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चाय बेचने से लेकर करोड़पति तक, पढ़िए भाजपा के नए अध्यक्ष की पूरी कुंडली
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sat, 09 Apr 2016 09:58 AM IST
सार
- केशव प्रसाद मौर्या पर दंगे भड़काने के सबसे ज्यादा मामले
- हत्या, साजिश, दंगा, धोखाधड़ी समेत कई संगीन धाराएं
- इलाहाबाद और कौशांबी के विभिन्न थानों में हैं नामजद
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केशव प्रसाद मौर्या
- फोटो : amar ujala bureau
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विस्तार
भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या का जैसे-जैसे कद और पद बढ़ा, उन पर मुकदमे भी लदते गए। इनमें साजिश, लूट, दंगा भड़काने, धार्मिक स्थल तोड़ने, धोखाधड़ी, कूट रचना समेत तमाम संगीन धाराओं में उन पर मुकदमा दर्ज है। इनमें सबसे अधिक दंगा भड़काने का है। इलाहाबाद और कौशांबी के विभिन्न थानों में कुल दस एफआईआर दर्ज है।
केशव प्रसाद के खिलाफ सबसे पहले 1996 में कौशांबी के पश्चिम शरीरा थाने में दंगा भड़काने, सरकारी काम में बाधा, पुलिस पर हमला, बलवा और 7 सीएलए के तहत एफआईआर हुई। इसके बाद ठीक दो साल बाद इलाहाबाद के कर्नलगंज थाने में बलवा, धमकी, पुलिस पर हमला, सरकारी काम में बाधा, तोड़फोड़, 7 सीएलए के तहत मुकदमा लिखा गया।
2008 में कौशांबी के मोहम्मदपुर पइंसा थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट लिखी गई। इसी घटना के साथ एक अन्य मुकदमा लिखा गया है जिसमें केशव पर मोहम्मदपुर पइंसा थाने में ही धार्मिक स्थल तोड़ने, बलवा, दंगा भड़काने की एफआईआर दर्ज हुई है। 2011 में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही केशव दोबारा सक्रिय हुए।
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केशव प्रसाद के खिलाफ सबसे पहले 1996 में कौशांबी के पश्चिम शरीरा थाने में दंगा भड़काने, सरकारी काम में बाधा, पुलिस पर हमला, बलवा और 7 सीएलए के तहत एफआईआर हुई। इसके बाद ठीक दो साल बाद इलाहाबाद के कर्नलगंज थाने में बलवा, धमकी, पुलिस पर हमला, सरकारी काम में बाधा, तोड़फोड़, 7 सीएलए के तहत मुकदमा लिखा गया।
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2008 में कौशांबी के मोहम्मदपुर पइंसा थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट लिखी गई। इसी घटना के साथ एक अन्य मुकदमा लिखा गया है जिसमें केशव पर मोहम्मदपुर पइंसा थाने में ही धार्मिक स्थल तोड़ने, बलवा, दंगा भड़काने की एफआईआर दर्ज हुई है। 2011 में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही केशव दोबारा सक्रिय हुए।
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केशव से बदसलूकी में डीएम, एसएसपी हुए थे तलब
केशव प्रसाद मौर्या
- फोटो : social media
पिछले चुनाव में बहुत कम अंतर से हारने वाले केशव को 2012 विधानसभा चुनाव में सिराथू से टिकट मिलना तय था। उनके खिलाफ कौशांबी में 2011 में तीन मुकदमे दर्ज हुए। पहला मंझनपुर थाने में बलवा, दंगा भड़काने, मारपीट, धमकी समेत अन्य धाराओं में दर्ज हुआ। इसके बाद कोखराज थाने में एक मुस्लिम युवक की हत्या और साजिश के मामले में व्ळ नामजद हुए। कोखराज थाने में भी दंगा भड़काने की एफआईआर हुई। 2012 में केशव प्रसाद सिराथू विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे।
2013 में केशव पर बलवा, मारपीट, लूट समेत अन्य धाराओं में कौशांबी के मंझनपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। साल 2013 में केशव के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में भीड़ एकत्र करना, पुलिस टीम पर हमला करने की रिपोर्ट दर्ज हुई। केशव गिरफ्तार भी हुए। 2014 में लोकसेवा आयोग अध्यक्ष के खिलाफ प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ तो केशव छात्रों के समर्थन में कूद पड़े।
छात्र आंदोलन के दौरान हुए बवाल में केशव के खिलाफ बलवा, सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने, तोड़फोड़, पुलिस टीम पर हमला, सरकारी काम में बाधा समेत अनेक धाराओं में मुकदमा लिखा गया। इसका लाभ केशव को लोकसभा चुनाव के दौरान मिला। बड़ी संख्या में युवा केशव के साथ दिखे। केशव प्रसाद सांसद चुने जाने के बाद भी छात्रों के समर्थन में हमेशा खड़े रहे।
सन 2015 में लोकसेवा आयोग के मुद्दे पर छात्रों का आंदोलन चल रहा था। बेली अस्पताल में छात्रों से मिलने पहुंचे कौशांबी से भाजपा सांसद विनोद सोनकर से दरोगा ने बदसलूकी की। इसके विरोध में सांसद केशव प्रसाद मौर्य और विनोद सोनकर जिलाधिकारी आवास के सामने धरने पर बैठ गए। यहां भी पुलिस से सांसदों की जमकर नोंकझोंक हुई। मामला लोकसभा तक पहुंचा। लोकसभा संसदीय समिति ने डीएम और एसएसपी को तलब किया था।
2013 में केशव पर बलवा, मारपीट, लूट समेत अन्य धाराओं में कौशांबी के मंझनपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। साल 2013 में केशव के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में भीड़ एकत्र करना, पुलिस टीम पर हमला करने की रिपोर्ट दर्ज हुई। केशव गिरफ्तार भी हुए। 2014 में लोकसेवा आयोग अध्यक्ष के खिलाफ प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ तो केशव छात्रों के समर्थन में कूद पड़े।
छात्र आंदोलन के दौरान हुए बवाल में केशव के खिलाफ बलवा, सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने, तोड़फोड़, पुलिस टीम पर हमला, सरकारी काम में बाधा समेत अनेक धाराओं में मुकदमा लिखा गया। इसका लाभ केशव को लोकसभा चुनाव के दौरान मिला। बड़ी संख्या में युवा केशव के साथ दिखे। केशव प्रसाद सांसद चुने जाने के बाद भी छात्रों के समर्थन में हमेशा खड़े रहे।
सन 2015 में लोकसेवा आयोग के मुद्दे पर छात्रों का आंदोलन चल रहा था। बेली अस्पताल में छात्रों से मिलने पहुंचे कौशांबी से भाजपा सांसद विनोद सोनकर से दरोगा ने बदसलूकी की। इसके विरोध में सांसद केशव प्रसाद मौर्य और विनोद सोनकर जिलाधिकारी आवास के सामने धरने पर बैठ गए। यहां भी पुलिस से सांसदों की जमकर नोंकझोंक हुई। मामला लोकसभा तक पहुंचा। लोकसभा संसदीय समिति ने डीएम और एसएसपी को तलब किया था।
चाय की दुकान के साथ-साथ बेचते थे अखबार
केशव प्रसाद मौर्या
- फोटो : amar ujala bureau
देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में भाजपा की कमान संभालने वाले केशव प्रसाद मौर्य कभी कौशाम्बी के सिराथू कस्बे में एक छोटी सी दुकान में पिता के साथ चाय और अखबार बेचने थे। केशव इसी दुकान में चाय पीने आने वाले सियासत दां से राजनीति का ककहरा सीखा। अयोध्या आंदोलन के दौरान विहिप से जुड़े, फिर राजनीति में अपनी कामयाबी की नई इबारत लिखते चले गए।
पिता श्यामलाल मौर्य ने 80 के दशक में परिवार की जीविका चलाने के लिए ब्लॉक के सामने चाय की छोटी दुकान खोली थी। यहीं केशव पिता का हाथ बंटाया करते थे। वर्ष 1989 में अयोध्या आंदोलन के दौरान विहिप से जुड़े कई नेता उनकी दुकान पर आते थे, जिनकी संगत में केशव विहिप की विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन से जुड़े। फिर घर छोड़कर इलाहाबाद आ गए और विहिप का कामकाज संभालने लगे। जल्दी ही वह विहिप दिग्गज अशोक सिंहल के चहेते बन गए। अपनी कार्यशैली से छाप छोड़ने वाले केशव ने समय के साथ चलते हुए भाजपा का दामन थामकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
सबसे पहले भाजपा के टिकट पर उन्होंने इलाहाबाद पश्चिमी विधान सभा सीट से किस्मत आजमाई, लेकिन नाकाम रहे लेकिन वर्ष 2012 में सिराथू विधानसभा सीट पर सपा की आंधी को दरकिनार करते हुए उन्होंने कमल खिलाकर सबको चौंका दिया। विधायक बनने के बाद पार्टी ने उन्हें वर्ष 2014 में फूलपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया, जहां से जीतकर वह सांसद बने। करीबियों के मुताबिक केशव की संगठनात्मक क्षमता और वाकपटुता ने ही उन्हें भाजपा का मुखिया बना दिया।
पिता श्यामलाल मौर्य ने 80 के दशक में परिवार की जीविका चलाने के लिए ब्लॉक के सामने चाय की छोटी दुकान खोली थी। यहीं केशव पिता का हाथ बंटाया करते थे। वर्ष 1989 में अयोध्या आंदोलन के दौरान विहिप से जुड़े कई नेता उनकी दुकान पर आते थे, जिनकी संगत में केशव विहिप की विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन से जुड़े। फिर घर छोड़कर इलाहाबाद आ गए और विहिप का कामकाज संभालने लगे। जल्दी ही वह विहिप दिग्गज अशोक सिंहल के चहेते बन गए। अपनी कार्यशैली से छाप छोड़ने वाले केशव ने समय के साथ चलते हुए भाजपा का दामन थामकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
सबसे पहले भाजपा के टिकट पर उन्होंने इलाहाबाद पश्चिमी विधान सभा सीट से किस्मत आजमाई, लेकिन नाकाम रहे लेकिन वर्ष 2012 में सिराथू विधानसभा सीट पर सपा की आंधी को दरकिनार करते हुए उन्होंने कमल खिलाकर सबको चौंका दिया। विधायक बनने के बाद पार्टी ने उन्हें वर्ष 2014 में फूलपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया, जहां से जीतकर वह सांसद बने। करीबियों के मुताबिक केशव की संगठनात्मक क्षमता और वाकपटुता ने ही उन्हें भाजपा का मुखिया बना दिया।
केशव और उनकी पत्नी के नाम करोड़ों की संपत्ति
केशव
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
पीएम मोदी की तरह फूलपुर के सांसद और अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का जीवन तमाम चुनौतियों से भरा रहा है। मूल रूप से कौशाम्बी की सिराथू तहसील के कसिया गांव के केशव इलाहाबाद की अलकापुरी कालोनी में अपने परिवार के साथ वर्षों से रहते हैं। कभी पिता के साथ चाय की दुकान पर हाथ बंटाने वाले केशव अब करोड़ों के मालिक हैं। केशव और उनकी पत्नी के नाम करोड़ों की चल-अचल संपत्ति है। पत्नी राजकुमारी देवी ही उनका कारोबार देखती हैं।
वर्ष 2014 में हुए फूलपुर लोकसभा चुनाव के लिए दिए गए हलफनामे के मुताबिक केशव प्रसाद मौर्य और उनकी पत्नी के पास करोड़ों रुपये की जायदाद है। फिलहाल केशव के पास 2.33 करोड़ की चल एवं 5.50 करोड़ की अचल संपत्ति है। उनकी पत्नी राजकुमारी देवी के पास 18.16 लाख की चल एवं 1.30 करोड़ की अचल संपत्ति है। उनके दो बेटे योगेश कुमार और आशीष कुमार हैं।
केशव कई कंपनियों के प्रोपराइटर एवं डायरेक्टर हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन से बीए पास केशव प्रसाद मौर्य कामधेनु फिलिंग स्टेशन, कामधेनु सप्लायर्स के प्रोपराइटर, कामधेनु लाजेस्टिक प्राइवेट लिमिटेड, कामधेनु कृषि ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, कामधेनु चैरिटेबल सोसाइटी के अध्यक्ष एवं जीवन ज्योति क्लीनिक एंड हॉस्पिटल के पार्टनर भी हैं।
भाजपा को राजनीति में मुकाम देने वाले अयोध्या आंदोलन के दौरान आगे बढ़कर मोर्चा संभालने वालों में केशव प्रसाद मौर्र्य भी शामिल थे। कार सेवा के दौरान वह विवादित ढांचे के गुंबद पर चढ़ गए थे। उनके साथ कार सेवा के लिए अयोध्या जाने वाले अवकाश प्राप्त खेल प्रशिक्षक आरएन सिंह बताते हैं,अयोध्या आंदोलन के दौरान केशव ट्रेन में सवार होकर फैजाबाद तक गए थे। रेलवे स्टेशन पर टीटीई ने रेलगाड़ी का दरवाजा बंद कर दिया था। इससे कार सेवक ट्रेन से बाहर नहीं निकल पा रहे थे तब केशव ने ही टीटीई से चाभी छीनकर गेट खोला था।
वर्ष 2014 में हुए फूलपुर लोकसभा चुनाव के लिए दिए गए हलफनामे के मुताबिक केशव प्रसाद मौर्य और उनकी पत्नी के पास करोड़ों रुपये की जायदाद है। फिलहाल केशव के पास 2.33 करोड़ की चल एवं 5.50 करोड़ की अचल संपत्ति है। उनकी पत्नी राजकुमारी देवी के पास 18.16 लाख की चल एवं 1.30 करोड़ की अचल संपत्ति है। उनके दो बेटे योगेश कुमार और आशीष कुमार हैं।
केशव कई कंपनियों के प्रोपराइटर एवं डायरेक्टर हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन से बीए पास केशव प्रसाद मौर्य कामधेनु फिलिंग स्टेशन, कामधेनु सप्लायर्स के प्रोपराइटर, कामधेनु लाजेस्टिक प्राइवेट लिमिटेड, कामधेनु कृषि ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, कामधेनु चैरिटेबल सोसाइटी के अध्यक्ष एवं जीवन ज्योति क्लीनिक एंड हॉस्पिटल के पार्टनर भी हैं।
भाजपा को राजनीति में मुकाम देने वाले अयोध्या आंदोलन के दौरान आगे बढ़कर मोर्चा संभालने वालों में केशव प्रसाद मौर्र्य भी शामिल थे। कार सेवा के दौरान वह विवादित ढांचे के गुंबद पर चढ़ गए थे। उनके साथ कार सेवा के लिए अयोध्या जाने वाले अवकाश प्राप्त खेल प्रशिक्षक आरएन सिंह बताते हैं,अयोध्या आंदोलन के दौरान केशव ट्रेन में सवार होकर फैजाबाद तक गए थे। रेलवे स्टेशन पर टीटीई ने रेलगाड़ी का दरवाजा बंद कर दिया था। इससे कार सेवक ट्रेन से बाहर नहीं निकल पा रहे थे तब केशव ने ही टीटीई से चाभी छीनकर गेट खोला था।