{"_id":"650adf0ac66c716d8e099055","slug":"nari-shakti-vandan-bill-will-women-s-reservation-be-implemented-in-2039-due-to-two-conditions-2023-09-20","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नारी शक्ति वंदन विधेयक: क्या 2039 में लागू होगा महिला आरक्षण? इन दो शर्तों का विरोध कर रहे कई विपक्षी दल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
नारी शक्ति वंदन विधेयक: क्या 2039 में लागू होगा महिला आरक्षण? इन दो शर्तों का विरोध कर रहे कई विपक्षी दल
Wed, 20 Sep 2023 05:41 PM IST
जयदेव सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जयदेव सिंह
Updated Wed, 20 Sep 2023 05:41 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
नारी शक्ति वंदन विधेयक
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन विधेयक पर बुधवार को लोकसभा में चर्चा हो रही है। उम्मीद है कि आज यह विधेयक लोकसभा से पास हो जाएगा। इसके बाद राज्यसभा से भी इसके पास होने की उम्मीद जताई जा रही है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून भी बन जाएगा, लेकिन इसके अमल में कई पेंच हैं। कुछ लोग तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि भले यह विधेयक जल्द ही कानून बन जाए, पर इसे लागू होने में अभी 15 साल और लगेंगे।आखिर इस दावे के पीछे क्या वजह है? विधेयक की किन शर्तों की वजह से ऐसा कहा जा रहा है? संविधान के किस अनुच्छेद को इसकी वजह बताया जा रहा है? क्या सच में ऐसा हो सकता है? विशेषज्ञ इसे लेकर क्या कहते हैं? आइये जानते हैं...
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023।
- फोटो :
अमर उजाला
क्यों फंसा यह पेंच?
नारी शक्ति वंदन विधेयक में इसके कानून बनने के बाद इसके प्रभावी होने की दो शर्तें रखी गईं हैं। इसके मुताबिक महिला आरक्षण विधेयक पास होने के बाद होने वाली जनगणना के बाद लागू होगा। कानून बनने के बाद होने वाली जनगणना के बाद आरक्षण लागू करने के लिए नए सिरे से परिसीमन होगा। परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित की जाएंगी। यह महिला आरक्षण 15 साल तक दिया जाएगाा।
नारी शक्ति वंदन विधेयक में इसके कानून बनने के बाद इसके प्रभावी होने की दो शर्तें रखी गईं हैं। इसके मुताबिक महिला आरक्षण विधेयक पास होने के बाद होने वाली जनगणना के बाद लागू होगा। कानून बनने के बाद होने वाली जनगणना के बाद आरक्षण लागू करने के लिए नए सिरे से परिसीमन होगा। परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित की जाएंगी। यह महिला आरक्षण 15 साल तक दिया जाएगाा।
विधेयक पेश करते कानून मंत्री
- फोटो :
सोशल मीडिया
2021 की जनगणना होनी ही है तो 2029 के चुनाव भी तो इसे लागू किया जा सकता है?
विधेयक के प्रावधान के मुताबिक ऐसा नहीं दिखाई देता है। दरअसल, इसमें जो दो शर्तें है उसमें जनगणना के साथ परिसीमन की भी शर्त रखी गई है। संविधान का अनुच्छेद 82 कहता है कि 2026 के बाद जो जनगणना होगी उसके बाद ही लोकसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन होगा। ऐसे में 2026 के बाद 2031 की जनगणना होगी। इसके बाद ही परिसीमन हो सकता है।
आर्टिकल 82 कहता है कि हर जनगणना के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का नए सिरे से परिसीमन होगा। हालांकि, 1971 के बाद लोकसभा सीटों के नए सिरे से परिसीमन पर रोक लगा दी गई। इसमें कहा गया कि 2026 के बाद जो सबसे पहली जनगणना होगी उसके बाद ही पहला परिसीमन किया जाएगा। इससे पहले तक 1971 की जगनणना के आधार पर ही राज्यों की सीटों का कोटा चलता रहेगा।
विधेयक के प्रावधान के मुताबिक ऐसा नहीं दिखाई देता है। दरअसल, इसमें जो दो शर्तें है उसमें जनगणना के साथ परिसीमन की भी शर्त रखी गई है। संविधान का अनुच्छेद 82 कहता है कि 2026 के बाद जो जनगणना होगी उसके बाद ही लोकसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन होगा। ऐसे में 2026 के बाद 2031 की जनगणना होगी। इसके बाद ही परिसीमन हो सकता है।
आर्टिकल 82 कहता है कि हर जनगणना के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का नए सिरे से परिसीमन होगा। हालांकि, 1971 के बाद लोकसभा सीटों के नए सिरे से परिसीमन पर रोक लगा दी गई। इसमें कहा गया कि 2026 के बाद जो सबसे पहली जनगणना होगी उसके बाद ही पहला परिसीमन किया जाएगा। इससे पहले तक 1971 की जगनणना के आधार पर ही राज्यों की सीटों का कोटा चलता रहेगा।
क्या राज्यों की विधानसभाओं में भी ऐसा ही है?
राज्यों की विधानसभा के लिए यह 2001 की जगनणना के आधार पर होता रहेगा। यानी, अगर 2025 या उससे पहले 2021 की जनगणना हो भी जाती है तो भी परिसीमन नहीं हो सकता है। कुल मिलाकर 2031 की जगनणना से पहले परिसीमन नहीं हो सकता है। इस हिलाज से 2031 के जनगणना के बाद इसके आंकड़ें 2032 तक आ सकते हैं।
राज्यों की विधानसभा के लिए यह 2001 की जगनणना के आधार पर होता रहेगा। यानी, अगर 2025 या उससे पहले 2021 की जनगणना हो भी जाती है तो भी परिसीमन नहीं हो सकता है। कुल मिलाकर 2031 की जगनणना से पहले परिसीमन नहीं हो सकता है। इस हिलाज से 2031 के जनगणना के बाद इसके आंकड़ें 2032 तक आ सकते हैं।
census
- फोटो :
istock
2031 की जनगणना हो जाएगी तो 2034 के लोकसभा चुनाव में लागू नहीं होने के पीछे क्या पेंच?
2031 की जनगणना के बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा। आमतौर पर परिसीमन आयोग नया परिसीमन का आंकड़ा जारी करने में तीन से चार साल लेता है। जैसे 2001 की जनगणना के बाद जुलाई 2002 में परिसीमन आयोग का गठन हुआ। यह परिसीमन कार्य 31 मई 2008 को पूरा हुआ। इसके बाद से राज्यों में नए परिसीमन के आधार पर चुनाव हुए। इसी आधार पर विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अगर पिछले अनुभवों के आधार को देखें तो ऐसा हो सकता है कि 2039 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे लागू नहीं किया जा सकता है।
2031 की जनगणना के बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा। आमतौर पर परिसीमन आयोग नया परिसीमन का आंकड़ा जारी करने में तीन से चार साल लेता है। जैसे 2001 की जनगणना के बाद जुलाई 2002 में परिसीमन आयोग का गठन हुआ। यह परिसीमन कार्य 31 मई 2008 को पूरा हुआ। इसके बाद से राज्यों में नए परिसीमन के आधार पर चुनाव हुए। इसी आधार पर विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अगर पिछले अनुभवों के आधार को देखें तो ऐसा हो सकता है कि 2039 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे लागू नहीं किया जा सकता है।
तो क्या 2008 में कांग्रेस द्वारा लाए गए विधेयक में भी यही प्रावधान था?
2008 के महिला आरक्षण विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। अगर विधेयक पास होता तो उसके बाद होने वाले चुनावों में 33 फीसदी सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया जाता।
2008 के महिला आरक्षण विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। अगर विधेयक पास होता तो उसके बाद होने वाले चुनावों में 33 फीसदी सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया जाता।
नारी शक्ति वंदन विधेयक
- फोटो :
AMAR UJALA
इस शर्त को लेकर सत्ता पक्ष का क्या कहना है?
लोकसभा में बोलते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि यह देश संविधान से चलता है। संविधान के अनुच्छेद-82 में कहा गया है कि 2026 तक सभी चीजों को हमने फ्रीज कर दिया है। सरकार इसे तुरंत लागू करती है तो यह तुरंत सुप्रीम कोर्ट में जाएगा और कोर्ट इसे असंवैधानिक करार दे देगी। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक तरीके से लागू करना चाहती है। इस विधेयक को पहले की सरकारों की तरह लॉलीपॉप की तरह घुमाना नहीं चाहती है।
लोकसभा में बोलते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि यह देश संविधान से चलता है। संविधान के अनुच्छेद-82 में कहा गया है कि 2026 तक सभी चीजों को हमने फ्रीज कर दिया है। सरकार इसे तुरंत लागू करती है तो यह तुरंत सुप्रीम कोर्ट में जाएगा और कोर्ट इसे असंवैधानिक करार दे देगी। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक तरीके से लागू करना चाहती है। इस विधेयक को पहले की सरकारों की तरह लॉलीपॉप की तरह घुमाना नहीं चाहती है।