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हिजाब विवाद: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने फैसले का किया स्वागत, सत्यदेव जयते का किया उद्घोष 

Tue, 15 Mar 2022 09:39 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 15 Mar 2022 09:39 PM IST
सार

एमआरएम ने कहा कि जो लोग भी हिंदुस्तान की फिजा में फूट डालो और गंदी राजनीति करो के तर्ज पर जहर फैला रहे हैं, उनपर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 

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Muslim rashtriya manch welcomes Karnataka HC verdict on Hijab row
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने हिजाब के मुद्दे पर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। साथ ही मंच ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि चंद अराजक तत्व और छोटी सोच के नेता अपने निजी फायदे के लिए बच्चों का इस्तेमाल करने से बाज आएं। एमआरएम ने कहा कि जो लोग भी हिंदुस्तान की फिजा में फूट डालो और गंदी राजनीति करो के तर्ज पर जहर फैला रहे हैं, उनपर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। 

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स्कूल-कॉलेज में छात्र यूनिफॉर्म पहनने से मना नहीं कर सकते
फैसले पर हर्ष जताते हुए मंच के राष्ट्रीय संयोजक माजिद तालिकोटि, शाहिद अख्तर, विराग पचपोर, मोहम्मद अफजाल और गिरीश जुयाल ने एक साथ मिल कर उद्घोष किया...सत्यमेव जयते। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि स्कूल-कॉलेज में छात्र यूनिफॉर्म पहनने से मना नहीं कर सकते हैं। संयोजकों ने कहा कि बात सिर्फ स्कूल कॉलेज की ही नहीं है, यदि किसी भी छात्रा की भारतीय सेना, वायुसेना या इस प्रकार के किसी भी स्थान पर नौकरी होती है तो ऐसे में हिजाब और नकाब में नौकरी करने की जिद कोई कैसे कर सकता है? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नियम कानून का पालन करना ही व्यवहारिक और अच्छे नागरिक की पहचान होती है। 
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सद्भावना और भाईचारे को दीमक लगाना चाहते हैं कुछ लोग
मीडिया प्रभारी शाहिद सईद ने कोर्ट की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कांग्रेस और पीएफआई के जो लोग हिजाब का राजनीतिकरण कर रहे थे और लोगों के दिमाग में जहर घोल रहे थे, उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले से जवाब दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मानसिक दिवालियापन के शिकार लोग देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता, सद्भावना और भाईचारे को दीमक लगाना चाहते हैं। जबकि मुस्लिम पर्सनल बोर्ड और तथाकथित उलेमाओं और मौलानाओं को यह समझना चाहिए की तुष्टिकरण और भेदभाव का समय अब निकल चुका है। उन्हें समाज में आगे बढ़ कर तालीम, तरक्की और रोजगार पर ध्यान देना चाहिए न कि अशिक्षा, अज्ञानता और अराजकता का रास्ता अपनाना चाहिए। 
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एमआरएम महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय संयोजिका शालिनी अली और बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक बिलाल उर रहमान ने कहा कि इस्लाम में यह कहीं नहीं कहा गया है कि नकाब या हिजाब लगाएं। दोनों ने यह स्पष्ट किया की हर स्थान का अपना ड्रेस कोड होता है और उसको मानना उस स्थान से जुड़े सभी लोगों का कर्तव्य होता है। इस्लाम यह कहीं नहीं सिखाता है कि आप अपनी मर्जी से किसी भी स्थान या संस्थान का कानून तोड़ें। मदरसा बोर्ड के चेयरमैन बिलाल ने कहा कि बच्चे जब मदरसों में पढ़ते हैं तो कुछ और ड्रेस कोड होता है और जब स्कूलों में तालीम लेते हैं तो वहां का अपना अलग ड्रेस कोड होता है। इस अनुशासन को निभाना चाहिए क्योंकि किसी भी सभ्य समाज और अच्छे नागरिक की यही पहचान होती है।

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