मुंबई: भाजपा विधायक का आरोप, शिवसेना 2022 में होने वाले बीएमसी चुनाव को टालने की साजिश रच रही है
- बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव को लेकर भाजपा ने शिवसेना पर लगाए गंभीर आरोप।
- भाजपा विधायक आशीष शेलार ने कहा, शिवसेना महामारी की स्थिति और तीसरी लहर की आशंका का हवाला देकर चुनाव को स्थगित करने की साजिश रच रही है।
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मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच तकरार की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मुंबई के मेयर किशोरी पेडनेकर ने कहा है कि 'अगर कोविड-19 की स्थिति नियंत्रण में रही, तो बीएमसी चुनाव अगले साल जनवरी-फरवरी में कराए जाएंगे, अगर ऐसा नहीं होता है तो चुनाव स्थगित कर दिए जाएंगे।'
BMC polls will be conducted next year in January-February if the COVID situation is under control, in case it's not, polls will be postponed: Mumbai Mayor Kishori Pednekar#Maharashtra pic.twitter.com/vWzvqXeLRw
— ANI (@ANI) June 1, 2021
वहीं मुंबई के मेयर किशोरी पेडनेकर से जब बीएमसी से विदेश जाने वाले छात्रों के लिए टीकाकरण की अनुमति देने और दूसरी खुराक के लिए अंतर बढ़ाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 'टीकाकरण कार्यक्रम केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करता है। हमारे मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) संबंधित विभागों से बात करेंगे और उसी के अनुसार समाधान लाया जाएगा।'
मेयर किशोरी पेडनेकर के बयान के बाद महाराष्ट्र भाजपा नेता आशीष शेलार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ शिवसेना महामारी की स्थिति और तीसरी लहर की आशंका का हवाला देकर अगले साल फरवरी में होने वाले मुंबई नगर निकाय के चुनावों को स्थगित करने की साजिश रच रही है।
शेलार ने यह भी आरोप लगाया कि शिवसेना बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के वर्तमान शासी निकाय को विस्तार दिलाने की कोशिश कर रही है ताकि वह सीवेज शोधन संयंत्र स्थापित करने के लिए जारी होने वाले 20,000 करोड़ रुपये के टेंडर में ‘कट मनी’ (कमीशन) हासिल कर सके।
उन्होंने आरोप लगाया, 'कोविड-19 के हालात और महामारी की तीसरी लहर की आशंका की आड़ में शिवसेना बीएमसी चुनाव टालने की साजिश कर रही है। यदि शिवसेना की मांग को स्वीकार किया जाता है, तो हम मांग करेंगे कि बीएमसी शासी निकाय कार्यकाल विस्तार के दौरान नई निविदाएं जारी नहीं करे या उन्हें मंजूरी नहीं दे।
बांद्रा के विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि शिवसेना की निगरानी में निविदा के लिए ‘कट मनी’ (कमीशन) चलती है। शिवसेना करीब तीन दशक से बीएमसी पर शासन कर रही है।
उन्होंने कहा, 'भाजपा बीएमसी की मौजूदा शासी निकाय को विस्तार देने के खिलाफ है। शिवसेना और भाजपा महाराष्ट्र में 2014-2019 तक साझेदार रहे लेकिन दोनों दलों ने फरवरी 2017 में हुए बीएमसी के चुनाव अलग अलग लड़े। बीएससी की 227 सीटों में से शिवसेना के 97 पार्षद हैं जबकि भाजपा के सदस्यों की संख्या 83 है।