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Bullet Train Project: समंदर के नीचे सुरंग का अश्विनी वैष्णव ने लिया जायजा, कहा- आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
Sat, 18 Jan 2025 07:59 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई / ठाणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई / ठाणे
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 18 Jan 2025 07:59 PM IST
सार
केंद्रीय मंत्री ने टिप्पणी की कि मध्यम वर्ग के लिए एक किफायती, कुशल परिवहन मोड प्रदान करने का प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का सपना धीरे-धीरे साकार हो रहा है। देश में पहली बार हाई स्पीड रेल मार्ग के पूरा होने से मुंबई और अहमदाबाद समेत मार्ग के शहरों की अर्थव्यवस्थाओं का एकीकरण होगा और शहरी विकास को बहुत बढ़ावा मिलेगा।
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समंदर के नीचे सुरंग के काम का अश्विनी वैष्णव ने किया निरीक्षण
- फोटो : PTI
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विस्तार
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की समंदर के नीचे सुरंग के काम का निरीक्षण किया और इस मेगा मल्टी-बिलियन डॉलर परियोजना पर 'अच्छी प्रगति' पर संतोष व्यक्त किया। बता दें कि, 21 किलोमीटर लंबी सुरंग, जिसमें ठाणे क्रीक के नीचे 7 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्टेशन को शिलफाटा से जोड़ेगी। समंदर के नीचे सुरंग देश में अपनी तरह की पहली सुरंग है।
'250 किमी प्रति घंटे की गति से गुजर सकती हैं दो ट्रेनें'
नवी मुंबई के घनसोली में साइट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि समंदर के नीचे सुरंग को बहुत सावधानी से डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण किया जा रहा है। 'इस सुरंग के डिजाइन और इस्तेमाल की जा रही तकनीक से दो ट्रेनें 250 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गुजर सकती हैं। वेंटिलेशन और लाइटिंग के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। परियोजना के 340 किलोमीटर हिस्से पर निर्माण अच्छी प्रगति पर है'।
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'250 किमी प्रति घंटे की गति से गुजर सकती हैं दो ट्रेनें'
नवी मुंबई के घनसोली में साइट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि समंदर के नीचे सुरंग को बहुत सावधानी से डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण किया जा रहा है। 'इस सुरंग के डिजाइन और इस्तेमाल की जा रही तकनीक से दो ट्रेनें 250 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गुजर सकती हैं। वेंटिलेशन और लाइटिंग के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। परियोजना के 340 किलोमीटर हिस्से पर निर्माण अच्छी प्रगति पर है'।
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समंदर के नीचे सुरंग का अश्विनी वैष्णव ने लिया जायजा
- फोटो : PTI
'बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में स्टेशन एक इंजीनियरिंग चमत्कार'
उन्होंने कहा कि कोलकाता मेट्रो की नदी के नीचे की सुरंग की तुलना में समुद्र के नीचे की सुरंग में ट्रेनें बहुत अधिक गति से गुजर सकती हैं। 'परियोजना में नदियों पर पुल निर्माण और स्टेशन के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण प्रगति देखी जा रही है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में स्टेशन एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जिसमें 10 भूमिगत मंजिलों और सात ऊपर की मंजिलों की विशेषता वाला एक अनूठा डिजाइन है। हाई-स्पीड रेल परियोजना तय समय पर चल रही है, जापानी विशेषज्ञ चल रहे काम का निरीक्षण और अनुमोदन कर रहे हैं'।
उन्होंने कहा कि कोलकाता मेट्रो की नदी के नीचे की सुरंग की तुलना में समुद्र के नीचे की सुरंग में ट्रेनें बहुत अधिक गति से गुजर सकती हैं। 'परियोजना में नदियों पर पुल निर्माण और स्टेशन के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण प्रगति देखी जा रही है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में स्टेशन एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जिसमें 10 भूमिगत मंजिलों और सात ऊपर की मंजिलों की विशेषता वाला एक अनूठा डिजाइन है। हाई-स्पीड रेल परियोजना तय समय पर चल रही है, जापानी विशेषज्ञ चल रहे काम का निरीक्षण और अनुमोदन कर रहे हैं'।
समंदर के नीचे सुरंग का अश्विनी वैष्णव ने लिया जायजा
- फोटो : PTI
'भारत के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास को बढ़ावा'
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि, 'कॉरिडोर के साथ स्टेशन शहरी विकास को बढ़ावा देंगे और यात्रा के समय को काफी कम करके दैनिक यात्रियों की उत्पादकता बढ़ाएंगे। हाई-स्पीड ट्रेन को एक परिवहन परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के एकीकरण के रूप में देखें। वैष्णव ने कहा, "इससे भारत के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।' उन्होंने भारतीय इंजीनियरों के प्रयासों की सराहना की, जिनकी विशेषज्ञता ने परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि, 'कॉरिडोर के साथ स्टेशन शहरी विकास को बढ़ावा देंगे और यात्रा के समय को काफी कम करके दैनिक यात्रियों की उत्पादकता बढ़ाएंगे। हाई-स्पीड ट्रेन को एक परिवहन परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के एकीकरण के रूप में देखें। वैष्णव ने कहा, "इससे भारत के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।' उन्होंने भारतीय इंजीनियरों के प्रयासों की सराहना की, जिनकी विशेषज्ञता ने परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर
- फोटो : PTI
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन मार्ग 508 किलोमीटर लंबा है, जिसमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर (महाराष्ट्र में), वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती (गुजरात में) में 12 स्टेशन हैं। 1.08 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस परियोजना का मुख्य आकर्षण 21 किलोमीटर लंबी समुद्र के नीचे सुरंग है। अधिकारियों ने कहा कि यह एक सिंगल ट्यूब सुरंग होगी, जिसमें दो ट्रैक होंगे। सुरंग से सटे 37 स्थानों पर 39 उपकरण कक्ष बनाए जा रहे हैं। मुंबई-अहमदाबाद एचएसआर परियोजना को जापानी रेलवे के सहयोग से डिजाइन किया गया है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन मार्ग 508 किलोमीटर लंबा है, जिसमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर (महाराष्ट्र में), वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती (गुजरात में) में 12 स्टेशन हैं। 1.08 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस परियोजना का मुख्य आकर्षण 21 किलोमीटर लंबी समुद्र के नीचे सुरंग है। अधिकारियों ने कहा कि यह एक सिंगल ट्यूब सुरंग होगी, जिसमें दो ट्रैक होंगे। सुरंग से सटे 37 स्थानों पर 39 उपकरण कक्ष बनाए जा रहे हैं। मुंबई-अहमदाबाद एचएसआर परियोजना को जापानी रेलवे के सहयोग से डिजाइन किया गया है।