फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Modi leaves behind British taught by Act east Policy

एक्ट ईस्ट पॉलिसी में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटिश ख्यालात को छोड़ा पीछे 

Thu, 08 Sep 2016 03:24 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 08 Sep 2016 03:24 PM IST
विज्ञापन
Modi leaves behind British taught by Act east Policy
modi - फोटो : reuters

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत ब्रिटिश ख्यालात को पीछे छोड़ दिया है। 14 वें आसियान देशों के शिखर सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने भारत-म्यामार-थाईलैंड-कंबोडिया होते हुए वियतनाम तक जाने वाले ट्राइलैट्रल हाईवे को विकसित करने के लिए संयुक्त कार्य बल(ज्वाइंट टास्क फोर्स) बनाने की वकालत की है।

विज्ञापन


पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर के अनुसार ऐसा करके प्रधानमंत्री ने एक ही झटके में ब्रिटिश ख्यालात को पीछे छोड़ दिया है। हैदर के मुताबिक दूसरे विश्वयुद्ध तक भारत से सड़क मार्ग के जरिए चीन और आगे जाया जा सकता था, लेकिन अंग्रेजों की राय थी कि लोगों को सीमित दायरे में रखकर खुश रखो।
विज्ञापन


सुरक्षित रहो और सुरक्षित रखो। इसी तर्ज पर चलते हुए ब्रिटिश राज में इस मार्ग को सुरक्षा के लिहाज से बंद कर दिया। जब देश आजाद हुआ तब भी हम इसी नीति पर चलते रहे। अभी तक उस पर कायम हैं। हम पूर्वी देशों में जाने और व्यापार के लिए समुद्री तथा हवाई मार्ग का सहारा लेते रहे, लेकिन सुरक्षा कारणों से हाईवे के विकल्प को किनारे रखा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

यूरोप की तरह खुलेगा रास्ता

Modi leaves behind British taught by Act east Policy
सड़क - फोटो : getty images

विदेश में सचिव(वेस्ट) रहे विवेक काटजू  ने इस पहल का स्वागत किया। काटजू के अनुसार इससे यूरोप की तरह दूसरे देशों में लोगों की आवाजाही के रास्ते खुलेंगे। लोगों से लोगों का संपर्क बढ़ेगा।

व्यापार और क्षेत्रीय विकास को काफी बल मिलेगा। विविक काटजू के अनुसार मौजूदा समय  में भारत से म्यामार में 150 किमी तक सड़क मार्ग(मणिपुर से म्यामार के पामू कलेवा तक) से जाने का रास्ता है। लेकिन इसके विस्तार की बात करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्षेत्रीय विकास का खाका खीचा है।

इसके इंडिया-म्यामार-थाईलैंड-कंबोडिया-लाओस-वियतनाम तक के ट्राईलैट्रल हाईवे के रुप में विकसित किए जाने की पहल का स्वागत होना चाहिए। ऐसा होने पर कंबोडिया, लाओस और वियतनाम तक जाया जा सकेगा।

बन रहा है ट्राइलैट्रल हाईवे

Modi leaves behind British taught by Act east Policy
सड़क - फोटो : Getty

भारत-म्यामार-थाईलैंड ट्राईलैट्रल हाईवे विकसित कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि इस पर सात-आठ साल से काम चल रहा है। यह कोलकाता को सीधे थाईलैंड की राजधानी बैंकाक से जोड़ देगा और अगले साल तक यह बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसी को विस्तारित करने की बात की है। इसी से कंबोडिया, लाओस, वियतनाम के हाईवे के बस जुड़ने का प्रस्ताव है। वहीं चीन ने एक क्वाड्रीलैट्रल हाईवे विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। इसे म्यामार, भारत और बांग्लादेश तक जाना है।

भारत ने इसे अपनी सहमति दे दी है, लेकिन पुर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा चिंता, पूर्वोत्तर के उग्रवादी खतरे को देखते हुए अधिक रुचि नहीं ले रहा है। दरअसल चीन ने म्यामार तक जाने के लिए प्रचुर संसाधन का विकास कर रखा है। यह प्रस्तावित हाईवे जब गुजरेगा तो चीन के लिए इससे अपने कई प्रांतों को जोड़ना आसान हो जाएगा।

स्ट्रेटजिक इंटरेस्ट की चिंता भी कीजिए

Modi leaves behind British taught by Act east Policy
चीनी उत्‍पाद

कंबोडिया, लाओस, वियतनाम के बाजार चीनी सामान से भरे पड़े हैं। कंबोडिया, लाओस में मंदिर भी हैं और अच्छा पर्यटन स्थल है। थाईलैंड भी टूरिज्म प्लेस है। चीन के सामान सस्ते लेकिन टिकाऊ नहीं है।

लाओस जैसे छोटे देश के पास अपना उद्योग नहीं है और भारत से समुद्री रास्ते से पहुचने वाला सामान काफी महंगा हो जाता है। ऐसे में भारत कनेक्टिविटी के साथ तरक्की के रास्ते भी देख रहा है। पूर्व विदेश सचिव कनेक्टिविटी बढऩे के इस सुझाव का स्वागत तो कर रहे हैं, लेकिन में साथ ताकीद भी कर रहे हैं।

हैदर का कहना है कि इस हाईवे परियोजना के विस्तार में चीन घुस जाएगा। इसके अलावा कुछ और सुरक्षा चिंता भी खड़ी हो सकती है। हालांकि हैदर का कहना है कि दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं और सीमाएं खुल रही हैं। इसलिए ऐसा किया जा सकता है, लेकिन रणनीतिक और सामरिक हितों को ध्यान में रखा जाना जरूरी है, क्योंकि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इसी तर्ज पर कनेक्टिविटी को बंद किया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed