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Murder Trial: पूर्व सांसद की दलीलों की ऑडियो रिकॉर्डिंग की मांग खारिज, कोर्ट ने कहा- अभी नहीं है कोई नियम
Wed, 17 Sep 2025 09:03 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 17 Sep 2025 09:03 PM IST
सार
कोर्ट के इस आदेश के बाद अब पद्मसिंह पाटिल को अपने अंतिम तर्क बिना किसी रिकॉर्डिंग के ही पेश करने होंगे। कोर्ट का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी और नियंत्रित रखने के लिए अहम माना जा रहा है, खासकर तब जब ट्रायल कोर्ट में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के नियमों पर अभी चर्चा जारी है।
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पूर्व सांसद पद्मसिंह पाटिल
- फोटो : facebook.com/DrPadmasinhaPatil
विस्तार
मुंबई की एक विशेष अदालत ने डबल मर्डर केस में आरोपी पूर्व सांसद पद्मसिंह पाटिल को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पाटिल को अपने अंतिम तर्कों (फाइनल आर्ग्युमेंट्स) की ऑडियो रिकॉर्डिंग करने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत का कहना है कि अभी तक ट्रायल कोर्ट में ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए कोई नियम नहीं बनाए गए हैं, इसलिए निजी तौर पर रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह आदेश विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण नवांडे ने मंगलवार को दिया। यह अदालत खास तौर पर सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है।
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क्या है पूरा मामला?
पद्मसिंह पाटिल पर कांग्रेस नेता पवनराजे निम्बालकर और उनके ड्राइवर की हत्या का आरोप है। यह डबल मर्डर 3 जून, 2006 को हुआ था। पवनराजे और उनके ड्राइवर की नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। फिलहाल केस अंतिम दलीलों के चरण में है।
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क्या थी पाटिल की मांग?
पद्मसिंग पाटिल ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उन्हें अपने मौखिक तर्कों की ऑडियो रिकॉर्डिंग करने दी जाए। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्डिंग सिर्फ लिखित तर्कों की तैयारी और संकलन के लिए होगी। सीबीआई ने इस मांग का विरोध किया और कहा कि ऐसा करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने क्यों खारिज की मांग?
कोर्ट ने कहा कि, अभी तक न तो बॉम्बे हाई कोर्ट और न ही राज्य सरकार ने ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर कोई नियम बनाए हैं। क्रिमिनल मैनुअल और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में भी ट्रायल कोर्ट में निजी रिकॉर्डिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। भविष्य में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही लाइव स्ट्रीमिंग करने पर विचार जरूर चल रहा है, लेकिन अभी ऐसी कोई सुविधा मौजूद नहीं है। न्यायाधीश नवांडे ने स्पष्ट किया कि जब तक उचित नियम और तकनीकी सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तब तक किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह वकील ही क्यों न हो, ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यह भी पढ़ें - Maharashtra: मराठवाड़ा-विदर्भ में फसलों का संकट, कांग्रेस नेता ने सरकार से ‘भीगा अकाल’ घोषित करने की अपील की
बिना इजाजत रिकॉर्डिंग पर नाराजगी
इसके साथ कोर्ट ने यह भी खुलासा किया कि पिछली सुनवाई में किसी ने बिना अनुमति ऑडियो रिकॉर्डिंग की थी। न्यायाधीश ने इसे अनैतिक और गैरकानूनी करार दिया और वकीलों से ऐसी हरकतें न करने की सख्त हिदायत दी। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई पक्ष इस तरह की रिकॉर्डिंग को किसी भी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पद्मसिंह पाटिल महाराष्ट्र के उस्मानाबाद से सात बार विधायक रह चुके हैं। वह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के सौतेले भाई हैं।
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क्या है पूरा मामला?
पद्मसिंह पाटिल पर कांग्रेस नेता पवनराजे निम्बालकर और उनके ड्राइवर की हत्या का आरोप है। यह डबल मर्डर 3 जून, 2006 को हुआ था। पवनराजे और उनके ड्राइवर की नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। फिलहाल केस अंतिम दलीलों के चरण में है।
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क्या थी पाटिल की मांग?
पद्मसिंग पाटिल ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उन्हें अपने मौखिक तर्कों की ऑडियो रिकॉर्डिंग करने दी जाए। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्डिंग सिर्फ लिखित तर्कों की तैयारी और संकलन के लिए होगी। सीबीआई ने इस मांग का विरोध किया और कहा कि ऐसा करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने क्यों खारिज की मांग?
कोर्ट ने कहा कि, अभी तक न तो बॉम्बे हाई कोर्ट और न ही राज्य सरकार ने ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर कोई नियम बनाए हैं। क्रिमिनल मैनुअल और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में भी ट्रायल कोर्ट में निजी रिकॉर्डिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। भविष्य में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही लाइव स्ट्रीमिंग करने पर विचार जरूर चल रहा है, लेकिन अभी ऐसी कोई सुविधा मौजूद नहीं है। न्यायाधीश नवांडे ने स्पष्ट किया कि जब तक उचित नियम और तकनीकी सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तब तक किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह वकील ही क्यों न हो, ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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बिना इजाजत रिकॉर्डिंग पर नाराजगी
इसके साथ कोर्ट ने यह भी खुलासा किया कि पिछली सुनवाई में किसी ने बिना अनुमति ऑडियो रिकॉर्डिंग की थी। न्यायाधीश ने इसे अनैतिक और गैरकानूनी करार दिया और वकीलों से ऐसी हरकतें न करने की सख्त हिदायत दी। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई पक्ष इस तरह की रिकॉर्डिंग को किसी भी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पद्मसिंह पाटिल महाराष्ट्र के उस्मानाबाद से सात बार विधायक रह चुके हैं। वह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के सौतेले भाई हैं।