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Assam: बटाद्रवा पुलिस थाने में आगजनी केस में चार्जशीट दाखिल, हिरासत में व्यापारी की मौत के बाद भड़की थी हिंसा
Sat, 13 Aug 2022 08:23 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 13 Aug 2022 08:23 PM IST
सार
नगांव की पुलिस अधीक्षक लीना डोले ने बताया कि मामले में शुक्रवार को स्थानीय अदालत में आरोपपत्र दायर किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला पुलिस फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए मुकदमे की सुनवाई का अनुरोध करेगी। एसपी ने कहा कि हमने चार्जशीट में 24 लोगों को नामजद किया है।
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असम पुलिस
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
असम की नगांव जिला पुलिस ने बटाद्रवा पुलिस थाने में आगजनी मामले में चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में 24 लोगों के नाम शामिल हैं। इन 24 लोगों में 11 वो लोग भी हैं जो वर्तमान में पुलिस की हिरासत में हैं। असम पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को इसके बारे में जानकारी दी।
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मामले में पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट
नगांव की पुलिस अधीक्षक लीना डोले ने बताया कि मामले में शुक्रवार को स्थानीय अदालत में आरोपपत्र दायर किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला पुलिस फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए मुकदमे की सुनवाई का अनुरोध करेगी। एसपी ने कहा कि हमने चार्जशीट में 24 लोगों को नामजद किया है। उनमें से 11 हमारी हिरासत में हैं, जिनमें दो किशोर भी शामिल हैं। बाकी लोग फरार हैं, उनकी तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि ये बहुत संवेदनशील मामला है और जिला पुलिस इस मामले में ट्रायल के लिए एक फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए प्रार्थना करेगी।
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क्या था मामला
गौरतलब है कि 21 मई की दोपहर को स्थानीय मछली व्यापारी सफीकुल इस्लाम (39) की पुलिस की हिरासत में मौत के बाद गुस्साई भीड़ ने बटाद्रवा पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी। बता दें कि असम पुलिस ने कथित तौर पर व्यापारी की मौत से एक दिन पहले शाम को मछली व्यापारी शफीकुल को हिरासत में लिया था। उसे उस समय हिरासत में लिया गया था, जब वह शिवसागर के लिए बस पकड़ने जा रहा था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उसे क्यों हिरासत में लिया गया।
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रिहाई के लिए 10 हजार रुपये और बत्तख की मांग
व्यापारी की मौत के बाद परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसकी रिहाई के लिए रिश्वत के तौर पर 10,000 रुपये और एक बत्तख की मांग की थी। व्यापारी की पत्नी सुबह एक बत्तख लेकर थाने गई थी तो उसे पता चला कि उसके पति को नगांव सिविल अस्पताल ले जाया गया है। वहां पहुंचने के बाद व्यापारी की मौत होने की जानकारी मिली। इसके बाद आक्रोशित परिजनों ने पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया।
डीजीपी ने थानाध्यक्ष को किया था निलंबित
पुलिस हिरासत में मौत के बाद डीजीपी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बटाद्रवा थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है। डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने कहा, हम शफीकुल इस्लाम की दुर्भाग्यपूर्ण मौत को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। अगर हमारी ओर से कोई गड़बड़ी हुई है, तो हमारा दोषियों को ढूंढकर उन्हें दंडित करेंगे। असम डीजीपी ने कहा, हमें नहीं लगता कि आगजनी करने वाले मृतकों के शोक संतप्त रिश्तेदार थे। हमारी जानकारी के मुताबिक, मृतक के आपराधिक रिकॉर्ड वाले रिश्तेदारों ने इस घटना को अंजाम दिया है। यह घटना एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी। बाद में इस मामले में एएसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई थी।