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मोहन भागवत बोले- सबसे ज्यादा अंतरजातीय विवाह स्वयंसेवक ही करते हैं
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 21 Sep 2018 01:47 AM IST
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Mohan Bhagwat
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व्याख्यानमाला में भागवत ने कहा कि कभी जातीय व्यवस्था रही होगी, अब तो जातीय अव्यवस्था है। उन्होंने जातीय समरसता कायम करने के लिए अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में कोई सर्वेक्षण किया जाए, तो इस तरह के विवाहों के सबसे ज्यादा उदाहरण स्वयंसेवकों में ही मिलेंगे। हमें सुनिश्चित करना होगा कि समाज जातियों में न बंटे।
उन्होंने कहा कि हमें ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जिसमें महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। चाहे गाय के लिए हो या किसी अन्य बात के लिए, कानून अपने हाथ में लेना अपराध है। गौरक्षकों की तुलना गौतस्करों से करना गलत है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गलत तरीके से धर्मांतरण कराना गलत है। अनुच्छेद 370 और 35-ए पर उन्होंने दो टूक कहा कि यह सबको पता है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े ये अनुच्छेद आरएसएस को मंजूर नहीं हैं।
हिंदी बने राष्ट्रीय भाषा
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी मूलत: अंग्रेजों की भाषा है। यदि हम अपनी भाषा को सम्मान देना शुरू करें तो अंग्रेजी का दबदबा खुद खत्म होने लगेगा। यदि सभी हिंदी भाषी प्रदेश एक भाषा अपनाएं तो हिंदी विरोध कम होगा और हिंदू सभी प्रांतों को जोड़ने का काम कर सकेगी। आधुनिक शिक्षा में परंपराओं का समावेश कर नई शिक्षा नीति जल्द बनानी चाहिए।
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सरसंघचालक का चुनाव क्यों नहीं होता
इस सवाल पर भागवत ने कहा कि सरसंघचालक तो संघ का प्रमुख नाम के लिए ही है, क्योंकि सारी शक्तियां सरकार्यवाह के हाथों में होती हैं। सरसंघचालक वही करते हैं, जिसके लिए सरकार्यवाह उन्हें इजाजत देते हैं। इसीलिए सरकार्यवाह का चुनाव हर तीसरे साल होता है। संघ में हर स्तर पर चुनाव समय पर होता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संगठन है, जिसके सभी खातों की जांच ऑडिटर हर साल करता है।
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उन्होंने कहा कि हमें ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जिसमें महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। चाहे गाय के लिए हो या किसी अन्य बात के लिए, कानून अपने हाथ में लेना अपराध है। गौरक्षकों की तुलना गौतस्करों से करना गलत है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गलत तरीके से धर्मांतरण कराना गलत है। अनुच्छेद 370 और 35-ए पर उन्होंने दो टूक कहा कि यह सबको पता है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े ये अनुच्छेद आरएसएस को मंजूर नहीं हैं।
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हिंदी बने राष्ट्रीय भाषा
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी मूलत: अंग्रेजों की भाषा है। यदि हम अपनी भाषा को सम्मान देना शुरू करें तो अंग्रेजी का दबदबा खुद खत्म होने लगेगा। यदि सभी हिंदी भाषी प्रदेश एक भाषा अपनाएं तो हिंदी विरोध कम होगा और हिंदू सभी प्रांतों को जोड़ने का काम कर सकेगी। आधुनिक शिक्षा में परंपराओं का समावेश कर नई शिक्षा नीति जल्द बनानी चाहिए।
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सरसंघचालक का चुनाव क्यों नहीं होता
इस सवाल पर भागवत ने कहा कि सरसंघचालक तो संघ का प्रमुख नाम के लिए ही है, क्योंकि सारी शक्तियां सरकार्यवाह के हाथों में होती हैं। सरसंघचालक वही करते हैं, जिसके लिए सरकार्यवाह उन्हें इजाजत देते हैं। इसीलिए सरकार्यवाह का चुनाव हर तीसरे साल होता है। संघ में हर स्तर पर चुनाव समय पर होता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संगठन है, जिसके सभी खातों की जांच ऑडिटर हर साल करता है।