हिंदुओं से मिलकर रहना सीखें मुसलमान: मौलाना कल्बे सादिक
- राजनेता-धर्मगुरु देश की दो बड़ी बीमारियां
- अज्ञानता और आपसी टकराव दूर किए बिना तरक्की संभव नहीं
- भारत माता की जय सौ बार कहेंगे लेकिन सियासत करने के लिए नहीं
विस्तार
ऑल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक ने रविवार को जहां राजनेताओं, धर्मगुरुओं पर निशाना साधा, वहीं मुसलमानों में एकजुटता न होने पर चिंता जताई। मौलाना ने कहा कि मुसलमानों को हिंदुओं से सीख लेनी चाहिए। कई वर्ग-जातियों में होने के बावजूद हिंदू आपस में नहीं लड़ते लेकिन मुसलमान सिर्फ दो वर्ग में होने के बावजूद आपस में लड़ते रहते हैं।
उन्होंने मौजूदा हालात को देखते हुए गरीबी, अज्ञानता और आपसी टकराव दूर करने का संदेश दिया। वाराणसी के दरगाहे फातमान परिसर में पत्रकारों से बातचीत में मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि हमारा देश बहुत प्यारा है लेकिन इसमें बीमारियां बहुत हैं। पहली बीमारी हैं धर्म गुरु और दूसरी राजनेता। नेता देशभक्त नहीं, ‘पोजीशन भक्त’ हो गए हैं। इसी तरह धर्म गुरु भी धर्म का इस्तेमाल निजी स्वार्थ के लिए करने लगे हैं। जब तक दोनों ठीक नहीं होंगे, देश ठीक नहीं होगा।
जब उनसे पूछा गया कि वह खुद भी धर्म गुरु हैं ऐसे में अपने आप को लेकर असहज महसूस नहीं करते? इस सवाल पर उनका कहना था कि मुझे जब कोई मौलाना लिखता है तो चिढ़ होती है। उन्होंने चुटकी लेते हुए धर्मगुरुओं का हाल बताया। कहा कि आसाराम बापू जेल में हैं और मौलाना बुखारी को बुखार हो गया है।
'भारत माता की जय हम सौ बार बोलेंगे'
मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि अज्ञानता दूर होगी तभी तरक्की होगी। कहा कि उन्होंने कहा कि जितना पैसा नेताओं के पास है उतना किसी के पास नहीं है। ऐसे नेता कभी देशभक्त नहीं हो सकते।
मुसलमानों के भारत माता के जयकारे न लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत माता की जय हम सौ बार बोलेंगे लेकिन इस पर कोई सियासत करे, यह हमारा मकसद नहीं। वैसे भी अरबी में माता को दोयम दर्जे का माना गया है, इसलिए अगर मुसलमान भारत माता नहीं कह सकते तो अम्मी कहें।
कश्मीर में सेना की ओर से पैलट गन के इस्तेमाल को उन्होंने अनुचित ठहराया। अखिलेश सरकार के मंत्री आजम खां के गंगाजल से वजू करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि गंगा पर सियासत नहीं होनी चाहिए। गंगा हिंदू-मुसलमान दोनों की है।