फिल्म नहीं, समाज के लिए संदेश है ब्लू माउंटेंस
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अगले शुक्रवार यानी 7 अप्रैल को रिलीज होने वाली ग्रेसी सिंह-रणवीर शौरी अभिनीत ब्लू माउंटेंस महज एक फिल्म नहीं बल्कि एक संदेश है। ऐसा संदेश, जो इस तनावपूर्ण माहौल और हर पल आगे आने की होड़ के बीच बच्चों की जिंदगी बदल सकता है। यह कहना है दिल्ली के जाने माने हस्तशिल्प निर्यातक और ब्लू माउंटेंस के निर्माता राजेश जैन का। राजेश कहते हैं, 'जब मुझे फिल्म के निर्देशक सुमन गांगुली ने कहानी सुनाई तभी मुझे लगा कि इस फिल्म को दर्शकों के बीच जाना चाहिए। हालांकि, बच्चों पर केंद्रित फिल्म को बॉक्स ऑफिस के मुफीद नहीं माना जाता लेकिन मुझे लगा कि अगर इतनी बेहतर कहानी को दर्शकों तक नहीं पहुंचाया गया तो यह उनके साथ भी अन्याय होगा।'
फिल्म की अभिनेत्री ग्रेसी सिंह ब्लू माउंटेंस के बारे में कहती हैं 'मैंने जितनी भी फिल्म की हैं, ये उनमें सबसे हटकर है। और यह फिल्म मुझे लगान और मुन्नाभाई एमबीबीएस की याद दिलाती है, जो मनोरंजक होते हुए एक मैसेज देने में कामयाब रही।'
फिल्म के निर्देशक सुमन गांगुली कहते हैं- आज की तनावपूर्ण जिंदगी में हर बच्चे से मां-बाप ने इतनी उम्मीदें लगा रखी हैं कि कामयाबी से कम उसे कुछ मंजूर नहीं। लेकिन-कामयाबी एक सतत प्रक्रिया है। ब्लू माउंटेंस का आइडिया मेरे दिमाग में काफी पहले आया था, लेकिन मैं इसे बहुत छोटे स्तर पर नहीं बनाना चाहता था। इसलिए थोड़ा वक्त लगा। मैं खुश हूं कि हमने जो मेहनत की-अब वो दर्शकों को दिखायी देगी।
निर्देशक सुमन गंगुली की यह पहली फिल्म है, लेकिन फेस्टिवल सर्किट में इस फिल्म ने खासा नाम कमाया है। अलग अलग फेस्टिवल्स में ब्लू माउंटेंस ने कई अवॉर्ड जीते हैं। फिल्म ने 19वें अंतरराष्ट्रीय चिल्ड्रन फिल्म उत्सव में बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार हासिल किया, चौथे फेस्टिवल मेनशन अवॉर्ड समारोह में स्पेशल फेस्टिवल मेनशन और शिमला में हुए दूसरे अंतरराष्ट्रीय समारोह में स्पेशल जूरी अवॉर्ड मिला। नासिक में हुए 8वे अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव में बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड सुमन गांगुली को मिला, फिल्म को हरियाणा में हुए पहले अंतराष्ट्रीय फिल्म उत्सव में बेस्ट चिल्ड्रन फिल्म का अवॉर्ड भी मिला।
फिल्म 'ब्लू माउंटेंस' एक युवा की कहानी है जो रिएलिटी शो के ज़रिए अचानक स्टार बन जाता है और जब विफलता हाथ लगती है तो वो डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। लेकिन किसी शो या इम्तिहान में फेल हो जाना जिंदगी में फेल हो जाना नहीं है, फिल्म यही संदेश देती है। फिल्म जिस वक्त आ रही है, उस वक्त कई स्कूलों में छुट्टियां है तो निर्माता को उम्मीद है कि छोटे बजट की होने के बावजूद फिल्म टिकट खिड़की पर अच्छा बिजनेस करेगी।