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मुरादाबाद में हुई थी दुनिया की अब तक की सबसे घातक ओलावृष्टि

Sun, 21 May 2017 01:07 AM IST
amarujala.com, Presented By: पवन नाहर
amarujala.com, Presented By: पवन नाहर Updated Sun, 21 May 2017 01:07 AM IST
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Most Dangerous Hail was In Moradabad
ओलावृष्टि (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pintrest
संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण एजेंसी ने 1888 में भारत के मुरादाबाद में हुई ओलावृष्टि को अब तक की सबसे खतरनाक ओलावृष्टि माना है। इस ओलावृष्टि में 246 लोगों की मौत हो गई थी। 
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यह पहली बार है जब विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने मौसम और जलवायु के आंकड़ों से आगे बढ़कर तापमान और मौसम के आंकड़ों का प्रयोग किसी विशेष आपदा को चिह्नित करने के लिए किया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव पेट्री तलास ने बताया कि अत्यधिक खराब मौसम के चलते काफी नुकसान होता है और कई लोगों की मौत भी हो जाती है। पेट्री के मुताबिक ऐसी आपदाओं से बचने के लिए हमें पहले हो चुकी इन विध्वंशक मौसमी आपदाओं की विकरालता को जानना होगा। जिससे भविष्य में होने वाली ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए सबक मिल सके।
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इसी आधार पर डब्ल्यूएमओ की विशेषज्ञ समिति ने जांच कर पांच विशिष्ट प्रकार प्राकृतिक आपदाओं से हुई मौतों के आंकड़े जुटाए। विशेषज्ञों के मुताबिक पूर्वी पाकिस्तान में साल 1970 में आए तूफानी चक्रवात के कारण लगभग तीन लाख लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 1989 में बांग्लादेश में आए टारनेडो ने 1300 लोगों की जान ले ली थी और मानिकगंज जिले का तबाह कर दिया था। इसी प्रकार 1994 में मिस्त्र के द्रोनका में एक तेल के टैंक में बिजली गिरने से 469 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि मनिका ट्राइबल ट्रस्ट लैंड (तब रोडेसिया) में एक झोपड़ी में मात्र एक बिजली गिरने से ही 21 लोग मौत के मुंह में समा गए थे।
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डब्ल्यू एम ओ की रिपोर्ट मे कहा गया है कि, यह घटनाएं विभिन्न प्रकार के खराब मौसम के चलते हुई घातक त्रासदियों पर प्रकाश डालती हैं। इन ऐतिहासिक प्राकृतिक घटनाओं के विस्तृत अध्ययन ने हमें यह सीख मिलती है कि ना कि हम केवल मौसम व जलवायु की स्थिति का अनुमान लगाएं बल्कि इन जानकारियों से अनुभव ले और इनका प्रयोग दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं से लोगों की जान बचाने में करें। डब्ल्यू एम ओ ने पिछले 150 वर्षों में हुई विध्वंशक प्राकृतिक घटनाओं के आधार पर यह रिपोर्ट जारी की
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