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बेस्ट कर्मचारियों की हड़ताल पर लगी रोक: औद्योगिक अदालत ने दिया अंतरिम आदेश, सरकार ने लगाया मेस्मा

Fri, 19 Jun 2026 01:47 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 19 Jun 2026 01:47 AM IST
सार

बेस्ट कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल पर अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने मेस्मा लागू कर इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया है। कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल की तैयारी में थे। बेस्ट मुंबई की बड़ी सार्वजनिक परिवहन और बिजली आपूर्ति सेवा है। विस्तार से पढ़िए रिपोर्ट-

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Mumbai: BEST unions announce strike; undertaking gets restraining order from court
बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)

विस्तार

बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन (बेस्ट) उपक्रम ने गुरुवार शाम कहा कि उसने औद्योगिक अदालत से एक अंतरिम आदेश हासिल कर लिया है, जिसमें उसके कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने से रोक दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने भी हड़ताल पर रोक लगाने के लिए महाराष्ट्र आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (मेस्मा) लागू कर दिया है।
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इससे पहले दिन में बेस्ट संयुक्त कामगार कृती समिति ने दादर में आयोजित एक सभा में घोषणा की थी कि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर तय समय-सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारी आधी रात से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। बेस्ट संयुक्त कामगार कृती समिति 12 संगठनों का संयुक्त मंच है।
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बेस्ट मुंबई की दूसरी सबसे बड़ी परिवहन सेवा
उपनगरीय रेल नेटवर्क के बाद बेस्ट मुंबई की दूसरी सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन सेवा है। बस सेवा चलाने के अलावा, यह दक्षिण मुंबई में 10 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली भी उपलब्ध कराती है। बेस्ट की बसों से हर दिन करीब 25 लाख यात्री सफर करते हैं। फिलहाल बेस्ट के पास करीब 2,700 बसों का बेड़ा है। इनमें से केवल 243 बसें बेस्ट की अपनी हैं। जबकि बाकी बसें निजी ऑपरेटरों से वेट-लीज आधार पर ली गई हैं।
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क्या मांगें हैं?
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में बेस्ट के बजट का बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के बजट में विलय, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कानूनी बकाये का एकमुश्त निपटारा, वर्ष 2016 से 2026 की अवधि के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना, परिवहन और बिजली विभाग में संविदा व्यवस्था समाप्त करना और वेट-लीज बस कर्मचारियों को बेस्ट में समायोजित करना शामिल है।

समिति ने रिक्त पदों पर भर्ती, बेस्ट के स्वामित्व में छह हजार बसों का संचालन, पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति तथा उपक्रम में निजीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को ठुकराने की भी मांग की है।

बेस्ट के प्रवक्ता ने क्या कहा?
हड़ताल की घोषणा के बाद बेस्ट उपक्रम ने औद्योगिक अदालत का रुख किया। बेस्ट के एक प्रवक्ता ने बताया कि अदालत ने अंतरिम आदेश में कर्मचारी यूनियनों को हड़ताल पर जाने से रोक दिया है। उन्होंने कहा, माननीय औद्योगिक अदालत ने आज शाम बेस्ट के पक्ष में अंतरिम आदेश पारित किया है। 

पुलिस ने क्या चेतावनी दी?
इस बीच, मुंबई पुलिस ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में बाधा डालने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार ने महाराष्ट्र आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (मेस्मा) लागू कर दिया है, जिससे यह आंदोलन (हड़ताल) गैरकानूनी हो गया है। पुलिस की एडवाइजरी में कहा गया है कि प्रदर्शनकारी बेस्ट की बसों और परिसंपत्तियों को नुकसान न पहुंचाएं और न ही ड्यूटी पर आने के इच्छुक कर्मचारियों को रोकें।

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दो संगठनों ने हड़ताल से बनाई दूरी
बेस्ट कर्मचारियों के एक वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली श्रमिक उत्कर्ष सभा और बेस्ट कामगार यूनियन ने खुद को हड़ताल से अलग कर लिया है। गुरुवार रात जारी एक बयान में श्रमिक उत्कर्ष सभा ने कहा कि उससे और बेस्ट कामगार यूनियन से जुड़े कर्मचारी 19 जून को मुंबई में प्रस्तावित विरोध मार्च में हिस्सा नहीं लेंगे।

इन यूनियनों का प्रतिनिधित्व सत्तारूढ़ भाजपा के नेता प्रसाद लाड और शशांक राव करते हैं। बयान में कहा गया कि बेस्ट कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रशासन और राज्य सरकार के साथ बातचीत जारी है। दोनों यूनियनों ने आंदोलन से दूर रहने का फैसला किया है, क्योंकि कर्मचारियों की समस्याओं को बातचीत के जरिये सुलझाने की कोशिश की जा रही है।

 
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