पीएम मोदी के 'मन की बात' : अराजकता से युवाओं को नफरत, अव्यवस्था से चिढ़
- पीएम मोदी ने कहा, परिवारवाद, जातिवाद, अपना-पराया, स्त्री-पुरुष जैसे भेदभावों को पसंद नहीं करते युवा
- रेडियो कार्यक्रम को 60वीं बार संबोधित करते हुए कहा, नए साल पर अपने दायित्व पर चिंतन करें और लें संकल्प
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नागरिकता संशोधन कानून पर हुए हिंसक प्रदर्शनों का सीधे तौर पर जिक्र न करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में कहा, एक बात तो पक्की है कि हमारे देश के युवाओं को अराजकता के प्रति नफरत है। अव्यवस्था, अस्थिरता से बड़ी चिढ़ है। परिवारवाद, जातिवाद, अपना-पराया, स्त्री-पुरुष जैसे भेदभावों को पसंद नहीं करते हैं। पीएम ने युवाओं को 12 जनवरी को विवेकानंद जयंती के अवसर पर अपने दायित्वों पर चिंतन करने और नए दशक में संकल्प लेने की भी अपील की।
पीएम ने इस मौके पर देशवासियों को नए साल की शुभकामनाएं भी दीं। पीएम ने रेडियो पर 60वीं बार मन की बात कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, हम सब अनुभव करते हैं कि हमारी ये पीढ़ी बेहद प्रतिभाशाली है। कुछ नया करने का, अलग करने का, उसका ख्वाब रहता है। उसका अपना नजरिया भी होता है। सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि इन दिनों युवा व्यवस्था को पसंद करते हैं।
इतना ही नहीं, वे व्यवस्था का अनुसरण भी करते हैं और कहीं व्यवस्था ठीक तरह से काम नहीं करती है तो वे बेचैन भी हो जाते हैं और हिम्मत के साथ व्यवस्था से सवाल भी करते हैं। कई बार देखा गया है कि एयरपोर्ट पर या सिनेमा हॉल में कोई कतार तोड़ने की कोशिश करता है तो सबसे पहले युवा ही इसका विरोध करते हैं। यह एक नई प्रकार की व्यवस्था, नए प्रकार का युग है। आज भारत को इस पीढ़ी से बहुत उम्मीद है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि मेरा भरोसा युवा पीढ़ी पर है।
युवावस्था का इस्तेमाल कैसे करते हैं, इससे तय होता है आपका भविष्य
मोदी ने कहा, युवावस्था सबसे अहम कालखंड होता है। आपका भविष्य और जीवन इस पर निर्भर करता है कि आप युवावस्था का इस्तेमाल कैसे करते हैं। मुझे विश्वास है कि भारत में यह दशक न केवल युवाओं के विकास का होगा, बल्कि युवाओं का विकास करने वाला साबित होगा। ऐसे युवाओं को आज कई शब्दों से पहचाना जाता है। कोई उन्हें मिलेनियल्स के रूप में जानता है तो कुछ उन्हें जेनेरेशन जेड या तो जेन जेड भी कहते हैं। लोगों के दिमाग में फिट हो गई है कि ये सोशल मीडिया जेनेरेशन है।
स्वदेशी, मिशन आदित्य और कश्मीर की बदलती तस्वीर पर की ‘मन की बात’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया और भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के सूर्य के अध्ययन को लेकर महत्वाकांक्षी मिशन आदित्य और कश्मीर में बदलती सकारात्मक तस्वीर पर भी चर्चा की। पीएम ने रेडियो पर कहा, मैंने लालकिले से 15 अगस्त को देशवासियों को एक बात के लिए आग्रह किया था और मैंने कहा था कि हम देशवासी स्थानीय उत्पादों को खरीदने का आग्रह रखें। आज फिर से मेरा सुझाव है कि हम स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को प्रोत्साहन दें। अपनी खरीदारी में उन्हें प्राथमिकता दें। क्या हम स्थानीय उत्पादों को अपनी प्रतिष्ठा और शान से जोड़ सकते हैं। क्या हम इस भावना के साथ अपने साथी देशवासियों के लिए समृद्धि लाने का माध्यम बन सकते हैं। लोगों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।
पीएम ने स्वदेशी के बारे में उदाहरण देते हुए कहा, उत्तर प्रदेश के फूलपुर में कुछ महिलाओं ने अपनी जीवटता से हर किसी को प्रेरणा दी है। कुछ समय पहले तक फूलपूर की यह महिला गरीबी से परेशान थीं। लेकिन इनमें अपने परिवार को आगे ले जाने का जज्बा था। महिलाओं ने चप्पल बनाने का काम शुरू किया। इससे महिलाओं ने न सिर्फ अपने राह का कांटा दूर किया, बल्कि खुद को आत्मनिर्भर बनाया। लोगों ने महिलाओं से चप्पलें खरीदकर उनकी मदद की।
'सांसदों ने काम करने के तोड़े रिकॉर्ड'
पीएम ने संसद के शीतकालीन सत्र का जिक्र करते हुए कहा, आपने जिन प्रतिनिधियों को चुनकर संसद भेजा है। उन्होंने काम करने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। लोकसभा ने 114 फीसदी काम किया। राज्यसभा ने 95 फीसदी काम किया। सभी सांसद इसके लिए अभिनंदन के हकदार हैं। जिनको आपने चुनकर भेजा है उन्होंने 60 साल के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। बीते बजट सत्र में सांसदों ने संसद में 135 फीसदी काम किया।
सूर्यग्रहण का भी किया जिक्र
पीएम ने बीते 26 दिसंबर को दशक के आखिरी सूर्यग्रहण का जिक्र करते हुए कहा, युवा साथियों की तरह मैं भी सूर्यग्रहण देखने निकला। लेकिन अफसोस की दिल्ली में उस दिन आसमान में बादल छाए हुए थे। हालांकि, टीवी में कोझिकोड और बाकी जगह कुछ अच्छी तस्वीरें देखने को मिलीं। ग्रहण हमें याद दिलाते हैं कि हम पृथ्वी पर रहने के बावजूद अंतरिक्ष में घूम रहे हैं।
भारत में खगोल विज्ञान का प्राचीन और गौरवशाली इतिहास रहा है। आर्यभट्ट ने सूर्यग्रहण के साथ चंद्रग्रहण की व्याख्या की है। केरल में संगमग्राम के माधव ने ग्रहों की गणना करने का काम शुरू किया। 2016 में बेल्जियम के तत्कालीन प्रधानमंत्री और मैंने देवस्थल टेलिस्कोप का उद्घाटन किया था। इसे एशिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट कहा जाता है। सूर्य के अध्ययन के लिए इसरो आदित्य नाम का सैटेलाइट लॉन्च करने वाला है।