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Explained: 17.50 लाख भारतीय कहां गए? हर साल एक लाख से ज्यादा लोग छोड़ रहे देश, जानें कहां की ले रहे नागरिकता

Tue, 25 Jul 2023 05:21 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 25 Jul 2023 05:21 PM IST
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सार
Indian Citizens Leaving India Full Explained : आज हम यही जानने की कोशिश करेंगे। पिछले 13 साल में कब कितने लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी है? इन लोगों ने किन-किन देशों की नागरिकता ली है? आखिर ये लोग क्यों भारत छोड़ रहे हैं? आइए समझते हैं... 
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Why So Many Indians Leaving India Know How Many People Leave India Every Year Where They Taking Citizenship
देश छोड़ रहे भारतीय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले 13 साल के अंदर (2011 से 2023 तक) 17.50 लाख लोगों ने भारत की नागरिका छोड़ दी है। ये लोग विदेशों में जाकर बस चुके हैं। इसको लेकर हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2023 भी आ चुकी है। इसमें भी भारत छोड़ने वाले नागरिकों का पूरा ब्योरा दिया गया है। यही नहीं, ये भी बताया गया है कि आखिर लोग भारत की नागरिकता छोड़कर विदेशों में क्यों बस रहे हैं? 


आज हम यही जानने की कोशिश करेंगे। पिछले 13 साल में कब कितने लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी है? इन लोगों ने किन-किन देशों की नागरिकता ली है? आखिर ये लोग क्यों भारत छोड़ रहे हैं? आइए समझते हैं... 

 

13 साल में कितने लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी है? 
साल कितने भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी? 
2011 1,22,819
2012 1,20,923
2013 1,31,405
2014 1,29,328
2015 1,31,489
2016 1,41,603
2017 1,33,049
2018 1,34,561
2019 1,44,017
2020   85,256
2021 1,63,370
2022 2,25,620
2023   87,026
कुल 17,50,466
   
नोट : 2023 के आंकड़े 26 जून तक के हैं। आंकड़े केंद्रीय विदेश मंत्रालय से लिए गए हैं। 
 

पाकिस्तान, बांग्लादेश तक की नागरिकता ले रहे लोग 
केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने 135 देशों की सूची जारी की है, जहां इन 17.50 लाख से ज्यादा लोग गए हैं। हैरानी की बात है कि भारत की नागरिकता छोड़कर कई लोग पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल और चीन तक की नागरिकता ले चुके हैं। भारत छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा लोग अमेरिका में बसे हैं। इनकी संख्या करीब सात लाख बताई जा रही है। इसके अलावा ब्रिटेन, रूस, जापान, इस्राइल, इटली, फ्रांस, यूएई, यूक्रेन न्यूजीलैंड, कनाडा, जर्मनी जैसे देशों में भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं। कुछ लोगों ने युगांडा, पापुआ न्यू गिनी, मोरक्को, नाइजीरिया, नॉर्वे, जाम्बिया, चिली जैसे देशों की नागरिकता भी ली है।   
 

कोरोना के बाद सबसे ज्यादा लोग विदेश में बसे 
मानसून सत्र के दौरान सांसद कीर्ति चिदंबरम के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने बताया है कि कोरोना के बाद 2022 में सबसे ज्यादा 2.25 लाख लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी है। कोरोना के दौरान यानी 2020 में सबसे कम 85 हजार और 2021 में 1.63 लाख लोग विदेश में जाकर बस गए। 
 

भारत क्यों छोड़ रहे हैं लोग? 
इसे समझने के लिए हमने विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, 'आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो साफ पता चलता है कि भारत छोड़ने वाले ज्यादातर लोग नौकरीपेशा हैं। इनमें अमीरों की संख्या कम है। नागरिकता छोड़ने वाले करोड़पति भारतीयों की संख्या केवल 2.5 प्रतिशत है, जबकि बाकी 97.5 प्रतिशत लोग नौकरीपेशा से हैं।'

डॉ. आदित्य के अनुसार, भारत की नागरिकता छोड़ने वाले 90 से 95 प्रतिशत लोग बेहतर कॅरियर विकल्प के लिए विदेशों में बसते हैं। कई लोग छोटे देश इसलिए चुनते हैं, ताकि वहां जाकर वह व्यापार कर सकें। इन देशों में टैक्स का दायरा भी कम होता है। इससे उन्हें कारोबार बढ़ाने का अच्छा मौका मिल जाता है। इसके अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे देशों में जाने वाले ज्यादातर लोग अपने निजी कारणों से जाते हैं। 

उन्होंने कहा, भारत दोहरी नागरिकता नहीं देता, इसलिए किसी दूसरे देश में बसने की इच्छा रखने वाले लोगों को नागरिकता छोड़नी जरूरी है। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में विदेश छोड़ने वालों के आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई है। 2010 तक नागरिकता छोड़ने वाले सात प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रहे थे। अब यह दर 29% हो गई है।
 

भारतीय लोगों को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है?
संसद में केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस सवाल का जवाब दिया है। उन्होंने कहा, 'ज्यादातर लोग काम के सिलसिले में विदेश जाते हैं और वहां व्यक्तिगत सुविधाओं के चलते रहने लगते हैं। ऐसे में भारतीयों के पलायन को रोकने के लिए सरकार कई तरह से कदम उठा रहा है। मेक इन इंडिया के जरिए भारत में ही नागरिकों को बेहतर कॅरियर का विकल्प देने की कोशिश हो रही है। इसका असर भी हो रहा है।'
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