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ताजा अध्ययन में खुलासा: संक्रमितों में मिले गुलियन बेरी सिंड्रोम के ज्यादा मामले
Sun, 25 Jul 2021 05:34 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 25 Jul 2021 05:34 AM IST
सार
महत्वपूर्ण बात यह है कि जब यह अध्ययन चल रहा था, तब जीबीएस वाले 33.3 फीसदी मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी और नौ लोगों की मौत भी हुई।
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कोरोना मरीज(फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
महाराष्ट्र में हुए एक ताजा अध्ययन में कोरोना संक्रमितों में गुलियन बेरी सिंड्रोम (जीबीएस) के मामले ज्यादा मिले है। जीबीएस मरीजों का इलाज कर रहे राज्य के 15 बड़े अस्पतालों द्वारा किए इस शोध में पाया गया कि यह मरीज में संक्रमण के दौरान ( पैराइन्फेक्शस) और संक्रमण के बाद (पोस्ट इन्फेक्शन), दोनों तरह से हो सकता है।
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डॉक्टरों के मुताबिक, पैराइन्फेक्शस जीबीएस की ज्यादा निगरानी की जरूरत होती है। हालांकि, कोरोना संक्रमण ठीक करने के लिए चल रहा उपचार इसमें लाभदायक हो सकता है।
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यह अध्ययन मार्च 2020 से लेकर नौ-दस माह तक 42 कोरोना-जीबीएस वाले रोगियों पर किया गया था। इनकी औसत उम्र 59 साल थी, जिनमें 73.8 फीसदी पुरुष थे। इनमें से 33 फीसदी में जीबीएस के लक्षण मिले जबकि छह मरीज लक्षण रहित रहे। कोरोना और जीबीएस के बीच औसत अंतराल 14 दिनों का था। यह न्यूनतम एक और अधिकतम 40 दिन था।
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अध्ययन के सह-लेखक डॉ प्रद्युमन ओक का कहना है कि इसमें कोरोना और जीबीएस के बीच आंतरिक संबंध साबित हुआ है।
हमें पता लगा है कि कोरोना उन वायरल संक्रमणों में से एक है, जिससे जीबीएस होता है। डॉक्टरों का कहना है कि वैसे तो एक लाख में एक मरीज में ही यह बीमारी देखने को मिलती है। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण जीबीएस मरीजों की तादाद बढ़ी है। जिन मरीजों के अंगों में तेजी से कमजोरी आने लगती है, उनमें से 10-20 फीसदी को सांस में तकलीफ होने के साथ-साथ वेंटिलेटर की जरूरत भी पड़ सकती है।