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चुनावी वर्ष में अपनों के ही आंदोलन का सामना करेगी मोदी सरकार

Wed, 18 Apr 2018 11:15 AM IST
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Updated Wed, 18 Apr 2018 11:15 AM IST
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modi government will face movement of there allies in election year

एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में बदलाव पर जारी सियासी महाभारत के बीच मोदी सरकार को आरक्षण के सवाल पर चुनावी वर्ष में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों के ही आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। उच्च न्यायपालिका में आरक्षण की मांग पर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) ने जहां अगले महीने 'हल्ला बोल दरवाजा खोल' मुहिम शुरू करने की घोषणा की है। वहीं केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अध्यक्ष रामविलास पासवान ने भी कहा है कि इस मुद्दे पर आंदोलन के लिए यही सही वक्त है। इसके उलट तीसरी सहयोगी जनता दल (जदयू) निजी क्षेत्र में आरक्षण के मामले में आंदोलन शुरू करने के लिए कमर कस रही है। खास बात यह है कि रालोसपा, जदयू और लोजपा तीनों ही बिहार के क्षेत्रीय दल हैं।

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गौरतलब है कि एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में बदलाव से असहज भाजपा और मोदी सरकार नाराज दलितों को साधने के उपायों पर मंथन कर रही है। शीर्ष अदालत से राहत न मिलने की स्थिति में अध्यादेश का सहारा लेने के अतिरिक्त इस वर्ग को साधने के दूसरे विकल्पों पर भी शीर्ष स्तर पर रणनीति बन रही है। ऐसे समय में सहयोगियों की ओर से ही न्यायपालिका और निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग पर आंदोलन से भाजपा की रणनीति गड़बड़ा सकती है।
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रालोसपा के मुखिया और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आरक्षण न होने के कारण न सिर्फ दलित और पिछड़े बल्कि निर्धन वर्ग भी न्यायाधीश नहीं बन पाते। न्यायाधीश बनने वाले ज्यादातर की पृष्ठभूमि धनाढ्य घराने या राजनीतिक हैं। अपवाद स्वरूप ही इन वर्गों को उच्च न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व का मौका मिलता है। ऐसे में हमने 20 मई से दिल्ली में उच्च न्यायपालिका में आरक्षण के लिए 'हल्ला बोल दरवाजा खोल' मुहिम शुरू करने का फैसला किया है। लोजपा प्रमुख पासवान ने भी न सिर्फ आंदोलन की वकालत की, बल्कि साफ शब्दों में कहा कि इसकी शुरुआत के लिए यही सही वक्त है। उन्होंने पार्टी की इकाई दलित सेना को आंदोलन छेड़ने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।

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बहुत कुछ कहती है इनकी नजदीकी

modi government will face movement of there allies in election year

बिहार की ही तीसरी सहयोगी न सिर्फ उच्च न्यायपालिका में आरक्षण के सवाल पर लोजपा-रालोसपा के साथ है, बल्कि इससे एक कदम आगे जान कर निजी क्षेत्र में आरक्षण के लिए आंदोलन की तैयारियों में जुटी है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि मई महीने में आंदोलन की रूपरेखा तय हो जाएगी। 
  
बहुत कुछ कहती है नीतीश-पासवान-कुशवाहा की करीबी
 
हालांकि जदयू, रालोसपा और लोजपा बार-बार राजग में बने रहने की घोषणा करती है, मगर हाल ही में कुशवाहा-नीतीश-पासवान की नजदीकी बढने के कई सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। नीतीश रामनवमी जुलूस के दौरान सूबे में हुई हिंसा से बेहद क्षुब्ध हैं। राजगीर में उन्होंने पीएम के समक्ष स्वच्छता के साथ शांति को भी जरूरी बता कर अपनी नाराजगी का इजहार किया था। इसके बाद उन्होंने अचानक पासवान बिरादरी को महादलित में शामिल करने की घोषणा की। नीतीश ने कभी पासवान के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए महादलित का उपवर्ग बनाया था। फिर दीन बचाओ देश बचाओ अभियान के संयोजक खालिद अनवर को विधान परिषद का टिकट दे कर सियासी संदेश दिया। गौरतलब है कि अनवर को उसी दिन टिकट देने की घोषणा हुई जिस दिन उन्होंने पटना में रैली में पीएम मोदी पर लगातार कई गंभीर आरोप लगाए।  

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