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मुलायम परिवार को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

Mon, 19 Sep 2016 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 19 Sep 2016 11:44 PM IST
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Mulayam and family great relief from the Supreme Court
मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala

समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति मामले की सीबीआई जांच को लेकर किसी तरह का आदेश देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने सीबीआई से स्टेटस रिपोर्ट तलब करने की गुहार भी ठुकरा दी है।

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न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी द्वारा उठाए गए मसलों को वर्ष 2012 के आदेश में ही सुलझा दिया था। वर्ष 2012 में शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि जांच के आधार पर सीबीआई अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
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सीबीआई को कहा गया था कि अगर जांच के क्रम में उसे लगे कि कार्रवाई होनी चाहिए तो वह अपने विवेक से निर्णय ले सकती है। मुलायम और अखिलेश के लिए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और गौरव भाटिया पेश हुए। याचिकाकर्ता का कहना था कि उनके आवेदनों पर काफी पहले फैसला सुरक्षित रखा गया था, लेकिन अब तक आदेश पारित नहीं किए गए।

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2012 में अदालत ने डिंपल यादव पर लगे आरोपों को निरस्त कर दिया था

Mulayam and family great relief from the Supreme Court
डिंपल यादव

मालूम हो कि विश्वनाथ चतुर्वेदी ने ही जनहित याचिका दाखिल कर मुलायम, अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल यादव पर आय से अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप लगाते हुए जांच की गुहार लगाई थी। जिस पर अदालत ने वर्ष 2007 में सीबीआई को मामले की जांच करने और केंद्र सरकार को जांच रिपोर्ट देने को कहा था।

इस आदेश को यादव परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। वर्ष 2012 में अदालत ने डिंपल यादव पर लगे आरोपों को निरस्त कर दिया था, लेकिन मुलायम और अखिलेश के खिलाफ जांच जारी रखने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने पीठ ने कहा कि सीबीआई से स्टेटस रिपोर्ट मंगवाई जाए।

साथ ही उन्होंने कहा कि हमें इस बारे में जानकारी नहीं है कि एफआईआर दर्ज की गई या नहीं। क्लोजर रिपोर्ट फाइल की गई या नहीं इसकी भी जानकारी नहीं है। पीठ ने कहा कि आपकी याचिका में उठाए गए सवालों का जवाब हमारे फैसले में दे दिया गया है, इसलिए इन याचिकाओं का कोई मतलब नहीं।

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