महामारी पर वार: सुपर बग से विषाणुओं तक की होगी निगरानी, WHO के साथ भारत ने शुरू किया राष्ट्रीय योजना पर काम
भारत संक्रमण रोगों का सामना कोरोनाकाल से भी पहले से कर रहा है। कोरोना के अलावा एडिनो, इन्फ्लुएंजा (फ्लू), पैराइन्फ्लुएंजा, पार्वोवायरस बी19, रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) और राइनो वायरस (सामान्य सर्दी) हर साल हजारों लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं।
विस्तार
भविष्य में कोरोना जैसी महामारी से बचाव के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय महामारी नीति पर काम शुरू है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर सरकार राष्ट्रीय महामारी तैयारी योजना बना रही है, जिसे जल्द ही सभी राज्यों के साथ साझा किया जाएगा। इसमें सुपर बग से लेकर विभिन्न तरह के विषाणुओं की निगरानी और एआई तकनीक के जरिये एक ही दिन में जिले से लेकर राज्य और दिल्ली में केंद्रीय एजेंसियों तक संदिग्ध मरीज की जानकारी साझा होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने एक फ्रेमवर्क तैयार करने का फैसला लिया है, जिससे समय पर हमें यह पता चलेगा कि देश के किस जिले में कौन सा श्वसन विषाणु मरीजों में मिल रहा है और उसका समुदाय स्तर पर प्रसार कितना है?
अब तक दो बार प्रशिक्षण
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से दो बार प्रशिक्षण दिया गया। इसमें तय किया कि किस तरह भविष्य की श्वसन महामारियों से बचा जा सकता है। इस बीच उभरते खतरों के लिए तैयारी और लचीलापन (पीआरईटी) पहल शुरू करने का निर्णय लिया जो निगरानी के साथ जोखिम मूल्यांकन और फील्ड महामारी विज्ञान को मजबूत करेगा।
पहले से मौजूद विषाणु
भारत संक्रमण रोगों का सामना कोरोनाकाल से भी पहले से कर रहा है। कोरोना के अलावा एडिनो, इन्फ्लुएंजा (फ्लू), पैराइन्फ्लुएंजा, पार्वोवायरस बी19, रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) और राइनो वायरस (सामान्य सर्दी) हर साल हजारों लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में हर साल जितने भी श्वसन संक्रमण के मामलों में 15.4% इन्फ्लूएंजा के आते हैं। इसके बाद एचआरवी (6.2%), आरएसवी (5%), एचएमपीवी (3.4%), पीआईवी (3.3%) और एडीवी (3.1%) मामले हैं।
भारत में दुनिया के 18% संक्रमण के मामले
श्वसन संक्रमण को लेकर भारत वैश्विक आबादी का 18% योगदान देता है, जिसमें गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (एसएआरआई) पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल की 2019 रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में देश में श्वसन संक्रमण से 41,996,260 मामले और 3,740 मौतें दर्ज की गईं। कोरोना का सबसे बुरा असर संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, ब्राजील, फ्रांस, रूस, स्पेन, अर्जेंटीना, यूनाइटेड किंगडम, कोलंबिया और मैक्सिको पर पड़ा।