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चांद से जुड़े राज: कभी पूरा तो कभी अधूरा क्यों दिखता है चंद्रमा, ये नहीं होता तो धरती पर क्या अलग होता?
Wed, 23 Aug 2023 05:44 AM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 23 Aug 2023 05:44 AM IST
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सार
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चांद
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
भारत का महत्वाकांक्षी चंद्रयान-3 मिशन बुधवार शाम को चांद की सतह पर साॅफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रयान-3 के लाॅन्चिंग के बाद से ही चंद्रमा की चर्चा चारों तरफ हो रही है। चंद्रयान-3 के लैंडर ने चांद की उस इलाके की कई दिलचस्प तस्वीरें भेजी हैं, जिन्हें कभी किसी ने नहीं देखा है। आज हम आपको चांद से जुड़े कई सवालों के जवाब बताएंगे।
चांद
- फोटो :
AMAR UJALA
पहले जानते है हैं आखिर चांद है क्या?
चांद कोई ग्रह नहीं है, बल्कि एक उपग्रह है। यह धरती की चारों तरफ चक्कर लगाता है। सबसे खास बात यह है कि चंद्रमा धरती का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। इसके साथ ही यह सौरमंडल का पांचवां विशाल प्राकृतिक उपग्रह है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, करीब 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी और थीया (मार्स के आकार का तत्व) के बीच भयानक टक्कर हुई थी, जिसके बाद बचे मलबे से चांद का निर्माण हुआ।
चांद कोई ग्रह नहीं है, बल्कि एक उपग्रह है। यह धरती की चारों तरफ चक्कर लगाता है। सबसे खास बात यह है कि चंद्रमा धरती का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। इसके साथ ही यह सौरमंडल का पांचवां विशाल प्राकृतिक उपग्रह है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, करीब 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी और थीया (मार्स के आकार का तत्व) के बीच भयानक टक्कर हुई थी, जिसके बाद बचे मलबे से चांद का निर्माण हुआ।
पूर्णिमा का चांद
- फोटो :
@pixabay
चंद्रमा आकार बदलता क्यों दिखाई देता है?
चंद्रमा पर खुद का कोई प्रकाश नहीं होता। इसकी रोशनी सूर्य की रोशनी होती है जो चंद्रमा की सतह से परावर्तित होकर आती है। चांद हमारे पृथ्वी के चारो ओर चक्कर लगाता है, इस दौरान चन्द्रमा की बदलती स्थिति से हमें भ्रम होता है कि चन्द्रमा अपना अकार बदलता है।
सूर्य चांद से करीब 400 गुना बड़ा है। लेकिन पृथ्वी से दोनों लगभग समान आकार के दिखते हैं। इसका कारण है कि सूर्य की तुलना में चांद पृथ्वी के ज्यादा करीब है। चंद्रमा का आकार एक अपूर्ण गोले जैसा है। दूर से देखने पर यह लगभग गोल दिखता है। करीब से देखने पर, चंद्रमा की सतह पहाड़ों, घाटियों और गड्ढों का 3डी व्यू देता है। पृथ्वी से, चंद्रमा की सूर्य की रोशनी वाली सतह पर पूरे महीने बदलती दिखाई देती है। इन्हें हम अर्धचंद्र, पूर्णिमा और अन्य चंद्र कलाओं के रूप में जानते हैं। जब पूरा चांद दिखाई देता है तो उसे पूर्णिमा कहते हैं।
चंद्रमा पर खुद का कोई प्रकाश नहीं होता। इसकी रोशनी सूर्य की रोशनी होती है जो चंद्रमा की सतह से परावर्तित होकर आती है। चांद हमारे पृथ्वी के चारो ओर चक्कर लगाता है, इस दौरान चन्द्रमा की बदलती स्थिति से हमें भ्रम होता है कि चन्द्रमा अपना अकार बदलता है।
सूर्य चांद से करीब 400 गुना बड़ा है। लेकिन पृथ्वी से दोनों लगभग समान आकार के दिखते हैं। इसका कारण है कि सूर्य की तुलना में चांद पृथ्वी के ज्यादा करीब है। चंद्रमा का आकार एक अपूर्ण गोले जैसा है। दूर से देखने पर यह लगभग गोल दिखता है। करीब से देखने पर, चंद्रमा की सतह पहाड़ों, घाटियों और गड्ढों का 3डी व्यू देता है। पृथ्वी से, चंद्रमा की सूर्य की रोशनी वाली सतह पर पूरे महीने बदलती दिखाई देती है। इन्हें हम अर्धचंद्र, पूर्णिमा और अन्य चंद्र कलाओं के रूप में जानते हैं। जब पूरा चांद दिखाई देता है तो उसे पूर्णिमा कहते हैं।
moon
- फोटो :
iStock
चंद्रमा के चमक का राज क्या है?
चंद्रमा पर सूरज की तरह खुद का प्रकाश नहीं होता। यहां जो चमक होती है वो वास्तव में सूर्य की रोशनी है जो चंद्रमा की सतह से परावर्तित होती है। कई बार चांद दिन में नजर आता है। आखिर यह खगोलीय घटना कैसे घटती है। चांद दिन में सूर्य का प्रकाश कम होने की वजह से नजर आता है। इसके बावजूद सूर्य के प्रकाश के परावर्तित होने की वजह से चांद दिन में दिखता है। चांद दिन में ज्यादातर सूरज के उदय और अस्त होने के समय दिखाई देता है।
दरअसल, वायुमंडल में गैस के कुछ कण घूमते हैं। इन कणों में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की रोशनी होती है। इनसे छोटी तरंगें भी निकलती हैं, जो नीले और बैंगनी रंग की होती है। यह एक अलग दिशा में प्रकाश को अवशोषित और फिर से उत्सर्जित करती है। ऐसे में आसमान का रंग नीला हो जाता है। इससे सूर्य का प्रकाश कम हो जाता है और दिन में चांद दिखाई देता है।
चंद्रमा पर सूरज की तरह खुद का प्रकाश नहीं होता। यहां जो चमक होती है वो वास्तव में सूर्य की रोशनी है जो चंद्रमा की सतह से परावर्तित होती है। कई बार चांद दिन में नजर आता है। आखिर यह खगोलीय घटना कैसे घटती है। चांद दिन में सूर्य का प्रकाश कम होने की वजह से नजर आता है। इसके बावजूद सूर्य के प्रकाश के परावर्तित होने की वजह से चांद दिन में दिखता है। चांद दिन में ज्यादातर सूरज के उदय और अस्त होने के समय दिखाई देता है।
दरअसल, वायुमंडल में गैस के कुछ कण घूमते हैं। इन कणों में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की रोशनी होती है। इनसे छोटी तरंगें भी निकलती हैं, जो नीले और बैंगनी रंग की होती है। यह एक अलग दिशा में प्रकाश को अवशोषित और फिर से उत्सर्जित करती है। ऐसे में आसमान का रंग नीला हो जाता है। इससे सूर्य का प्रकाश कम हो जाता है और दिन में चांद दिखाई देता है।
moon
- फोटो :
iStock
चांद पर तापमान कितना होता है?
पृथ्वी की तरह ही चांद की सतह पर भी अलग-अलग जगहों का तापमान दिन और रात में अलग-अलग होता है। लेकिन धरती से अलग चांद के दिन और रात के तापमान में काफी ज्यादा अंतर होता है। चांद की भूमध्य रेखा के करीब रात में तापमान माइनस 173 डिग्री तक चला जाता है। जबकि दिन के समय यह तापमान 127 डिग्री तक बढ़ जाता है। कुछ गहरे क्रेटर्स में तो तापमान हमेशा माइनस 240 तक कम रहता है।
पृथ्वी की तरह ही चांद की सतह पर भी अलग-अलग जगहों का तापमान दिन और रात में अलग-अलग होता है। लेकिन धरती से अलग चांद के दिन और रात के तापमान में काफी ज्यादा अंतर होता है। चांद की भूमध्य रेखा के करीब रात में तापमान माइनस 173 डिग्री तक चला जाता है। जबकि दिन के समय यह तापमान 127 डिग्री तक बढ़ जाता है। कुछ गहरे क्रेटर्स में तो तापमान हमेशा माइनस 240 तक कम रहता है।
moon
- फोटो :
iStock
यदि चन्द्रमा न होता तो क्या होता?
यदि चंद्रमा न होता तो पृथ्वी एक बहुत ही अलग दुनिया होती। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण हमारे ग्रह को अपनी धुरी पर डगमगाने से रोकता है, जो हमारी जलवायु को स्थिर करने में मदद करता है। चंद्रमा पृथ्वी के महासागर में उठने वाले ज्वार-भाटा को बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चन्द्रमा में गुरुत्वाकर्षण बहुत कम है। जैसा कि इसमें पृथ्वी की तुलना में द्रव्यमान कम होता है (पृथ्वी के छठें भाग के बराबर), चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कमजोर होता है। चंद्रमा पर, आप पृथ्वी की तुलना में लगभग छह गुना अधिक ऊंची छलांग लगाएंगे फिर भी आप वापस नीचे आ जाएंगे। यदि धरती पर किसी का वजन 60 किलो है तो चन्द्रमा पर उसका वजन मात्र 10 किलो ही रह जाएगा।
यदि चंद्रमा न होता तो पृथ्वी एक बहुत ही अलग दुनिया होती। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण हमारे ग्रह को अपनी धुरी पर डगमगाने से रोकता है, जो हमारी जलवायु को स्थिर करने में मदद करता है। चंद्रमा पृथ्वी के महासागर में उठने वाले ज्वार-भाटा को बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चन्द्रमा में गुरुत्वाकर्षण बहुत कम है। जैसा कि इसमें पृथ्वी की तुलना में द्रव्यमान कम होता है (पृथ्वी के छठें भाग के बराबर), चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कमजोर होता है। चंद्रमा पर, आप पृथ्वी की तुलना में लगभग छह गुना अधिक ऊंची छलांग लगाएंगे फिर भी आप वापस नीचे आ जाएंगे। यदि धरती पर किसी का वजन 60 किलो है तो चन्द्रमा पर उसका वजन मात्र 10 किलो ही रह जाएगा।