nashik man travels 90 km on bus with newborn daughter s body in carry bag hospital did not provide  ambulance
एंबुलेंस - फोटो : freepik

विस्तार

महाराष्ट्र में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। एक आदिवासी पिता को अपनी मृत बेटी को थैली में डालकर 90 किमी दूर अपने घर ले जाना पड़ा। घटना नासिक जिले की है। कटकरी आदिवासी समुदाय के 28 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर सखाराम का कहना है कि मैंने स्वास्थ्य प्रणाली की लापरवाही और उपेक्षा के कारण पहले अपनी नवजात बच्ची को खो दिया, फिर एंबुलेंस नहीं दिए जाने पर 20 रुपये का थैला खरीदकर उसमें शव रखकर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की बस से 90 किलोमीटर दूर ले गया।  

विज्ञापन

 

ईंट भट्टे पर काम करते है सखाराम
सखाराम ने नासिक सिविल अस्पताल प्रबंधन पर एंबुलेंस देने से इनकार करने का आरोप लगाया। सखाराम का कहना है, वह और उनकी 26 वर्षीय पत्नी अविता दो बच्चों के साथ ठाणे जिले के बदलापुर में ईंट भट्टे पर काम करते थे। 11 जून को अविता को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो सुबह से ही एंबुलेंस के लिए कॉल किया, लेकिन कोई नहीं आया।


ये भी पढ़ें:  FATF: एफएटीएफ ने की पहलगाम हमले की निंदा, आतंकी फंडिंग रोकने को लेकर कही ये बड़ी बात
 
विज्ञापन
विज्ञापन

विरोध करने पर पुलिस ने पीटा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गांव की आशा कार्यकर्ता भी नहीं थी। फिर खोडाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ले जाने के लिए निजी वाहन की व्यवस्था की। अविता ने कहा, पीएचसी पहुंचने के बाद उसे एक घंटे से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा। बाद में उसे मोखदा ग्रामीण अस्पताल में रेफर किया गया। उन्होंने मुझे एक कमरे में अलग कर दिया। मेरे पति ने विरोध किया तो उन्होंने पुलिस को बुलाया, जिसने उन्हें पीटा। 

मोखदा के डॉक्टरों ने भ्रूण की दिल की धड़कन रिकॉर्ड नहीं कर पाने के बाद नासिक सिविल अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी, क्योंकि एंबुलेंस नहीं थी, इसलिए 25 किलोमीटर दूर आसे गांव से एक एंबुलेंस बुलाई गई। उन्होंने बताया कि नासिक में 12 जून को 1:30 बजे मृत बच्ची को जन्म दिया। सुबह अस्पताल ने बच्ची का शव सखाराम को सौंप दिया, लेकिन शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस देने से इनकार कर दिया। सखाराम का कहना है कि, थैले में शव को लेकर जाने पर किसी ने नहीं पूछा कि मैं क्या लेकर जा रहा हूं। उसी दिन शव को गांव में दफना दिया। 13 जून को पत्नी को लाने के लिए भी एंबुलेंस नहीं दी गई। कमजोर अवस्था में पत्नी बस से घर लौटी। सखाराम ने कहा, उन्होंने कोई दवा भी नहीं दी।

विज्ञापन

वापसी की यात्रा के लिए एंबुलेंस की पेशकश की थीः डॉ. भाऊसाहेब
मोखाडा ग्रामीण अस्पताल के डॉ. भाऊसाहेब चत्तर ने घटना के क्रम की पुष्टि की। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, बच्चा गर्भ में ही मर चुका था। हमारे केंद्र की एंबुलेंस खराब हो गई थी, इसलिए हमने आसे से एक एम्बुलेंस मंगवाई। वह वास्तव में बच्चे के शव के साथ बस में यात्रा कर रहा था। चत्तर ने यह भी दावा किया कि अस्पताल ने वापसी की यात्रा के लिए एंबुलेंस की पेशकश की थी, लेकिन सखाराम ने कथित तौर पर इन्कार कर दिया और एक छूट पर हस्ताक्षर किए- कुछ ऐसा, जिससे पिता इन्कार करते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी दंपति को हरसंभव सहायता प्रदान की गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed