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निवेश की अपील: मंडाविया बोले- मोदी सरकार गरीब और किसान की समर्थक, उद्योगों को बढ़ाना भी हमारी प्राथमिकता
Thu, 25 Nov 2021 03:57 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 25 Nov 2021 03:57 PM IST
सार
मनसुख मंडाविया ने एक कार्यक्रम में कहा कि अगर देश को आगे बढ़ना है तो औद्योगिक विकास की जरूरत है। औद्योगिक विकास के बिना देश वास्तव में प्रगति नहीं कर सकता।
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मनसुख मंडाविया (file photo)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने मोदी सरकार को गरीब समर्थक, किसान हितैषी और उद्योग हितैषी बताते हुए कहा कि केंद्र की मंशा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए रसायन और पेट्रोरसायन क्षेत्र में सुधार लाने की है। मंडाविया केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री भी हैं। उन्होंने उद्योग को प्रदूषण कम करने और खतरनाक रसायनों को कम करके पर्यावरण के अनुकूल बनने के लिए कहा।
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देश को आगे बढ़ाने के लिए औद्योगिक विकास की जरूरत
मंडाविया रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग और फिक्की द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मंडाविया ने कहा कि मोदी सरकार गरीब, किसान हितैषी होने के साथ ही उद्योग हितैषी भी है। हम जानते हैं कि अगर देश को आगे बढ़ना है तो औद्योगिक विकास की जरूरत है। औद्योगिक विकास के बिना देश वास्तव में प्रगति नहीं कर सकता।
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उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीति देश के विकास में भागीदार रहे धन-सृजनकर्ताओं का सम्मान करने और उन्हें प्रोत्साहित करने की रही है। इस क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उत्पाद हमारे जीवन का हिस्सा बन गए हैं।
ये बड़ा अवसर, उद्योगों को इसका लाभ उठाने की जरूरत
मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में इस समय बहुत बड़ा अवसर है। उद्योगों को इसका लाभ उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन इस क्षेत्र के विकास के बारे में चर्चा के लिए मंच प्रदान करते हैं। इस क्षेत्र के विकास के लिए कौन से नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है, यह जानने के लिए उद्योगपतियों को चर्चा करनी चाहिए और शोध करना चाहिए। रिपोर्ट के निष्कर्ष मंत्रालय को प्रस्तुत किए जाने चाहिए। मंडाविया ने कहा कि अगर हमें नीति लानी है और सुधार करना है, तो हमें उद्योगों के लिए करना होगा। हम सरकारी कार्यालयों में बैठकर नीति बनाने वालों में से नहीं हैं।