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Digital Competition Law: डिजिटल प्रतिस्पर्धा कानून से खत्म करेंगे एकाधिकार, गूगल-एपल पर सरकार की नजर

Fri, 23 Dec 2022 06:00 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 23 Dec 2022 06:00 AM IST
सार

संसदीय समिति ने डिजिटल बाजार की कंपनियों को अपने मंच पर भारी छूट देने, अपने ब्रांड को तरजीह देने और सर्च एवं रैंकिंग में प्राथमिकता देने जैसे व्यवहार से दूर रहने को कहा है।

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Monopoly will end with digital competition law
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

डिजिटल बाजार में फेसबुक, यूट्यूब, ट्विटर, एपल जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों की मनमानी रोकने और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए संसदीय समिति ने नया डिजिटल प्रतिस्पर्धा कानून लाने का सुझाव दिया है। समिति ने बाजार का पूर्वानुमान लगाकर नियमन करने, महत्वपूर्ण डिजिटल मध्यस्थों को श्रेणीबद्ध करने का सुझाव भी दिया है। गूगल और एपल जैसी कंपनियां भारत में प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच के दायरे में रही हैं।

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संसदीय समिति ने डिजिटल बाजार की कंपनियों को अपने मंच पर भारी छूट देने, अपने ब्रांड को तरजीह देने और सर्च एवं रैंकिंग में प्राथमिकता देने जैसे व्यवहार से दूर रहने को कहा है। वित्त संबंधी स्थायी समिति ने ‘बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों का प्रतिस्पर्धा-रोधी व्यवहार’ रिपोर्ट बृहस्पतिवार को संसद में पेश की। यह रिपोर्ट डिजिटल बाजारों में अनुचित व्यापार प्रथाओं को लेकर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए तैयार की गई है। इसमें बाजार में एकाधिकार प्रथा खत्म करने व प्रतिस्पर्धी व्यवहार का पूर्व मूल्यांकन करने की जरूरत बताई है।
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अग्रणी संस्थाओं का वर्गीकरण जरूरी
समिति ने कहा कि अग्रणी कंपनियों का वर्गीकरण करने की जरूरत है। ये डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में प्रतिस्पर्धी व्यवहार को राजस्व, बाजार पूंजीकरण, सक्रिय कारोबार और अंतिम उपयोगकर्ता की संख्या के आधार पर नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
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भारत को प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण डिजिटल मध्यस्थ (एसआईडीआई) के व्यवहार को पूर्व विनियमित करने के लिए उन परिभाषाओं को भी अपनाना चाहिए, जिसे दुनियाभर में लागू किया जा चुका है। हितधारकों को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) व केंद्र सरकार के साथ मिलकर एसआईडीआई की उचित परिभाषा तय करने में सहयोग करना चाहिए।

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