'बागी से मुख्यमंत्री तक', जानिए एक योद्धा ने कैसे उखाड़ फेंकी पूर्वोत्तर से कांग्रेस
Congratulations to Mr. Zoramthanga on taking oath as Mizoram's Chief Minister. Wishing him the very best for his tenure. May the Government fulfil people's aspirations and work towards the state's growth.
— Narendra Modi (@narendramodi) December 15, 2018विज्ञापन
मिजोरम के हालात
दारफुंगा और वान्हनुअइछिंगी के घर में जन्मे जोरमथंगा आठ भाई-बहनों में नीचे से दूसरे नंबर पर है। उनका जन्म म्यांमार सीमा के पास मिजोरम के चंफई जिले के सामथांग गाँव में 13 जुलाई 1944 को हुआ था, उनके पाँच भाई और तीन बहन हैं।1960 में चंफई में ही स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद जोरमथंगा ग्रेजुएशन के लिए इंफाल के डीएम कॉलेज आ गए।युवा जोरमथंगा शिक्षक बनना चाहते थे,लेकिन मिजोरम की मुश्किल भरी सामाजिक राजनीतिक परिस्थितियाँ उन्हें अपने राज्य वापस ले आई। वे लालडेंगा की अगुवाई वाली मिजोरम नेशनल फ्रंट में शामिल हो गए।
राजनीति में शुरुआत
एमएनएफ एक प्रतिबंधित संगठन था और गुप्त तरीके से एक अलग देश के लिए सक्रिय था। इन्हीं हालात में 1966 में पास हआ एक ग्रेजुएट बागी बन गया था। जोरमथंगा को रन बंग इलाके के सचिव के पद की पेशकश की गई और उन्होंने तीन साल तक ये ज़िम्मेदारी संभाली।साल 1969 में एमएनएफ के सारे कैडर तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) चले गए। बाद में लालडेंगा ने जोरमथंगा को अपना सचिव बना लिया जिस पद पर वे सात साल तक बने रहे। साल 1979 में वे एमएनएफ के उपाध्यक्ष बन गए। विद्रोह के दौरान सेना ने जोरमथंगा को गिरफ्तार कर लिया।
मिजो शांति समझौता
जोरमथंगा को असम राइफल्स के क्वॉर्टर गार्ड में रखा, इसकी वजह ये थी कि वे असम राइफल्स को आइजोल शहर से बाहर ले जाने के लिए सक्रिय रूप से दबाव बना रहे थे। साल 1990 में हुई लालडेंगा की मृत्यु तक जोरमथंगा उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगी थे, सशस्त्र संघर्ष के दिनों में और उसके बाद के वक्त में भी जोरमथंगा ने लालडेंगा के दूत की हैसियत से कई दक्षिण एशियाई देशों की यात्रा की, 25 साल के संघर्ष के बाद एमएनएफ ने 30 जून 1986 को ऐतिहासिक मिजो शांति समझौते पर दस्तखत किया। 1987 में मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल गया, इसी ऐतिहासिक मिजो समझौते के बाद राज्य की राजनीति में जोरमथंगा का पदार्पण हुआ।
On behalf of the people of Kerala, CM Pinarayi Vijayan congratulates Mizoram Chief Minister Zoramthanga and his new government on their swearing-in. pic.twitter.com/Lbz8PUFsSf
— CMO Kerala (@CMOKerala) December 15, 2018
एमएनएफ की कमान
साल 1987 के पहले मिजोरम विधानसभा चुनाव में जोरमथंगा अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र चंफई से पहली बार विधायक बने। बागी से मुख्यमंत्री बने लालडेंगा के मंत्रिमंडल में उन्हें वित्त और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।
साल 1990 में लालडेंगा के निधन के बाद जोरमथंगा के हाथ में एमएनएफ की कमान आ गई।
साल 2008 में कांग्रेस के एक नए उम्मीदवार टीटी ज़ोथनसांगा के हाथों चंफई सीट से हारने तक जोरमथंगा यहीं से विधायक चुने जाते रहे थे। ललथनहावला की अगुवाई वाली कांग्रेस से मुक़ाबले के लिए 1998 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जोरमथंगा ने मिजोरम पीपल्स कॉन्फ्रेंस से गठजोड़ कर लिया।
सत्ता विरोधी लहर
जोरमथंगा पर मिजोरम के लोगों ने भरोसा बरकरार रखा और लगातार दूसरी बार उन्हें सत्ता मिली। 10 साल तक सत्ता में बने रहने के बाद 2008 के चुनाव में जोरमथंगा को पुनर्जीवित हुई कांग्रेस ने सत्ता विरोधी लहर पर सवार होकर करारी शिकस्त दी।
Congratulation Pu #Zoramthanga for being sworn in as the Chief Minister of #Mizoram. I believe that under your dynamic leadership the State will move forward to its new height. @PMOIndia @rashtrapatibhvn pic.twitter.com/UfpA4ygR3K
— Conrad Sangma (@SangmaConrad) December 15, 2018
कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर'
साल 2008 में एमएनएफ 21 के आँकड़ें से सिमटकर राज्य विधानसभा की तीन सीटों तक रह गया। इन चुनावों में जोरमथंगा अपनी पारंपरिक चंफई सीट भी गँवा बैठे थे। विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में आई कांग्रेस ने 2006 में जोरमथंगा के खिलाफ उनकी सरकार के दौरान आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति बनाने का मामला शुरू किया।
उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, एफआईआर दर्ज हुई और मामला अदालतों तक भी पहुंचा। लेकिन इस सबके बावजूद 10 साल तक सत्ता से बेदखल रहने के बाद जोरमथंगा आइज़ोल के मैकडोनल्ड हिल स्थित मुख्यमंत्री आवास में वापस लौट आए हैं।Congratulation to #Zoramthanga for being sworn-in as the new Chief Minister of #Mizoram. May Shri Zoramthanga -led Mizo National Front Government take Mizoram to greater heights of development and prosperity. pic.twitter.com/7oTsVkvEwV
— KummanamRajasekharan (@Kummanam) December 15, 2018
एमएनएफ फिलहाल बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा है और जोरमथंगा ने ये साफ किया है कि राजग से बाहर निकलने का उनका कोई इरादा नहीं है। पांचवी बार मिजोरम विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए जोरमथंगा ने एक तरह से बीजेपी के 'कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर' अभियान को पूरा कर दिया।