Monoclonal Antibody: जल्द निशुल्क मिलेगा रेबीज का एंटीबॉडी टीका, केंद्रीय विशेषज्ञ समिति की अंतिम मुहर बाकी
साल 2016 में पहली बार भारत सरकार ने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को लाइसेंस दिया। तब से यह खुद के खर्च पर बाजार या निजी अस्पताल में उपलब्ध कराई जाती है। महंगी होने के कारण इसे हर कोई नहीं लगवाता, लेकिन अब इसे विस्तार देते हुए निशुल्क सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराने की योजना है।
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जानलेवा रेबीज संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए जल्द ही निशुल्क एंटीबॉडी टीका मिल सकेगा। केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की समिति का गठन किया है जो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, साल 2016 में पहली बार भारत सरकार ने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को लाइसेंस दिया। तब से यह खुद के खर्च पर बाजार या निजी अस्पताल में उपलब्ध कराई जाती है। महंगी होने के कारण इसे हर कोई नहीं लगवाता, लेकिन अब इसे विस्तार देते हुए निशुल्क सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराने की योजना है। समिति के सूत्रों का कहना है कि डाटा की समीक्षा पूरी हो गई है और लगभग सभी बातों पर सहमति बन गई है। इसका सरकारी अस्पतालों में पहुंचना लगभग तय है, बस अंतिम मुहर बाकी है।
हर मिनट छह लोगों को काटते हैं कुत्ते
समिति के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि भारत में रेबीज बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। हर साल लाखों लोग इस संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं, जिसमें 90 फीसदी से अधिक कुत्तों के काटने की वजह से संक्रमित होते हैं। आंकड़े बताते हैं कि देश में हर मिनट लगभग छह लोगों को कुत्ता काटता है।
- साल 2023 में कुत्तों के काटने से रेबीज संक्रमण की 30,43,339 घटनाएं हुई हैं, जिनमें से 286 लोगों की मौत हुई। साथ ही इस पूरी अवधि में रेबीज टीके की कुल 46,54,398 खुराक दी गईं। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों से पता चलता है कि इस बीमारी से होने वाली वैश्विक मौतों में से 36 प्रतिशत मौतें भारत में हो रही हैं।
सीरम इंस्टीट्यूट कर रहा उत्पादन
राज्यों को लिखे पत्र में देश के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल ने कहा कि रेबीज के खिलाफ भारत में लाइसेंस प्राप्त मोनोक्लोनल एंटीबॉडी रबीसील्ड ब्रांड नाम से बेचा जा रहा है, जिसका उत्पादन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा है। इसके लिए बोस्टन स्थित बायोटेक्नोलॉजी फर्म और अमेरिका के मास बायोलॉजिक्स के साथ साझेदारी है। इन संबंधित कंपनियों से मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के प्रभावों को लेकर डाटा मांगा गया।
रेबीज मृत्यु दर को शून्य तक लाने में मिलेगी मदद
राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (एनआरसीपी) के तहत रेबीज मानव मोनोक्लोनल एंटीबॉडी या एमआरएबी के नाम से यह टीका उपलब्ध कराया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि इन एंटीबॉडी शॉट्स से भारत को 2030 तक रेबीज मृत्यु दर को शून्य तक लाने में मदद मिल सकती है।