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इशारों में चीन पर निशाना: पीएम मोदी ने 5-जी में सुरक्षा को बड़ी चिंता बताया, राष्ट्राध्यक्षों ने जताई सहमति

Sun, 26 Sep 2021 06:18 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sun, 26 Sep 2021 06:18 PM IST
सार

  • 5-जी तकनीक और इसके दुष्प्रभाव को लेकर भारत ही नहीं दुनिया के तमाम देश चिंतित
  • अफगानिस्तान और आतंकवाद पर दुनिया फिर भ्रम में, नहीं बन पा रही है आम राय

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Narendra Modi targets China Silently said security in 5G is a big concern Latest News Update
पीएम मोदी - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका दौरे के दौरान कई मुद्दों की नींव रख दी है। कूटनीति के शब्दों में कहें तो इस पर बनने वाली इमारत बाद में बुलंद दिखाई देगी। संयुक्त राष्ट्र महासभा के संबोधन, क्वॉड देशों के शिखर सम्मेलन, द्विपक्षीय नेताओं के साथ बैठक, ग्लोबल कोविड-19 समिट समेत सभी मोर्चों पर प्रधानमंत्री अपनी छाप छोड़कर आए हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में बिना चीन का नाम लिए उसे धो दिया है। लोक कहावत में कहें तो चीन के 5-जी कार्यक्रम पर हम बोलकर पड़ोसी देश के मर्म को छेड़ आए हैं। प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में 5-जी नेटवर्क, इससे उपजने वाली सुरक्षा चिंताओं पर दुनिया के देशों का ध्यान आकर्षित किया है।

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विदेश मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में राष्ट्राध्यों ने भी बहुत गंभीरता से लिया है। हालांकि आतंकवाद, अफगानिस्तान और अफगानिस्तान में पाकिस्तान के बढ़ रहे दखल के मामले में दुनिया के देश अभी किसी सर्व सम्मत स्थिति में नहीं आ पा रहे हैं। अमेरिका से लौटे सूत्र भी मानते हैं कि वाशिंगटन के अपने हित हैं। इसी तरह से कुछ देशों के अपने हित हैं। इसके कारण अभी आतंकवाद और अफगानिस्तान पर स्थिति साफ होने में  समय लग सकता है। सूत्रों का कहना है कि अभी भारत की भी पूंछ दबी हुई है। हमें भी अपने नागरिकों को अफगानिस्तान से सुरक्षित निकालना है या आगे के हितों को देखते हुए एक नतीजे पर पहुंचना है।

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....लेकिन 5-जी तो काफी बड़ा मुद्दा है?

  • मोबाइल नेटवर्क पर 5-जी बहुत बड़ा मुद्दा है। भारतीय दूरसंचार के अफसरों की मानें तो इस प्लेटफॉर्म पर आने के लिए भारत में तेजी से तैयारी चल रही है। भारत की टेलीकॉम कंपनी ने भी पूरा जोर लगा रखा है। इसके समानांतर चीन के इंजीनियर और हैकर्स भी अपने अभियान में लगे हैं। चीन के लिए यह आर्थिक क्षेत्र का बहुत बड़ा अवसर माना जा रहा है। इसलिए भारत की निगाह भी 5-जी के हर क्षेत्र पर टिकी हुई है।
  • दरअसल 5-जी तकनीक में गीगा बाइट्स की स्पीड से डेटा ट्रांसफर हो सकेगा। यह भयानक स्पीड ही वित्तीय संस्थानों, सुरक्षा एजेंसियों समेत तमाम क्षेत्रों में घातक हो सकती है। यह चूंकि इलेक्रट्रोमैग्नेटिक तरंगों से जुड़ा मामला है। इसलिए इसके स्वास्थ्य पर भी घातक प्रभाव पडऩे के संकेत हैं। तकनीकी विशेषज्ञ कहते हैं कि अभी तो इसकी सुरक्षा तैयारी की पूरी चिंता अमेरिका के पास भी है। वह भी पूरी तरह से तैयार नहीं हो सका है।

दुनिया के तमाम देश चिंतित

5-जी तकनीक और इसके दुष्प्रभाव को लेकर भारत ही नहीं दुनिया के तमाम देश चिंतित हैं। टेलीकॉम क्षेत्र के तकीनीकी मामलों के विशेषज्ञ और रुड़की के आईआईटियन रवि शर्मा का कहना है कि अगले एक दो साल में 5-जी तकनीक ऑपरेशनल होने की संभावना है। इससे पहले तमाम तैयारियां, परीक्षण जरूरी हैं। इसलिए प्रधानमंत्री ने 5-जी तकनीक को लेकर जो चिंताएं जताई हैं, वह कहीं से भी निराधार नहीं है। इधर, भारत में तमाम पर्यावरण विशेषज्ञ भी इसके दुष्प्रभावों को लेकर काफी चिंतित हैं।

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